जीएसटी से आसान होगा व्यवसाय करना
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नियामतपुर मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आयोजित की कार्यशाला रानीगंज के एफसीए अजय बागड़िया ने दी जानकारी सैकड़ों व्यवसायियों को सीतारामपुर : नियामतपुर मर्चेंट चेंबर ऑफकॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने गुरूवार को नियामतपुर अग्रसेन भवन में जीएसटी पर कार्यशाला आयोजित की. इसमें क्षेत्र से बड़ी संख्या में व्यवसायियों ने भागीदारी की. रानीगंज के एफसीए […]
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नियामतपुर मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आयोजित की कार्यशाला
रानीगंज के एफसीए अजय बागड़िया ने दी जानकारी सैकड़ों व्यवसायियों को
सीतारामपुर : नियामतपुर मर्चेंट चेंबर ऑफकॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने गुरूवार को नियामतपुर अग्रसेन भवन में जीएसटी पर कार्यशाला आयोजित की. इसमें क्षेत्र से बड़ी संख्या में व्यवसायियों ने भागीदारी की. रानीगंज के एफसीए अजय बागड़िया और उनके सहायक रितेश खेतान ने व्यवसायियो को विस्तार से जीएसटी के बारे में जानकारी दी. श्री बागड़िया ने कहा कि समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न तरह की कर योजनाएं लागू की जाती हैं. जिस तरह वैट लागू होने के बाद इसे समझने में काफी समय लगा था, उसी तरह जीएसटी को लेकर समस्या उत्पन्न हो रही है. नयी तरह से लागू होंने के कारण भ्रम की स्थिति है.
उन्होंने कहा कि यह बिलकुल आसान है. पहले सेन्ट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, वैट, सीएसटी, इन्ट्री टैक्स, इंटरटेनमेंट टैक्स, लग्जरी टैक्स जैसे विभिन्न प्रकार के टैक्स लिए जाते थे. लेकिन एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद सभी टैक्स समाप्त हो गये हैं. सिर्फ एक ही टैक्स लिया जायेगा. उन्होंने बताया कि पहले किसी उत्पाद पर 12.50 फीसदी एक्साइज ड्यूटी, 15.50 फीसदी इन्ट्री टैक्स के साथ ही कई टैक्स जोड़े जाते थे और उसपर भी टैक्स पर टैक्स लिया जाता था. जबकि जीएसटी लागू होने के बाद यह सभी टैक्स खत्म होकर एक ही टैक्स लगेगा. उन्होंने बताया कि उत्पादन, क्र य और विक्र य आदि प्रक्रि या अब नहीं रही है, इसके स्थान पर सिर्फ सर्विस के आधार पर टैक्स लिया जायेगा. उन्होंने कहा कि जीएसटी बिलकुल सही है और इससे घबराने के बजाय इसे समझने की कोशिश करे. व्यवसाय करने में सहूलियत होगी.
उन्होंने कहा कि सीजीएसटी के तहत उत्पादों का मूल्य देश में एक समान कर दिया गया है, इसमे राज्यों का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा. उन्होंने कहा कि 20 लाख रूपए सालाना व्यवसाय करने वाले व्यवसायियों को जीएसटी में पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं है, वहीं 20 से 75 लाख के अन्दर सलाना व्यवसाय करने वाले यदि चाहे तो पंजीयन करा सकते है और यदि नहीं भी कराते है तो कंपोजिट डीलर के तहत वे व्यवसाय कर सकते हैं.
लेकिन उनके साथ एक समस्या यह होगी की वह अपने उत्पाद को दुसरे राज्यों में बिक्र ी नहीं कर पाएंगे. उन्हीं से माल खरीद सकते है जिनका जीएसटी में पंजीयन किया हुआ है. अध्यक्ष महेंद्र संघाई, कार्यकारी अध्यक्ष उपेन्द्र सोनी, सचिव सचिन बालोदिया, अशोक डोकानिया, संजय अग्रवाल, राजेश गोयल आदि उपस्थित थे.
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