पानागढ़ : बुझ गया घर का इकलौता चिराग, सदमे में पिता, फूट-फूट कर रो रही मां, सदमें गांव
Updated at : 11 Dec 2018 12:17 AM (IST)
विज्ञापन

पानागढ़ : राजनीतिक लड़ाई में एकमात्र पुत्र को खोने के बाद पिता विजय घोष पूरी तरह से टूट गये हैं. मां का रो-रोकर बुरा हाल है. वह रह-रह कर बेहोश हो जा रही है. दो बहनें दहाड़ मारकर रो रही हैं. पुत्र की हत्या की खबर सुनने के बाद सदमे में पिता विजय के मुख […]
विज्ञापन
पानागढ़ : राजनीतिक लड़ाई में एकमात्र पुत्र को खोने के बाद पिता विजय घोष पूरी तरह से टूट गये हैं. मां का रो-रोकर बुरा हाल है. वह रह-रह कर बेहोश हो जा रही है. दो बहनें दहाड़ मारकर रो रही हैं. पुत्र की हत्या की खबर सुनने के बाद सदमे में पिता विजय के मुख से बार-बार यही वाक्य निकल रहे हैं कि राजनीतिक लड़ाई इस कदर हावी हो जायेगी, उन्हें इसका अंदाजा नहीं था.
उन्हें नहीं पता था कि जिस सत्ता पक्ष के वे नेता है, उसी के लोग विरोधी दल की राजनीति करने पर उनके एकमात्र जवान पुत्र को राजनीतिक जंग के कारण चिर निद्रा में सुला देंगे.
12 वर्षों तक तृणमूल के अंचल अध्यक्ष रहे विजय घोष के भाजपा करने वाले एकमात्र पुत्र संदीप घोष की तृणमूल के गुंडों ने गोली मारकर हत्या कर दी. घटना के बाद समूचा परिवार टूट गया है. तीन दिनों से बुखार से पीड़ित पिता विजय घोष ड्यूटी भी नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में एकमात्र पुत्र के खोने का गम उन्हें भीतर तक लील गया है.
विजय घोष का पूरा परिवार शोक संतप्त है. मां रह-रह कर अचेत हो जा रही है. एक पुत्री पहले से ही विधवा होकर घर पर पड़ी है. काफी मन्नतों के बाद दो बेटियों के बाद एक बेटा का जन्म हुआ था.
- परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, गांव में पसरा मातम
- राजनीतिक लड़ाई में पुत्र की हत्या से आहत पिता करेंगे मुख्यमंत्री से मुलाकात
- खूनी राजनीति बंद करने का करेंगे आवेदन, न बुझे किसी के घर का चिराग
22 वर्षीय संदीप की हत्या ने परिवार को भीतर तक तोड़ कर रख दिया है. पिता विजय घोष ने कहा कि जिला तृणमूल पार्टी अध्यक्ष को उन्होंने फोन पर बताया कि यह क्या हो रहा है. उनके पुत्र की हत्या कर दी गई. राजनीति किस करवट बैठ रही है. कैसा आक्रोश व्याप्त होता जा रहा है. घटना को लेकर पिता ने बताया कि राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से वे इस बाबत बात करेंगे.
उनके पुत्र का क्या दोष था? आपसी राजनीतिक द्वंद के कारण किस तरह से राज्य में टकराव हावी होती जा रही है. सोच का अभाव साफ तौर पर राजनीति में देखा जा रहा है. राजनीति खूनी बनती जा रही है. मुख्यमंत्री से आवेदन करेंगे कि इस तरह का खूनखराबा राज्य में बंद हो और किसी के घर के चिराग को इस कदर न बुझाया जाये.
विजय घोष के हृदय विदारक कथन को सुनकर गांव के लोगों के भी आंखों से आंसू छलक पड़े. बदहवास समूचे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. परिवार के लोग अब भी विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि संदीप उर्फ बापी इस दुनिया में नहीं है. घर पर कह कर गया था कि पिकनिक करने जा रहा है. क्या पता था कि वह राजनीति में इस कदर व्यस्त हो जायेगा.
अभी-अभी तो उसने राजनीति शुरू की थी और उसे इस कदर कुचल दिया गया कि वह अब कभी उठ नहीं पायेगा. पिता विजय घोष रह-रह कर पुत्र संदीप को याद कर रहे हैं. उसकी बातों को याद कर रहे हैं. लोग उन्हें आश्वस्त कर रहे हैं. लेकिन उन्हें कुछ भी नहीं पता. देर रात से ही परिवार का बुरा हाल है आस पड़ोस के लोग भी घर के पास चुपचाप बैठ गए हैं.
महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल है. गांव के लोग संदीप के घर के समक्ष ही मौजूद है. समूचे गांव में मातम पसरा हुआ है. विजय घोष ने बताया की उनके संसार मे दो बेटियां और एकमात्र पुत्र संदीप था. संदीप माइकल मधुसूदन कॉलेज में तीसरे वर्ष का छात्र था और पार्ट टाइम एक निजी आईटीआई कालेज में भी पढ़ता था. उसको फोटोग्राफी का शौक था.
कल उसे उसकी मां ने क्यों जाने दिया. बुखार के कारण मैं घर में था. बापी ने अपनी मां मालंदीघी में एक पिकनिक मे जाने की बात कर गया था. उसने रात मे देर से वापस लौटने की बात भी कही थी. मैंने सोचा कि शादी के मौसम में तस्वीरें खींचने जा रहा है. लेकिन वह फिर नहीं लौटा. मैं वर्षों से तृणमूल कर रहा हूं. मेरे लड़के को बीजेपी करने के कारण तृणमूल ने मार दिया. उन्होंने चित्कार करते हुये कहा कि दीदी यह क्या हो रहा है. खून की राजनीति क्यों हो रही है?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




