इसीएल मुख्यालय पर सीएमएसआई कर्मियों ने किया जोरदार प्रदर्शन

Updated at : 24 Aug 2018 12:23 AM (IST)
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इसीएल मुख्यालय पर सीएमएसआई कर्मियों ने किया जोरदार प्रदर्शन

सांकतोड़िया : सीटू से संबद्ध सीएमएसआई के कर्मियों ने गुरुवार को 10 सूत्री मांगों के समर्थन में ईसीएल मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. बाद में शिष्टमंडल ने कार्मिक निदेशक विनय रंजन को 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. पूर्व सांसद बासुदेव आचार्य, पूर्व सांसद वंशगोपाल चौधरी, अखिल भारतीय कोयला श्रमिक फेडरेशन के सहायक महासचिव जीके […]

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सांकतोड़िया : सीटू से संबद्ध सीएमएसआई के कर्मियों ने गुरुवार को 10 सूत्री मांगों के समर्थन में ईसीएल मुख्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. बाद में शिष्टमंडल ने कार्मिक निदेशक विनय रंजन को 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. पूर्व सांसद बासुदेव आचार्य, पूर्व सांसद वंशगोपाल चौधरी, अखिल भारतीय कोयला श्रमिक फेडरेशन के सहायक महासचिव जीके श्रीवास्तव, यूनियन के महासचिव विवेक चौधरी, माकपा के जिला सचिव गौरांग चटर्जी, गोलक चटर्जी, बंदन बनर्जी, कन्हैया उपाध्याय, लालटू थंडर आदि उपस्थित थे. वक्ताओं ने केंद्र सरकार और सीआइएल प्रबंधन पर जान बूझकर कोयला खदानों में ऐसी परिस्थिति उत्पन्न करने का आरोप लगाया जिससे कि कोयला खदानें बंद हो जाये.
पूर्व सांसद श्री आचार्य ने सरकार पर कोयला खदानों का निजीकरण करने और वाणिज्यिक खनन के लिए संसद में बिल पेश करने के बजाय आर्डिनेंस जारी कर इसे अंजाम देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि एनडीए की पूर्ववर्ती सरकार ने वर्ष 2000 में इसके लिए बिल पेश किया था. सभी ट्रेड यूनियनों ने मिलकर विरोध किया. तब यह रुक गया. उन्होंने कहा कि कोयला उद्योग तो शुरुआत है. सीएमपीएफ के विलय का केंद्रीय सहित अन्य श्रमिक संगठनों के विरोध पर मामला टल गया.
लड़ाई केवल कोयला खदान को लेकर नहीं है बल्कि सरकारी नीतियों के परिवर्तन के लिए भी है. प्रतिवर्ष 1 करोड़ 20 लाख की दर से बेरोजगारी बढ़ रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं. केंद्र सरकार के सारे वायदे फेल हो गये. देश में अपनी सम्पद है वाणिज्यिक खनन और विदेशी आयात नहीं होने देंगे. उन्होंने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को 18000 रुपये वेतन और 3000 रुपये पेंशन देने की मांग की.
सीटू के महामंत्री पूर्व सांसद श्री चौधरी ने कहा कि भाजपा सरकार ने कोयला बेचने का अधिकार निजी मालिकों को दिया है. इससे कोयले और देश का काफी नुकसान हो रहा है. कुछ लोगों द्वारा अवैध खनन कर कोयले की लूट मचायी गई है. राज्य सरकार और पुलिस का उन्हें सहयोग मिल रहा है.
श्री श्रीवास्तव ने कहा कि प्रबंधन ने सभी छोटी खदानों को बंद करने की योजना बनायी है. वर्ष 2022 तक वाणिज्यिक खनन से 20 फीसदी कोयला उत्पादन शुरू हो जायेगा. इसीएल की 16 खदानों को बंद करने की नोटिस दी गयी है. 8000 से अधिक लोग प्रभावित हैं. इनमे अभी 700 मिलियन टन कोयला का भंडार है.
इन खदानों में उचित परिमाण में पंप आदि की व्यवस्था नहीं कर ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी जा रही है कि खदानें बंद हो जायें. श्रमिकों को दूसरी जगह तबादले के लिए विकल्प देने या वीआरएस लेने को कहा जा रहा है. ज्ञापन सौंपने गए संगठन के प्रतिनिधियों को प्रबंधन ने सकारात्मक पहल के आश्वासन दिया.
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