सेल में अनुबंध उल्लंघन व भ्रष्ट आचरण पर बड़ी कार्रवाई, दर्जनों ठेकेदार ब्लैकलिस्ट

Published by : AMIT KUMAR Updated At : 20 Jan 2026 9:51 PM

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भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) ने अनुबंध शर्तों के उल्लंघन, फर्जी व जाली दस्तावेज जमा करने, भ्रष्ट आचरण, खराब प्रदर्शन और मजदूरों के वेतन से जुड़ी अनियमितताओं जैसे गंभीर मामलों में सख्त कदम उठाया है.

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आसनसोल.

भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) ने अनुबंध शर्तों के उल्लंघन, फर्जी व जाली दस्तावेज जमा करने, भ्रष्ट आचरण, खराब प्रदर्शन और मजदूरों के वेतन से जुड़ी अनियमितताओं जैसे गंभीर मामलों में सख्त कदम उठाया है. सेल ने देशभर के विभिन्न स्टील प्लांटों और कॉरपोरेट स्तर पर कई ठेकेदारों और फर्मों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. जारी आदेशों के अनुसार यह कार्रवाई भिलाई स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट, बोकारो स्टील प्लांट, इस्को स्टील प्लांट, सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन और कॉरपोरेट ऑफिस स्तर पर की गई है.

प्लांट के हिसाब से ब्लैकलिस्ट की स्थिति

जानकारी के अनुसार भिलाई स्टील प्लांट में 11 कंपनियों, राउरकेला स्टील प्लांट में चार कंपनियों, बोकारो स्टील प्लांट में आठ कंपनियों और इस्को स्टील प्लांट (आईएसपी) में छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है. वहीं सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन में तीन कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. कई मामलों में प्रतिबंध की अवधि 2026 से 2028 तक रखी गई है, जबकि कुछ फर्मों पर वर्ष 2100 तक स्थायी प्रतिबंध लगाया गया है.

आइएसपी बर्नपुर में इन कंपनियों पर कार्रवाई

इस्को स्टील प्लांट (बर्नपुर) में मेसर्स बसु केमिकल एलएलपी, मेसर्स मॉडर्न स्टील सर्विस, मेसर्स पीआर इन्फोटेक, मेसर्स शिरीन इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अनम इंजीनियरिंग स्पेशियालिटीज और मेसर्स क्रिएट्रॉनिक्स के नाम ब्लैकलिस्ट सूची में शामिल हैं. इसमें मेसर्स बसु केमिकल एलएलपी को जाली टेस्ट रिपोर्ट के कारण और मेसर्स पीआर इन्फोटेक को भ्रष्ट व फर्जी आचरण के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया गया है. अन्य कंपनियों पर विभिन्न अनियमितताओं के आधार पर कार्रवाई हुई है.

सेल का पक्ष

सेल आइएसपी के जनसंपर्क विभाग के अधिकारी भास्कर कुमार ने बताया कि जिन कॉन्ट्रैक्ट कंपनियों पर अनुबंध रद्द या प्रतिबंध लगाया गया है, उन्होंने कंपनी के टर्म्स एंड कंडीशन का पालन नहीं किया. कई मामलों में मांगे गए दस्तावेज जमा किए गए थे, लेकिन जांच में उनके फर्जी होने के प्रमाण मिले, जिसके बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई.

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