यौन उत्पीड़न आरोप: कांग्रेस व भाजपा ने की सुप्रीम कोर्ट से कार्रवाई की मांग

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कोलकाता: राज्य सरकार ने यौन उत्पीड़न आरोप के घेरे में आये राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अशोक कुमार गांगुली (एके गांगुली) को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. न्यायमूर्ति गांगुली को पद से हटाने के लिए ममता ने राष्ट्रपति को दूसरा पत्र लिखा है. न्यायमूर्ति गांगुली पर हमला तेज करते […]

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कोलकाता: राज्य सरकार ने यौन उत्पीड़न आरोप के घेरे में आये राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस अशोक कुमार गांगुली (एके गांगुली) को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. न्यायमूर्ति गांगुली को पद से हटाने के लिए ममता ने राष्ट्रपति को दूसरा पत्र लिखा है. न्यायमूर्ति गांगुली पर हमला तेज करते हुए ममता ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि उन्होंने गुरुवार को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया था कि कथित कदाचार के मामले में न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ तत्काल उचित कार्रवाई की जाये. मुख्यमंत्री ने कहा : आज मीडिया में खबरें हैं कि उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की समिति ने उन्हें दोषारोपित किया है और प्रथमदृष्टया उनके खिलाफ लगे आरोपों में दोषी पाया है. सुश्री बनर्जी ने कहा : इस आधार पर मैंने राष्ट्रपति महोदय को आज एक और पत्र भेजा और उनसे तत्काल जरूरी कार्रवाई का अनुरोध किया, ताकि गांगुली को जल्दी से जल्दी उनके पद से हटाया जाये.

अब गेंद राष्ट्रपति के पाले में : चंद्रिमा
उधर, कानून मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर ‘उचित कार्रवाई’ करने की मांग करके राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) के अध्यक्ष पद से न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है. अब मामला राष्ट्रपति के पाले में है. मंत्री ने कहा कि मानवाधिकार ऐसा विषय है, जो गृह विभाग के तहत आता है. इस विभाग के प्रभार में मुख्यमंत्री खुद हैं.

सूत्रों ने बताया कि आयोग के अध्यक्षदो दिन से दफ्तर नहीं आ रहे गांगुली

न्यायमूर्ति गांगुली गुरुवार से ही दफ्तर नहीं आ रहे हैं. जब न्यायमूर्ति गांगुली से पूछा गया था कि क्या वह इस्तीफा देंगे, इस पर उन्होंने कहा था कि उन्होंने फैसला नहीं किया है. राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पद से हटाने की प्रक्रिया के बाबत कानून मंत्री ने कहा कि मानवाधिकार कानून में उसके अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया के बारे में प्रावधान है. आयोग की वेबसाइट के अनुसार, मानवाधिकार कानून 1993 कहता है कि आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को र्दुव्‍यवहार या अक्षमता के आधार पर उनके पद से राष्ट्रपति के आदेश के जरिये ही हटाया जा सकता है, लेकिन इससे पहले इस मसले को विचार के लिए राष्ट्रपति के माध्यम से उच्चतम न्यायालय को भेजना होगा.

कानून के अनुसार, राष्ट्रपति अपने आदेश के जरिए अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को तभी हटा सकता है, जब अध्यक्ष या ऐसा कोई सदस्य किसी ऐसे अपराध का दोषी ठहराया गया हो और उसे सजा हुई हो, जो राष्ट्रपति की राय में नैतिक भ्रष्टता है.

मुझे परेशान न करें, बहुत सहा : जस्टिस गांगुली
उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एके गांगुली के खिलाफ यौन शोषण के आरोप पहली नजर में सही पाये जाने संबंधी शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की समिति के निष्कर्ष पर पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद ने कोई भी टिप्पणी करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया. समिति की रिपोर्ट के बाद आयोग से न्यायमूर्ति गांगुली के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने लगी है. गुस्से में दिख रहे गांगुली ने कहा : मुझे परेशान नहीं करें, मुझे परेशान नहीं करें. मैंने बहुत सहा है. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिख कर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश के ‘गंभीर कदाचार’ के खिलाफ तत्काल ‘उचित कार्रवाई’ करने का आग्रह किया था. उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की एक समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ शिकायत करनेवाली कानून की इंटर्न के बयान ने प्रथम दृष्टया अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की ओर से ‘अशोभनीय आचरण’ और ‘यौन प्रकृति के व्यवहार’ का पता चलता है.

पुलिस ने इंटर्न से केस दर्ज कराने को कहा
दिल्ली पुलिस ने उत्पीड़न का आरोप लगानेवाली कानून की इंटर्न को ई-मेल भेज कर कहा है, ‘आगे आयें, शिकायत दर्ज करायें.’ डीसीपी एसबीएस त्यागी ने कहा कि पुलिस को उसके जवाब का इंतजार है.

डीयू प्रोफेसर ने की शिकायत
दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पूर्व प्रो एसएन शर्मा ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तिलक मार्ग थाना को लिखित शिकायत दी थी. शर्मा ने कहा : इस संदेश को (पीड़िता) और अन्य के यौन उत्पीड़न के लिए कोई प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मानें, जो अपराध है.

कांग्रेस व भाजपा ने कहा : पहले पद छोड़ें गांगुली
कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा है कि नैतिकता का तकाजा है कि उच्च पदों पर आसीन लोग ऐसे मामले में चाहे दोषी हों या नहीं, अपने पद से हट जाना चाहिए. आवांछित आचरण के आरोप का इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप सेवा में हैं या रिटायर हो गये. विधि मंत्री कपिल सिब्बल ने जस्टिस एके गांगुली के खिलाफ महज सेवानिवृत्त होने के आधार पर आगे कार्रवाई नहीं करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया. कहा कि इस मुद्दे को ‘दबाया नहीं जा सकता’. कहा, ‘मुझे थोड़ी निराशा हुई है, क्योंकि संस्थान ने पाया है कि यौन संबंध बनाने के उकसावे की बात को सही पाया गया है और उसे मामले को आगे बढ़ाना चाहिए था.’

‘पलायनवादी रवैया’ नहीं अपनाये शीर्ष कोर्ट : जेटली
भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा है कि जस्टिस गांगुली के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ‘पलायनवादी रास्ता’ अख्तियार नहीं कर सकता है. उसे इसकी जांच की निगरानी उसी तरह करनी चाहिए, जैसे उसने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला मामले में की थी.

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