सेल-रेल ने साथ मिल कर विकास का इतिहास रचा

Updated at : 06 Sep 2019 2:08 AM (IST)
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सेल-रेल ने साथ मिल कर विकास का इतिहास रचा

रेल की हर जरूरत के अनुरूप उत्पाद विकसित करता रहा है अपने प्लांटों में दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में बना पहिया साबित हुआ अंतर्राष्ट्रीय मानकों से बेहतर आसनसोल : जब दो बड़े संगठन एक दूसरे का हाथ थामते हैं तो जन्म लेती है एक ऐसी कहानी, जो आने वाली कई पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य और सपनों […]

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रेल की हर जरूरत के अनुरूप उत्पाद विकसित करता रहा है अपने प्लांटों में

दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में बना पहिया साबित हुआ अंतर्राष्ट्रीय मानकों से बेहतर
आसनसोल : जब दो बड़े संगठन एक दूसरे का हाथ थामते हैं तो जन्म लेती है एक ऐसी कहानी, जो आने वाली कई पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य और सपनों को पूरा करती है.रेल और सेल की साझेदारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसने देश के एक छोर से दूसरे छोर के लोगों को एक कर दिया. पिछले छह दशकों से रेल और सेल मिलकर देश के नागरिकों की हर ज़रुरत के सफ़र के दौरान भरोसेमंद साथी साबित हुए हैं. माल ढुलाई के जरिये व्यापारिक गतिविधियों के बड़े साझेदारी के तौर पर भी हर समय मौजूद रहे हैं.
अगर भारतीय रेलवे को देश के परिवहन के बुनियादी ढांचे का दिल कहें तो सेल देश की इस परिवहन की आत्मा है, जो रेलवे को रेल और फोर्ज्ड़ व्हील की सप्लाई करने वाला विश्वसनीय साथी है. सेल और रेल एक दूसरे के पूरक हैं. बुनियादी विकास के इन दोनों साझेदारों ने अपने बेहतर तालमेल के जरिये देश के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सेल का छत्तीसगढ़ के भिलाई में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र देश को एक छोर से दूसरे छोर को जोड़ने वाले, विश्व स्तर के रेल का उत्पादन करता है और इसका दुर्गापुर इस्पात संयंत्र रेलवे के डिब्बों, वैगनों और इंजनों के लिए फोर्ज्ड़ व्हील का उत्पादन करता है.
रेल और सेल मिलते हैं तो देश का कोई न कोई किनारा किसी दूसरे किनारे से गले मिल रहा होता है और देश के हर किसी की ज़िंदगी से जुड़ रहा होता है. सेल ने भारतीय रेलवे की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए, उनके अनुरूप न केवल उत्पादों का लगातार विकास किया है, बल्कि कुछ मामलों में निर्धारित मानकों से भी आगे जाकर उत्पादन और आपूर्ति की है. सेल के रेल की आवश्यक मात्रा, गुणवत्ता और लंबाई को साल-दर-साल लगातार बढ़ (जो कि धीरे-धीरे 13 मीटर से 260 मीटर तक है) रही है. पिछले छह दशकों में भारतीय रेलवे को 720 मिमी से 1100 मिमी व्यास वाले विभिन्न आयामों के 18 लाख से भी अधिक पहियों की आपूर्ति की गई है.
झारखंड के रांची में स्थित एशिया के सबसे बड़े रिसर्च एंड डिवलपमेंट फॉर आयरन एंड स्टील (आरडीसीआईएस) के शोध से पता चलता है कि सेल-भिलाई संयंत्र में रेल का उत्पादन करने की क्षमता है, जो 25 टन एक्सल लोड का भार सुरक्षा के सभी मानकों के साथ सहन कर सकता है और जिस पर कोई भी यात्री रेलगाड़ी 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजर सकती है. मौजूदा समय में, सेल देश में 130 मीटर लंबाई की सबसे लंबी सिंगल पीस रेल का एकमात्र उत्पादक है.
संयुक्त राज्य अमेरिका की विश्वस्तरीय परिवहन अनुसंधान और परीक्षण संगठन तथा एसोसिएशन अमेरिकन रेलरोड्स (एएआर) की पूरी तरह से स्वामित्व वाली सहायक संस्था ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी सेंटर इंक (टीटीसीआई) की रिपोर्ट के अनुसार सेल-दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में निर्मित व्हील अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं और ट्रेन परिचालन को उत्कृष्ट सेवा क्षमता प्रदान करते हैं.
सेल सुरक्षा के मानकों पर किसी भी तरह का समझौता किये बिना भारतीय रेलवे के ट्रैफिक की औसत गति को किफ़ायती लागत में बढ़ाने के प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है. उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे द्वारा उपयोग की जा रही सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र के रेल की गुणवत्ता और यूरोपीयसंघ (यूरोपियन यूनियन) द्वारा रेल यातायात में उपयोग की जा रही रेल की गुणवत्ता बराबर है.
वास्तव में, यूरोपीय संघ द्वारा जिस गुणवत्ता के रेल का उपयोग 150 किमी / घंटा की गति के लिए किया जा रहा है, वह सेल द्वारा उत्पादित यूटीएस-90 रेल के बराबर ही है. सेल के दुर्गापुर इस्पात संयंत्र में उत्पादित व्हील्स ने देश के विभिन्न इलाकों और जलवायु में अपने उत्कृष्टता को साबित किया है और जिनका उपयोग 160 किलोमीटर/घंटा तक की गति के लिए किया जा रहा है.
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