भोजपुरी को दूसरी राजभाषा बनाने के लिए झारखंड सरकार को दी बधाई

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jul 2018 12:27 AM

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दुर्गापुर : जपुरी को झारखंड की दूसरी राजभाषा बनाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को मंत्रिमंडल की मुहर लग जाने पर भोजपुरी मंच दुर्गापुर ने झारखंड सरकार को बधाई देते हुये मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित उनके सभी मंत्रमंडलीय सदस्यों को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया. झारखंड सरकार की मंगलवार को हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में भोजपुरी के अलावा मगही, […]

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दुर्गापुर : जपुरी को झारखंड की दूसरी राजभाषा बनाने के प्रस्ताव पर मंगलवार को मंत्रिमंडल की मुहर लग जाने पर भोजपुरी मंच दुर्गापुर ने झारखंड सरकार को बधाई देते हुये मुख्यमंत्री रघुवर दास सहित उनके सभी मंत्रमंडलीय सदस्यों को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया. झारखंड सरकार की मंगलवार को हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में भोजपुरी के अलावा मगही, अंगिका और मैथिली को भी सरकार की द्वितीय राजभाषा में शामिल करने पर मुहर लगी. चारों भाषाई लोगों के लिये यह सुखद खबर है. सनद रहे कि इन चारों भाषाओं को बोलने वाले बिहार और झारखंड के मूल निवासी हैं.
भोजपुरी को झारखंड सरकार की द्वितीय राजभाषा बनाने पर खुशी जाहिर करते हुये भोजपुरी मंच दुर्गापुर के अध्यक्ष डॉ सत्यदेव ओझा ने कहा, ‘यह हमारे लिये ससम्मान की बात है, और इसके लिये हम झारखंड सरकार के आभारी हैं. मंच के महासचिव सह वरीय पत्रकार विपिन कुमार ने बताया कि आज फैक्स के माध्यम से संदेश भेजकर झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास एवं उनके मंत्रिमंडलीय सदस्यों को बधाई दी गई है. कुमार ने कहा , अब केन्द्र सरकार को भी संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी को शामिल कर लेना चाहिये क्योंकि लंबे समय से इसकी मांग होती आ रही है.
कई बार लोकसभा और राज्यसभा में भी आवाज उठी है. स्वयं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी बात उठाई थी. उन्होंने आश्वस्त किया है कि जल्द ही सहमति-स्वीकृति मिलेगी. उल्लेखनीय है कि बिहार की ही एक भाषा मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर लिया गया है जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी इससे वंचित है. आज विश्वभर में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या करोड़ों में है.
मॉरिशस में भोजपुरी को राजभाषा के रूप में प्रयोग किया जाता है. और भी दो तीन देशों में भोजपुरी को मान्यता प्राप्त है, लेकिन अपने ही देश में भोजपुरी संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल नहीं है. यदि भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल कर लिया जाता तो इस भाषा से भी देश को आईएएस और आईपीएस मिलते क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में भोजपुरी पढ़ाई जाती है.
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