16-17 वर्षों से चला रहे थे अवैध पत्थर खदान, चार लोग अरेस्ट, भेजे गये हवालात

Published by : AMIT KUMAR Updated At : 08 Jun 2026 9:45 PM

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आखिरकार सालानपुर थाना पुलिस को अपने क्षेत्र में अवैध पत्थर खदानों की जानकारी मिल ही गयी.

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आसनसोल/रूपनारायणपुर.

आखिरकार सालानपुर थाना पुलिस को अपने क्षेत्र में अवैध पत्थर खदानों की जानकारी मिल ही गयी. रविवार को सालानपुर थाना क्षेत्र के रूपनारायणपुर पुलिस फांड़ी के अवर निरीक्षक सुशील किस्कू और अवर निरीक्षक एनामुल करीम मोबाइल ड्यूटी पर रहने के दौरान उन्हें विश्वस्त सूत्रों से जीतपुर मौजा, कोल्ला मौजा और नामोकिशिया मौजा में अवैध पत्थर उत्खनन की गतिविधियों की सूचना मिली. यह जानकारी उन लोगों ने अपने उच्चाधिकारियों को दी और वहां से निर्देश मिलते ही अतिरिक्त बल के साथ खदानों के पास पहुंचे. जहां उन्हें पत्थर खनन का पुख्ता सबूत मिला. स्थानीय लोगों से बात करके उन्हें खदान संचालकों का नाम पता चला, जिसके आधार पर दोनों अधिकारियों ने तीनों खदानों को लेकर अलग-अलग शिकायतें की. फिर सालानपुर थाने में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी.

तीन केस में सात बनाये गये नामजद, चार गिरफ्तार

अवर निरीक्षक सुशील किस्कू की शिकायत पर सालानपुर थाना केस नंबर 113/26 बीएनएस की धारा 303/324(5)/61(2) और एमएमडीआर एक्ट 1957 की धारा 4(1)/4(1)(ए)/21 तथा इपीए एक्ट 1986 की धारा 15 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई है. इस केस में अपर कुमारपुर आसनसोल, गोविंद मेंशन के निवासी हरविंदर सिंह कपूर उर्फ टिंकू को नामजद आरोपी बनाया गया है. इसकी तलाश पुलिस कर रही है. अवर निरीक्षक एनामुल करीम की शिकायत पर केस संख्या 114/26 में और 115/26 में केस संख्या113 वाली ही सारी धाराएं लगी है. केस संख्या 114 में एकमात्र नामजद आरोपी नामोकिशिया इलाके के निवासी जोगिंदर सिंह गिरफ्तार हुआ और अदालत ने चार दिनों की पुलिस रिमांड में भेज दिया. केस संख्या 115 में जीतपुर गांव का निवासी बिषम राय, पूर्व रांगामटिया का निवासी रंजीत सिंह और नामोकेशिया का निवासी मधुसूदन मंडल गिरफ्तार हुआ, अदालत ने इन्हें पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया. इसी केस के दो अन्य नामजद आरोपी नंदकिशोर मंडल तथा मिहिर घोष की पुलिस तलाश कर रही है.

बिना सरकारी लीज, परमिट के बीते 16-17 वर्षों से चल रही थी खदान

गैरकानूनी खनन से सरकार को राजस्व का चूना और पर्यावरण को भारी क्षति

रूपनारायणपुर पुलिस फांड़ी के दोनों अधिकारी सुशील किस्कू और एनामुल करीम ने अवैध पत्थर खदानों को लेकर जो शिकायतें दर्ज करायी है, उसमें घटनास्थल और आरोपियों के नाम अलग-अलग है, बाकी सारा कुछ एक ही लिखा हुआ है. शिकायत में कहा गया कि उन्हें भरोसेमंद सोर्स से नामोकेशिया मौजा, कोल्ला मौजा और जीतपुर मौजा में अवैध पत्थर खदानों की सूचना मिली. उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वेरिफकेशन के लिए फोर्स के साथ वहां पहुंचे, कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था. वहां खोदे हुए बड़े गड्ढे थे, जहां से पत्थर और दूसरे मिनिरल्स निकाले गये थे. ध्यान से जांच करने और स्थानीय लोगों से पूछने पर ऊक्त खदान संचालकों का नाम पता चला. बारीकी से जांच करने पर यह पता चला कि आरोपी एक दूसरे के साथ मिलकर पिछले 16-17 सालों से बिना किसी वैलिड माइनिंग लीज, परमिट, एनवायरमेंटल क्लियरेंस, ट्रांजिट पास या किसी भी कानूनी अथॉरिटी की बगैर ही इन जगहों पर खदान चला रहे थे. उन्हें यह भी पता चला कि खनन के लिए भारी मशीनरी जैसे एक्सकेवेटर, ड्रिलिंग मशीन, पोकलेन और दूसरे मेकेनिकल डिवाइस का नियमित इस्तेमाल किया जाता था. यहां से पत्थरों को निकालकर ट्रैक्टर, डंपर और दूसरे अन्य गाड़ियों से पास के स्टोन क्रशर तथा अन्य जगहों पर वाणिज्यिक लाभ के लिए भेजा जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी आपराधिक साजिश के तहत बिना कानूनी अधिकार के और कानून के नियमों का उल्लंघन करते हुए, बेईमानी से सरकारी मिनिरल्स को निकाला. जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और गैरकानूनी माइनिंग की गतिविधियों से पर्यावरण की भारी क्षति हुई तथा प्राकृतिक नजारे में भी गंभीर बदलाव आया है. आरोपियों ने यह काम अवैध आय करके अमीर बनने और लगातार गैर कानूनी काम के हिस्से के तौर पर किया. आधिकरियों ने शिकायत में लिखा कि यह काम सिस्टेमैटिक, ऑर्गनाइज्ड और लगातार चलता हुआ लग रहा था.

कोल्ला मौजा में अवैध खनन को लेकर विभिन्न विभागों को भेजा गया था लीगल नोटिस

कोल्ला मौजा में अवैध पत्थर को लेकर स्थानीय ढारासपुर इलाके के निवासी स्नेहामय पातर ने कानूनी लड़ाई लड़ी. अवैध खनन को लेकर पश्चिम बर्दवान जिलाधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मेंबर सेक्रेटरी, डिप्टी चीफ कंट्रोलर एक्सप्लोसिव, एडीडीए के चेयरमैन, स्पेशल रेवेन्यू ऑफिसर(एसआरओ-II) को अपने वकील हरिशंकर चट्टोपाध्याय के माध्यम से 21 मार्च 2025 नोटिस भेजा. इससे पहले 22 अक्तूबर 2024 को जिलाधिकारी को पत्र लिखा. जिसमें उन्होंने हरविंदर सिंह कपूर द्वारा अवैध पत्थर खदान चलाने का जिक्र करते हुए बताया था कि उनकी जमीन भी खदान में जबरन शामिल कर लिया गया है. हालांकि इस पर कुछ खास कार्रवाई नहीं हुई. पुलिस के प्राथमिकी के अनुसार यहां 16-17 वर्षों से अवैध खदान चल रही है.

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