इंटक के दो गुटों के विलय की प्रक्रिया हो सकती है बाधित, संजीवा रेड्डी पर खूब बरसे ददई
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Jul 2018 4:10 AM (IST)
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आसनसोल : दिल्ली हाई कोर्ट में असली इंटक के निर्धारण के लिए दर्ज याचिका पर आगामी एक अगस्त को सुनवाई होनी है. इधर इंटक के मुख्य दो गुटों के विलय की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है. इधर एक गुट का नेतृत्व कर रहे चन्द्रशेखर दूबे उर्फ ददई दूबे ने विलय प्रक्रिया में हो रहे […]
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आसनसोल : दिल्ली हाई कोर्ट में असली इंटक के निर्धारण के लिए दर्ज याचिका पर आगामी एक अगस्त को सुनवाई होनी है. इधर इंटक के मुख्य दो गुटों के विलय की प्रक्रिया काफी धीमी हो गई है. इधर एक गुट का नेतृत्व कर रहे चन्द्रशेखर दूबे उर्फ ददई दूबे ने विलय प्रक्रिया में हो रहे विलंब के लिए अध्यक्ष जी संजीवा रेड्डी को मुख्य दोषी ठहराया है. उनका आरोप है कि श्री रेड्डी इंटक को मजबूत करने के बजाय एचएमएस के साथ विलय में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं. इधर इंटक के कर्मियों में विलय प्रक्रिया धीमी होने से हताशा फैलने लगी है.
श्री दूबे ने कहा कि इंटक रेड्डी तथा राजेंद्र गुट के साथ तालमेल और सुलह-समझौते में उनकी ओर से कोई कमी नहीं है. मजदूर तथा संगठन हित में उन्होंने 18 साल के इस आपसी वैर व कटुता को भूला कर एक होने का निर्णय लिया. इंटक नेता राजेन्द्र प्रसाद सिंह की बात मानकर वे हैदराबाद गये. इसके बाद 12 से 14 जुलाई तक दिल्ली में भी रहे. पर रेड्डी की ओर से कोई हल नहीं आया. इसके बाद वे वापस झारखंड चले आये. इंटक में उनकी लड़ाई सिर्फ संजीवा रेड्डी से है. राजेन्द्र प्रसाद सिंह के प्रति उनका कोई अविश्वास नहीं है.
इंटक संविधान के खिलाफ रेड्डी
श्री दूबे ने कहा कि आजतक इंटक में पांच साल से ज्यादा कोई अध्यक्ष नहीं रहा तो 25 साल से आखिर किस संविधान के तहत रेड्डी अपने-आपको अध्यक्ष कह रहे हैं. श्री रेड्डी ऐसे भी 93 साल के हो गये हैं, जबकि उनकी उम्र अभी 73 साल है. तो इंटक का अध्यक्ष बनने लायक कौन है? ऐसे भी कोर्ट ने उन्हें मान्यता दी है. उन्होंने कहा कि इंटक के संविधान में कार्यकारी अध्यक्ष का पद ही नहीं है तो किसने यह हवा फैलायी कि उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि जब रेड्डी बुलायेंगे, तभी वे दिल्ली जायेंगे. सुलह-समझौता का सारा मामला उन्होंने राजेन्द्र सिंह पर छोड़ दिया है. अभी भी श्री सिंह इसे लेकर काफी गंभीर हैं तथा प्रयास में है, लेकिन उन्हें श्री रेड्डी पर संदेह है. उन्होंने तो एचएमएस में इंटक के विलय का मन बना लिया है. उनके पास इसके दस्तावेज भी उपलब्ध हैं. इसके एकरारनामा पर श्री रेड्डी के साथ ही एचएमएस अध्यक्ष के हस्ताक्षर हैं. ऐसे में इंटक छोड़ कर वे एचएमएस में कदापि नहीं जायेगें.उन्होंने कहा कि उन्हें तो उसी समय से श्री रेडडी से विवाद हो गया था जब उन्होंने खुलेआम सोनिया गांधी और कांग्रेस के खिलाफ बयान दिया था.
श्रमिक हित में एकजुटता जरूरी
श्री दूबे ने कहा कि कोर्ट के आदेश से दोनों गुट कोल इंडिया की किसी कमेटी में बैठ नहीं पा रहे. ऐसे में श्रमिक सवालों को लेकर प्रबंधन को घेर नहीं पा रहे. इसलिए एकजुटता जरूरी है. जब तक कोल इंडिया में इंटक पहले की भांति प्रवेश नहीं करेगा, तब तक प्रबंधन और सरकार की मजदूर व उद्योग विरोधी नीतियों पर अंकुश नहीं लगेगा. केंद्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार देश के तमाम पब्लिक सेक्टर के निजीकरण पर तुली हुई है. मजदूरों पर हमले हो रहे हैं. कोल कर्मियों का दसवां वेज बोर्ड मजदूर विरोधी है. एक अगस्त को इंटक विवाद मामले पर सुनवाई है. कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में भी आ सकता है.
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