न्यू केंदा ओसीपी बंद होने से इसीएल को भारी नुकसान

Updated at : 17 Jun 2019 12:34 AM (IST)
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न्यू केंदा ओसीपी बंद होने से इसीएल को भारी नुकसान

जामुड़िया : ईसीएल केंदा एरिया अंतर्गत न्यू केंदा ओसीपी में केंदा ग्राम रक्षा कमेटी के बैनर तले ग्रामीणों ने आंदोलन कर ओसीपी के कार्य को पूरी तरह से ठप्प कर दिया है. इसकी वजह से पिछले दो मई से न्यू केन्दा ओसीपी का उत्पादन सहित परिवहन सेवा पूरी तरह से बंद है. ईसीएल सूत्रों के […]

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जामुड़िया : ईसीएल केंदा एरिया अंतर्गत न्यू केंदा ओसीपी में केंदा ग्राम रक्षा कमेटी के बैनर तले ग्रामीणों ने आंदोलन कर ओसीपी के कार्य को पूरी तरह से ठप्प कर दिया है. इसकी वजह से पिछले दो मई से न्यू केन्दा ओसीपी का उत्पादन सहित परिवहन सेवा पूरी तरह से बंद है.
ईसीएल सूत्रों के मुताबिक न्यू केन्दा ओसीपी के बंद रहने से एक ओर पश्चिम बंगाल राज्य सरकार को 11.5 करोड़ सालाना राजस्व का नुकसान होगा तो दूसरी ओर केन्द्र सरकार को 125.84 करोड़ का वार्षिक राजस्व का घाटा होगा. पिछले तीन वर्षों में केन्दा के ग्रामीणों के आंदोलन के कारण न्यू केन्दा ओसीपी में काम बंद रहने से ईसीएल को प्रति वर्ष तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
मालूम हो कि केंदा ग्राम रक्षा कमेटी द्वारा केंदा ग्राम के पुनर्वास सहित अन्य मांगो के लिए आंदोलन कर रही है. ईसीएल के केंदा एरिया ने वर्षों पूर्व केंदा ग्राम को धंसान प्रभावित इलाके की रूप में घोषणा करके केंदा ग्राम को खाली कर लोगो को पुनर्वास करने का निर्देश जारी रखा है. केन्दा ग्राम रक्षा कमेटी के प्रमुख संदीप बनर्जी उर्फ बीजू ने बताया कि ईसीएल ने 1996 में केंदा ग्राम को भू-धसान से प्रभावित इलाका घोषणा करके रख दिया है.
इसकी वजह से अब तक 10 से अधिक इलाके में धसान की घटनाएं घट चुकी है.वही केंदा ओसीपी के खुलने से पूर्व ईसीएल के प्रबंधन ने केंदा ग्राम को पुनर्वास करने का वादा किया था किन्तु इस मामले में ईसीएल प्रबंधन गंभीर दिखाई नहीं दे रहा है. ईसीएल प्रबंधन जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा तब तक केंदा ओसीपी में उत्पादन कार्य को पूरी तरह से बंद रहेगा.
दूसरी ओर ईसीएल केन्दा ऐरिया के न्यू केंदा ओसीपी में लगभग 40 दिनों से काम बंद होने से जहां ईसीएल को प्रति दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. दूसरी ओर ओसीपी में कार्यरत लगभग 120 निजी ड्राईवर, हेल्पर सहित विभिन्न कर्यो से जुड़े मजदूरों के समक्ष भूखमरी की समस्या बन गई है. ईसीएल सूत्रों के मुताबिक न्यू केन्दा ओसीपी से 11 लाख टन कोयला उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है.
वही पिछले दो वर्षों में केवल आठ माह ही ओसीपी मे काम चला है तथा महज एक लाख तीन हजार टन कोयला का ही उत्पादन हुआ. पिछले 40 दिनो से काम बंद रहनें से सभी वाहन एव मशीनें भी बेकार खड़ी है. ईसीएल सूत्रों के अनुसार केन्दा ग्राम सहित कोंदाकोली, सालडांगा, बनधौडा, झाटीबांध, सालडांगा बाउरी पाड़ा, कोडा पाड़ा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को पुनर्वासित करने के लिए जामसोल में 4.83 एकड़ जमीन ईसीएल ने एडीडीए को सौंपा है. वहीं अड्डा की जिम्मेदारी है की ग्रामीणों को पुनर्वासित करने का काम करें.
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