1950 के बाद आये बिहारियों को खदेड़ने की साजिश

Updated at : 09 Apr 2019 2:13 AM (IST)
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1950 के बाद आये बिहारियों को खदेड़ने की साजिश

राज्य के विकास में खून-पसीने का योगदान दिया है हिंदीभाषियों ने भाजपा की इस साजिश का मुंहतोड़ जबाब देंगे चुनाव में हिंदीभाषी आस्था के महापर्व छठ प्रसाद ठेकुआ के अपमान का लगाया आरोप कुल्टी के कार्यक्रम में उठा रामनवमी में सरकारी अनुदान का मामला कुल्टी : मेयर सह पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा […]

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राज्य के विकास में खून-पसीने का योगदान दिया है हिंदीभाषियों ने

भाजपा की इस साजिश का मुंहतोड़ जबाब देंगे चुनाव में हिंदीभाषी
आस्था के महापर्व छठ प्रसाद ठेकुआ के अपमान का लगाया आरोप
कुल्टी के कार्यक्रम में उठा रामनवमी में सरकारी अनुदान का मामला
कुल्टी : मेयर सह पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी ने कहा कि संसदीय चुनाव के लिए जारी अपने घोषणा पत्र में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) कानून लागू करने की घोषणा की है. यदि यह कानून लागू होता है तो राज्य में वर्ष 1950 के बाद आये बिहारियों तथा उत्तर प्रदेश के लोगों को यहां से जाना होगा.
यह बिहारियों खासकर हिंदीभाषियों को राज्य से खदेड़ने की साजिश है. जिसका विरोध मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया है. कुल्टी में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान शिवचर्चा को संबोधित करने हुए उन्होंने कहा कि हिंदीभाषियों को खदेड़ने की साजिश रचनेवाली पार्टी तथा उनके नुमाइंदे को यहां की जनता बाहर का रास्ता दिखायेगी.
जरूरत पड़ी तो इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई भी लड़ी जायेगी. उन्होंने कहा कि कोलकाता में आयोजित भाजपा की जनसभा में भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद पार्टी बंगाल में रह रहे लोगों को लेकर नागरिक पंजी बनायेंगी और 1950 के बाद से यहां रह रहे बिहार, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्य के नागरिकों को बाहर निकाल देंगे.
हिंदीभाषियों खासकर बिहारियों ने अपने खून से बंगाल के कारखाने और उद्योगों को सींचा है. कण कण में उनकी मेहनत और पसीना सना है. अधिकांश के पास जमीन का मालिकाना नहीं है. मेहनत मजदूरी से लेकर व्यवसाय तक सक्रिय हैं. उन्हीं बिहारी भाईयों को भाजपा प्रत्याशी बाबुल सुप्रिय बंगाल से निकाल बाहर करने के लिए नागरिक पंजी लाने वाले हैं. जिसे कोई भी बिहारी बर्दाश्त नहीं कर सकता है.
श्री तिवारी ने कहा कि पार्टी ने उन्हें मेयर बना कर तमाम हिंदीभाषियों को सम्मानित किया है. यहां की जनता ने जो प्यार उन्हें दिया है, उसे बाबुल सुप्रिय नहीं छिन सकते हैँ. उनके रहते कुल्टी, आसनसोल, चिनाकुड़ी, शीतलपुर, बराकर, धेमोमेन से एक भी बिहारी को बंगाल से बाहर नहीं जायेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आस्था के महापर्व छट पर दो दिनों की सरकारी छुट्टी की घोषणा की है. समाज का हर व्यक्ति जिसे सम्मान देता है, भागीदारी करता है, उसके प्रसाद के बारे में बाबुल कहते हैं कि ठेकुआ के गंध खराब होता है तथा खाने से पेट खराब होता है.
यह बिहारियों के पर्व का अपमान है. उन्होंने कहा कि हर रामनवमी में अखाड़ा आयोजकों को सरकारी आर्थिक सहायता दी जाती है. लेकिन इस बार चुनाव आयोग से शिकायत कर उसे रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि रोक के बावजूद रामनवमी के बाद अखाड़ा कमेटियों को अनुदान की राशि दी जायेगी और यह सिलसिला हर वर्ष चलता रहेगा.
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