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डाबर बलरामपुर जूनियर हाइ स्कूल बंदी के कगार पर

Updated at : 01 Aug 2025 11:59 PM (IST)
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डाबर बलरामपुर जूनियर हाइ स्कूल बंदी के कगार पर

कभी स्कूल में 70 विद्यार्थियों पर थे पांच शिक्षक, आज 11 विद्यार्थी हैं एकमात्र अतिथि शिक्षक के भरोसे

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स्कूल परिसर में शाम ढलते ही लग जाता है असामाजिक तत्वों का डेरा पुरुलिया. जिले के पुरुलिया दो नंबर प्रखंड अंचल का डाबर बलरामपुर जूनियर उच्च विद्यालय कभी भी बंद हो सकता है. स्कूल में शिक्षकों की कमी से यह नौबत आ गयी है. वर्ष 2017 में दो मंजिला स्कूल भवन का उद्घाटन हुआ था, तब 60 से 70 छात्र-छात्राओं को लेकर यहां पठन-पाठन के लिए चार से पांच शिक्षक नियुक्त किये गये थे. लेकिन धीरे-धीरे स्कूल में शिक्षकों की कमी होती गयी. अब हाल यह है कि यहां मात्र एक अतिथि शिक्षक ही रह गये हैं. छात्र-छात्राओं की संख्या भी घट कर 10 से 11 रह गयी है. स्कूल में शिक्षक व छात्र-छात्राओं की कमी से इन दिनों स्कूल परिसर व उसके खाली पड़े बरामदे में आसामाजिक तत्वों का डेरा लगने लगा है. आये दिन सुबह स्कूल के बरामदे या आसपास के स्थान पर शराब की खाली बोतल, ताश के पत्ते पाये जाते हैं. इस विषय में स्कूल के एकमात्र अतिथि शिक्षक मधुसूदन महतो ने बताया कि वह वर्ष 2021 में इस स्कूल में अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे. वर्ष 2026 तक उनकी यहां नियुक्ति है. उसके बाद न जाने स्कूल का भविष्य क्या होगा. संभव है कि तब स्कूल बंद हो जाये. फिलहाल यहां खाता कलम में 11 छात्र-छात्राओं के नाम हैं, पर पांच-छह विद्यार्थी ही यहां पढ़ने आते हैं. इन्हें भी आये दिन घर जाकर बुलाना पड़ता है. शिक्षकों की कमी से अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों को यहां दाखिला नहीं कराना चाहते. हालांकि स्कूल भवन दुरुस्त है, व्यवस्था भी ठीक-ठाक है, फिर भी शिक्षकों की कमी से यह स्कूल बंदी के कगार पर है. अतिथि शिक्षक ने माना कि स्कूल परिसर व आसपास शाम ढलते ही आये दिन चोर-उचक्कों का अड्डा लगता है और जुआ व शराबखोरी चलती है. सुबह स्कूल में आने पर शराब की खाली बोतलों व अन्य गंदगी को साफ कराना पड़ता है. शिक्षादान से लेकर स्कूल की साफ-सफाई व घंटी बजाने का सारा कार्य अकेले बचे शिक्षक को करना पड़ता है. उनकी भी उम्र बढ़ती जा रही है. 2026 के बाद बढ़ती उम्र के साथ स्कूल में पढ़ाना उनके मुश्किल होगा. वैसे में स्कूल का भविष्य अंधकारमय दिख रहा है. इस बाबत स्थानीय विष्णुपद महतो, जीतेन प्रामाणिक ने बताया कि आठ साल पहले स्कूल में 60-70 बच्चे आते थे, चार से पांच शिक्षक भी थे. आसपास के चार-पांच गांवों से बच्चे यहां पढ़ने आते थे. लेकिन आज यहां एकमात्र अतिथि शिक्षक ही रह गया है. इसलिए हमलोग भी अपने बच्चों को यहां पढ़ाना नहीं चाहते, जबकि यह स्कूल हमारे घर से काफी करीब है. मगर शिक्षकों के अभाव से हमलोग अपने बच्चों को कुछ दूर अन्य स्कूलों में पढ़ने को भेजते हैं. हमलोग चाहते हैं कि संबद्ध विभाग जल्द ही इस स्कूल में शिक्षक बहाल करे, ताकि आसपास के लोग अपने बच्चों को पढ़ने के लिए यहां भेजें. जिला स्कूल शिक्षा विभाग की अधिकारी महुआ बसाक ने कहा कि स्कूल में एक अतिथि शिक्षक है. अलबत्ता, विद्यार्थियों की तादाद काफी घट गयी है. विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने पर यहां शिक्षक की नियुक्ति पर विचार किया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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