केकेएससी ने किया बीएमएस के कोलियरी बंद का विरोध

रानीगंज : कोल इंडिया में शत-प्रतिशत विदेशी निवेश के प्रतिवाद में बीएमएस द्वारा बुलायी गयी पांच दिवसीय हड़ताल का विरोध करते हुए कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस ने कोलियरी में काम करने वाले इच्छुक श्रमिकों के समर्थन में बीएमएस का विरोध किया. यह विरोध प्रदर्शन ईसीएल के कुनुस्टोरिया एरिया अंतर्गत अमृत नगर कोलियरी में सोमवार को […]
रानीगंज : कोल इंडिया में शत-प्रतिशत विदेशी निवेश के प्रतिवाद में बीएमएस द्वारा बुलायी गयी पांच दिवसीय हड़ताल का विरोध करते हुए कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस ने कोलियरी में काम करने वाले इच्छुक श्रमिकों के समर्थन में बीएमएस का विरोध किया. यह विरोध प्रदर्शन ईसीएल के कुनुस्टोरिया एरिया अंतर्गत अमृत नगर कोलियरी में सोमवार को उस वक्त देखी गयी, जब बीएमएस द्वारा बुलायी गयी पांच दिवसीय हड़ताल के तहत कोलियरी गेट के समक्ष विरोध प्रदर्शन करते हुए श्रमिकों को कार्य में नियोग देने के लिए मना किया जा रहा था.
इसकी खबर पाकर केकेएससी के सदस्यों ने इसका विरोध किया. इस विरोध के दौरान दोनों पक्ष में उत्तेजना देखी गयी. हालांकि मौके पर पुलिस, सीआईएसएफ तथा स्थानीय सुरक्षा कर्मियों के पहुंचने पर स्थिति सामान्य हुई. केकेएससी की ओर से बापी चक्रवर्ती तथा सुबीर चटर्जी ने बताया की केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीति के खिलाफ केकेएससी लगातार आंदोलन कर रही है, परंतु तृणमूल कांग्रेस बंद का विरोध लगातार करते आयी है एवं सोमवार को बीएमएस द्वारा कोलियरी के उत्पादन को ठप करने की चेष्टा किये जाने तथा श्रमिकों को कार्य में स्वेच्छा से जाने के दौरान बाधा दिये जाने का विरोध केकेएससी ने किया. उन्होंने कहा कि एफडीआई का विरोध केकेएससी भी कर रही है एवं इस आंदोलन के तहत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सोमवार को नेताजी इनडोर स्टेडियम में जो घोषणा करेगी, उसके अनुसार केकेएससी भूमिका पालन करेगी.
दूसरी ओर बीएमएस की ओर से अमल बनर्जी ने बताया की बीएमएस गणतांत्रिक प्रक्रिया के तहत श्रमिकों के हित के लिए हड़ताल बुलायी है और जो श्रमिक एफडीआई का विरोध कर रहे हैं वे अवश्य हड़ताल में शामिल होंगे. उन्होंने कहा किसी भी श्रमिक को जोर जबरदस्ती हड़ताल का समर्थन करने के लिए नहीं कहा जा रहा है. परंतु 50% प्रतिशत से अधिक श्रमिक हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.
इस संबंध में अमृतनगर कोलियरी के एजेंट ओम प्रकाश यादव ने बताया की जो भी राजनीतिक प्रक्रिया करनी होगी, वह शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए. कोई श्रमिक यदि कार्य करने को इच्छुक है तो उन्हें कार्य करने से बाधा भी नहीं दिया जाना चाहिए.
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