2025 तक एक और इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट

Published at :09 Mar 2015 2:59 AM (IST)
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2025 तक एक और इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट

बर्नपुर : सेल चेयरमैन चंद्रशेखर वर्मा ने आइएसपी के आधुनिक प्लांट का दौरा करने के बाद विभिन्न यूनियन प्रतिनिधियों के साथ सीइओ कार्यालय स्थित सम्मेलन कक्ष में बैठक की. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में तीन मिलियन टन क्षमता का नया इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है. इस संबंध में सब […]

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बर्नपुर : सेल चेयरमैन चंद्रशेखर वर्मा ने आइएसपी के आधुनिक प्लांट का दौरा करने के बाद विभिन्न यूनियन प्रतिनिधियों के साथ सीइओ कार्यालय स्थित सम्मेलन कक्ष में बैठक की. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में तीन मिलियन टन क्षमता का नया इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है.
इस संबंध में सब कुछ शुरू किया जाना है. इसके बाद इस प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रतिवर्ष 5.5 मिलियन टन हो जायेगी. बैठक में तकनीकी निदेशक एसएस महंती, परियोजना निदेशक टीएस सुरेश, कार्यपालक निदेशक (आइसी) आइसी साहू, कार्यपालक निदेशक (प्रशासन व कार्मिक) डॉ एन महापात्र, महाप्रबंधक (प्रशासन व कार्मिक) अशोक दास, इंटक नेता हरजीत सिंह, विजय सिंह, सीटू नेता टीके भट्टाचार्य, प्रदीप घोष, बीएमएस नेता रविशंकर सिंह, कमल सिंह, एचएमएस नेता रवि राय, सुशील झा, एटक नेता आरएन सिंह, उत्पल सिन्हा आदि मौजूद थे.
यूनियन प्रतिनिधियों ने मांगों से संबंधित ज्ञापन सेल चेयरमैन श्री वर्मा को अलग-अलग सौंपा. पहली जनवरी 1997 से एरियरभुगतान की मांग के मुद्दे पर चेयरमैन श्री वर्मा ने कहा कि आइएसपी से प्रतिदिन काफी नुकसान हो रहा है. प्लांट के नो प्रोफिट-नो लॉस में आने के बाद जुलाई तक पहली किस्त का भुगतान हो सकता है.
इंटक नेता श्री सिंह ने बताया कि इंटक की प्रमुख मांगों में नियोजन में स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने, 1997 के बकाया एरियर का भुगतान, प्लांट में वेलफेयर (रोड, लाइट, पानी, शौचालय, रेस्ट रूम आदि) पर जोर देने, टाउन की जजर्र स्थिति को सुधारने, सफाई ककी व्यवस्था, अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की बहाली, स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने तथा प्लांट में छंटनी किये गये पुराने ठेका कर्मियों को नये प्लांट में समायोजित करने की मांग शामिल हैं.
इसके पहले सेल अध्यक्ष श्री वर्मा ने मॉडर्न व विस्तारित इंटीग्रेटेड प्लांट के उत्पादनरत विभिन्न यूनिटों की समीक्षा ऑन-स्पॉट की. उन्होंने बार मिल, कन्टीन्यूअस कॉस्टिंग शॉप, यूनिवर्सल सेक्शन मिल तथा ब्लास्ट फर्नेस ‘कल्याणी’ का निरीक्षण किया. उनका पिछला दौरा दिसंबबर, 14 में हुआ था. उसके बाद की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन्होंने प्लांट के अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपलब्ध नयी तकनीक व सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जाये. बार मिल के समक्ष उन्होंने मिल के हॉट मेटल रन को देखा. इस मिल की उत्पादन क्षमता 0.7 मिलियन टन प्रति वर्ष है. इसके उत्पादों में उच्च गुणवत्ता के बार तथा आठ से 40 मिमी व्यास के सिजमिक ग्रेड टीएमटी रीबार शामिल हैं.
उन्होंने प्लांट के अधिकारियों को सामूहिक बधाई देते हुए कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर व कन्सट्रक्शन क्षेत्र में बेहतर गुणवत्ता के बार उपलब्ध कराने में यह मिल निर्णायक होगी. साथ बी इन उत्पादों के बाजार में आइएसपी की भागीदारी भी बढ़ेगी. सनद रहे कि 953 एक ड़ जमीन पर 16 हजार करोड़ रुपये की लागत से प्लांट के मॉडर्नाइजेशन तथा विस्तारीकरण से जुड़ी कई यूनिटों से उत्पादन शुरू हो चुका है.
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