कल्ला सेंट्रल अस्पताल में भारी हंगामा, मरीज की मौत के बाद परिजनों ने काटा बवाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Aug 2018 2:29 AM
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आसनसोल : इसीएल के कल्ला सेंट्रल अस्पताल में इलाजरत मरीज नियति मोची (41) की मौत इलाज के दौरान हो गयी. परिजनों ने मौत के लिए चिकित्सकों की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा मचाया. परिजनों ने कैजुअल्टी रूम में शव के साथ प्रदर्शन किया और दोषी चिकित्सकों को घटनास्थल पर बुलाने […]
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आसनसोल : इसीएल के कल्ला सेंट्रल अस्पताल में इलाजरत मरीज नियति मोची (41) की मौत इलाज के दौरान हो गयी. परिजनों ने मौत के लिए चिकित्सकों की लापरवाही को जिम्मेवार ठहराते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा मचाया. परिजनों ने कैजुअल्टी रूम में शव के साथ प्रदर्शन किया और दोषी चिकित्सकों को घटनास्थल पर बुलाने की मांग की.
उग्र प्रदर्शन को देखते हुए कैजुअल्टी विभाग में मौजूद चिकित्सक और स्टॉफ को वहां से हट गये. अस्पताल प्रबंधन ने सूचना देकर आसनसोल नॉर्थ थाना पुलिस को बुलाया. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी अस्पताल पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया.अस्पताल के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सोमनाथ मंडल तथा पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप तथा उचित कार्रवाई के आश्वासन पर परिजन शांत हुए तथा शव लेकर काजोड़ा ग्राम लौटे.
मृतका के बेटे नारद मोची ने कहा कि उसकी मां के साथ बहुत बुरा हुआ. ऐसा किसी दूसरे के साथ न हो. उन्होंने कहा कि चार दिनों पहले अस्पताल में भरती कराने पर चिकित्सकों ने किडनी में सामान्य खराबी, मधुमेह और रक्त में संक्रमण की बात कह इलाज आरंभ किया था. डॉ अनुपम आनंद की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था.
सोमवार को जब मां की तबियत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्होंने चिकित्सकों से मां को दूसरे अस्पताल में रेफर करने का आग्रह किया. परंतु चिकित्सकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और ठीक होने का आश्वासन देकर चले गये. अगर सोमवार को ही किसी अच्छे अस्पताल में रेफर कर दिया गया होता तो उसकी मां की मौत नहीं होती.
इसीएल की कुमारडीह कोलियरी में कार्यरत तथा मृतका के पति मदन मोची ने बताया कि कुछ दिनों से पत्नी की तबियत खराब थी. निजी अस्पताल में भी उसका इलाज चल रहा था. नियति के बेहतर इलाज के लिए उसके परिजनों ने शनिवार को इसीएल के सेंट्रल अस्पताल कल्ला में भरती कराया था.
डेप्यूटी सीएमओ डॉ मंडल ने कहा कि चिकित्सकों ने अपने स्तर से मरीज का बेहतर इलाज किया था. मरीज के परिजनों की मांग के आधार पर किसी मरीज को रेफर नहीं किया जाता है. मरीज की स्थिति उस समय नियंत्रण में थी. उन्होंने कहा कि अस्पताल स्तर से मरीज की हर संभव चिकित्सा
की गई है.
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