23 माह बाद सरगना पृथ्वीराज हुआ गिरफ्तार, पांच दिनों की पुलिस रिमांड

पांच सितंबर 2024 को दुर्गापुर थाना क्षेत्र के एनएच-19 पर पियाला कालीमंदिर के पास शाम 4:35 मिनट पर हुई एक लूटकांड ने पूरे पुलिस विभाग को झकझोर दिया था. 1.01 करोड़ रुपये की लूटकांड में पुलिस के भी कुछ लोग शामिल थे.
आसनसोल/दुर्गापुर.
पांच सितंबर 2024 को दुर्गापुर थाना क्षेत्र के एनएच-19 पर पियाला कालीमंदिर के पास शाम 4:35 मिनट पर हुई एक लूटकांड ने पूरे पुलिस विभाग को झकझोर दिया था. 1.01 करोड़ रुपये की लूटकांड में पुलिस के भी कुछ लोग शामिल थे. इस मामले का मुख्य आरोपी सालानपुर थाना क्षेत्र के रूपनारायणपुर इलाके का निवासी पृथ्वीराज ओसवाल 23 माह बाद सीआइडी के गिरफ्त में आ गया. मामले में जमानत पाने को लेकर अनेकों तिकड़म अपनाया, उच्च न्यायालय से भी उसे निराशा हाथ लगी. गिरफ्तारी को लेकर सीआइडी के बढ़ते दबिश के आगे लाचार होकर उसने दुर्गापुर महकमा अदालत में दो दिन पहले सरेंडर कर दिया. उसकी जमानत खारिज हो गयी और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. सीआइडी ने अदालत में जेल इंट्रोगेशन का प्रेयर दिया. अदालत से मंजूरी मिली, जेल में पूछताछ के बाद सीआइडी की ओर से अदालत में सोन अरेस्ट का प्रेयर डाला गया, इस मामले के उसकी गिरफ्तारी हुई और प्रोडक्शन वारंट के आधार पर बुधवार पृथ्वीराज को अदालत में हाजिर किया. जांच अधिकारी ने सात दिनों की पुलिस रिमांड की अपील की, अदालत ने पांच दिनों की रिमांड मंजूर किया. मामले में कुछ आरोपी अब भी फरार हैं. जिनकी तलाश चल रही है.क्या है पूरा मामला
लाजपत नगर दिल्ली के निवासी मुकेश चावला का गाड़ी रोककर दुर्गापुर थाना क्षेत्र इलाके में 1.01 करोड़ रुपये की लूट हुई थी. कथित तौर पर ऊक्त राशि लेकर रूपनारायणपुर से कोलकाता जाने के क्रम दुर्गापुर में गाड़ी रोककर पैसे को लूटा गया था. जिसमें पुलिस के वाहन का भी उपयोग हुआ था. जिसकी प्राथमिकी दुर्गापुर थाना में दर्ज हुई. मामले में दुर्गापुर थाना में तैनात एक सहायक अवर निरीक्षक असीम चक्रवर्ती की संलिप्ता सामने आयी और उन्हें गिरफ्तार किया था. इसके अलावा सीआइडी बम दस्ते का जवान चंदन चौधरी, पुलिस के डीआइबी विभाग का बर्खास्त अधिकारी मृत्युंजय सरकार भी इसमें शामिल था और इन्हें भी गिरफ्तार किया गया.यह मामला काफी चर्चा में रहा. पुलिस ने मुख्य आरोपी पृथ्वीराज ओसवाल को पकड़ने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन वह पुलिस के गिरफ्त में नहीं आया. हथियार रखने के मामले में उसकी पत्नी गिरफ्तार हुई और दुधमुहे बच्चे के साथ जेल गयी, इसके बावजूद पृथ्वीराज हाजिर नहीं हुआ और अपनी जमानत को लेकर काफी तिकड़म किया. सारा कुछ फेल हो गया. उच्च न्यायालय से भी उसे निराशा हाथ लगी. इस बीच मामले का जांच सीआइडी को सौंप दिया गया. आखिरकार पुलिस की दबिश के आगे वह आकर अदालत में सरेंडर कर दिया.
कुल 12 आरोपी हो चुके हैं अरेस्ट
इस मामले में पुलिस के सहायक अवर निरीक्षक असीम चक्रवर्ती, सीआइडी बम दस्ते का जवान चंदन चौधरी, डीआइबी से बर्खास्त अधिकारी मृत्युंजय सरकार, दुर्गापुर का निवासी सूरज कुमार राम, सुभाष शर्मा, सालानपुर थाना क्षेत्र के रूपनारायणपुर जोड़बाड़ी इलाके का निवासी राजू दत्ता, यूपी का निवासी मनोज कुमार सिंह, पूर्व मेदिनीपुर इलाके का निवासी मधुसूदन बाग, सालानपुर रूपनारायणपुर इलाके का निवासी गौतम चटर्जी, गोरखपुर का निवासी जयस यादव, रूपनारायणपुर आचड़ा का निवासी अगस्टीन मैसी, रांची का निवासी अंकित सिंह गिरफ्तार हुआ है. इस मामले का तार देश के कोने-कोने से जुड़ा था.
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