भुगतान न होने पर अवमानना मामला करने का अल्टीमेटम

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पहले से परेशान प्रबंधन को जूझना होगा नये कानूनी पचड़ों से रुपनारायणपुर. उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच में मामला जीतने के बाद भी हिंदूस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) प्रबंधन द्वारा 77 श्रमिकों का बकाया भुगतान निर्धारित समय के अंदर न करने पर शुक्रवार को श्रमिकों ने प्रबंधन को नोटिस भेजा. उन्होंने कहा कि दस दिनों के […]

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पहले से परेशान प्रबंधन को जूझना होगा नये कानूनी पचड़ों से
रुपनारायणपुर. उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच में मामला जीतने के बाद भी हिंदूस्तान केबल्स लिमिटेड (एचसीएल) प्रबंधन द्वारा 77 श्रमिकों का बकाया भुगतान निर्धारित समय के अंदर न करने पर शुक्रवार को श्रमिकों ने प्रबंधन को नोटिस भेजा. उन्होंने कहा कि दस दिनों के अंदर बकाया का भुगतान न करने पर वे प्रबंधन के खिलाफ अदालत के आदेश का अवमानना का मामला दायर करेंगे.मामला क्या है
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रलय ने एचसीएल के श्रमिकों के अवकाश ग्रहण की उम्रसीमा 60 वर्ष से घटाकर 58 वर्ष करने का निर्देश प्रबंधन को दिया. लेकिन श्रमिक संगठनों के भारी दबाब के कारण प्रबंधन मंत्रलय के इस निर्देश को लागू नहीं कर पाया. केंद्र सरकार नन प्लानिंग असिस्टेंस (एनपीए) के खाते से रुग्ण इस संस्था के श्रमिकों के वेतन का भुगतान करती है. अक्तूबर 2005 से केंद्र सरकार ने 58 वर्ष उम्र पार कर चुके श्रमिकों के वेतन पर रोक लगा दी. लेकिन श्रमिकों की हाजिरी 60 वर्ष तक बनती रही और अवकाश ग्रहण की अधिकारिक पत्र भी श्रमिकों को 60 वर्ष पूरा करने पर मिला. श्रमिकों का पीएफ, ग्रेच्यूटी और अन्य बकाया का हिसाब 58 वर्ष के आधार पर ही भुगतान हुआ.
श्रमिकों ने अदालत में मामला किया: 60 वर्ष बाद अवकाश ग्रहण करनेवाले श्रमिकों ने दो वर्ष का अपना वेतन और दो वर्ष का पीएफ, ग्रेच्यूटी व अन्रू बकाया राशि का भुगतान को लेकर प्रबध्ांन के खिलाफ उच्च न्यायालय में मामला दायर किया. सबसे पहले सतीश महता, कंचन दास गुप्ता, नरेश गुहा, निर्मल मंडल और एक अन्य ने अलग अलग पांच मामले किये. जिसमें से चार मामले खारिज हो गए है.
एक सतीश महतो का मामला विचाराधीन है. उसके उपरांत सुनील चौधरी व अन्य एक सौ और धीरेंद्र नाथ मंडल व अन्य 141 श्रमिकों ने मामला दायर किया. आठ वर्षो तक उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच, डिविसन बेंच और सर्वोच्च न्यायालय में मामला चलने के बाद सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम फैसले के बाद 241 श्रमिकों का दो वर्ष का समस्त बकाया प्रबध्ांन ने भुगतान किया. 241 श्रमिकों की जीत से उत्साहित श्रमिकों ने समूह बनाकर चार और मामले प्रबंधन के खिलाफ दायर किये. जिसमें तपन सरकार व अन्य 120 श्रमिकों का मामला डिविसनल बेंच ने लेबर कोर्ट में ले जाने को कहा है.
दीपक दास व अन्य सौ श्रमिकों का मामला उच्च न्यायालय के सिंगल बेंच में विचाराधीन है. विजय रजक व 44 अन्य और परितोष मित्र व अन्य 33 श्रमिकों के मामले में सिंगल बेंच के न्यायाधीश सुदीप आहलूवालिया ने तीन मई 2016 को श्रमिकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रबंधन को दस सप्ताह के अंदर श्रमिकों का बकाया भुगतान करने का आदेश जारी किया. छह सितंबर 2016 को दस सप्ताह पूरा होने के बाद भी श्रमिकों का बकाया भुगतान न होने पर विजय रजक व अन्य 44 एवं परितोष मित्र व अन्य 33 श्रमिकों ने शुक्रवार को एचसीएल के वेलफेयर अधिकारी शेख फारुख इस्लाम को नोटिस थमाया. जिसमें बकाया भुगतान दस दिन के अंदर न करने पर अदालत के आदेश की अवमानना का मामला दर्ज किये जाने की बात कही गयी है.
प्रबंधन अंतिम तक लड़ता रहा
श्रमिकों के दो वर्ष के बकाया भुगतान को लेकर प्रबंधन सभी जगहों पर लगातार हारने के बाद भी अंत तक लड़ाई लड़ता रहा है. सुनील चौधरी व अन्य सौ और धीरेंद्र नाथ मंडल व अन्य 141 श्रमिकों के मामले में उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक अदालत के फैसले पर पूर्णयाचिका दायर कर मामले को आठ वर्षो तक ले गया. इस बीच अनेक श्रमिकों का निधन भी हो गया. ऐसे में श्रमिकों को अपनी बकाया की वसूली के लिए लंबी लड़ाई लड़नी हो सकती है.
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