राज्यपाल ने जादवपुर विवि की मानद डॉक्टरेट उपाधि का नामांकन रोका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Dec 2019 1:34 AM (IST)
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कोलकाता : यादवपुर विश्वविद्यालय द्वारा 24 दिसंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह को रद्द करने की घोषणा के बाद राज्यपाल व कुलाधिपति जगदीप धनखड़ ने जेयू के इस वर्ष के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि के नामांकन को रोक लिया है. इस वर्ष शंख घोष और सलमान हैदर को ऑनररी डि.लिट की उपाधि दी जाने […]
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कोलकाता : यादवपुर विश्वविद्यालय द्वारा 24 दिसंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह को रद्द करने की घोषणा के बाद राज्यपाल व कुलाधिपति जगदीप धनखड़ ने जेयू के इस वर्ष के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि के नामांकन को रोक लिया है. इस वर्ष शंख घोष और सलमान हैदर को ऑनररी डि.लिट की उपाधि दी जाने वाली थी
जबकि डॉक्टरेट ऑफ साइंस की उपाधि सी रामचंद्र राव तथा संघमित्रा बंद्योपाध्याय को दिया जाना था. संवाददाता सम्मेलन में राज्यपाल ने बताया कि उन्हें विश्वविद्यालय के वीसी का पत्र उच्च शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव मनीष जैन की मार्फत मिला है जिसमें 24 दिसंबर के होने वाले दीक्षांत समारोह को रद्द करने की सूचना दी गयी है.
इसका कारण बताया गया है कि उस दिन विद्यार्थियों के हंगामे की आशंका, मीडिया रिपोर्ट व एग्जीक्यूटिव काउंसिल के फैसले के बाद यह निर्णय लिया गया है. राज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष ऐसा पांचवीं बार हुआ है जब विश्वविद्यालयों ने इस तरह कार्यक्रम स्थगित किये हैं. गत 19 नवंबर को बर्दवान यूनिवर्सिटी की कोर्ट मीटिंग रद्द हुई. चार दिसंबर को कलकत्ता विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक रद्द हुई.
12 दिसंबर को मौलाना अबुल कलाम आजाद यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी का सालाना दीक्षांत समारोह रद्द हुआ. 17 दिसंबर को प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय की गवर्निंग बॉडी की बैठक रद्द हुई. ऐसे कदम राजनीतिक हैं और वह इससे बेहद दुखी हैं. ऐसे कदम वर्तमान व भविष्य के विद्यार्थियों के साथ अन्याय है.
जादवपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के रद्द होने से यह बहुत गलत संदेश जा रहा है. यदि विद्यार्थियों के हंगामे की आशंका होती है तो क्या मुख्यमंत्री का कोई कार्यक्रम रद्द किया जाता है? इसके अलावा एग्जीक्यूटिव काउंसिल के पास यह अधिकार नहीं है कि वह दीक्षांत समारोह को रद्द कर सके. वह महज विश्वविद्यालय के कोर्ट को इसकी सिफारिश कर सकता है.
कोर्ट की अध्यक्षता बतौर कुलाधिपति वह करते हैं. राज्यपाल ने कहा कि जिन चार लोगों को डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी जानी थी, यह उन लोगों का अपमान है. वह अपने क्षेत्र में अत्यंत विशिष्ट व्यक्ति हैं और वह उनसे क्षमा मांगते हैं. उनका और अपमान न हो इसलिए उनके नामों को वह स्थिति पर पुनर्विचार किये जाने तक रोक रहे हैं.
उन्होंने कहा: मैंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था कि उनकी सरकार में गलत फैसले लेने वालों को वह निकालें. लेकिन लगता है कि अभी वह अपनी कुर्सी की बजाय सड़क पर अधिक हैं इसलिए उनके संवाद का कोई जवाब नहीं आया.
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