सारधा चिटफंड घोटाला : दूसरी चार्जशीट में रजत मजूमदार समेत छह आरोपी

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कोलकाता: सीबीआइ की विशेष अपराध शाखा ने सोमवार को सारधा चिटफंड घोटाले के मामले में दूसरा आरोप पत्र अलीपुर कोर्ट में पेश किया. केंद्रीय जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने सारधा मामले में दूसरा आरोप पत्र (चाजर्शीट) दायर कर दिया है जिसमें सारधा समूह की कंपनी सारधा रियलिटी तथा कुछ दूसरी कंपनियां शामिल […]

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कोलकाता: सीबीआइ की विशेष अपराध शाखा ने सोमवार को सारधा चिटफंड घोटाले के मामले में दूसरा आरोप पत्र अलीपुर कोर्ट में पेश किया. केंद्रीय जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने सारधा मामले में दूसरा आरोप पत्र (चाजर्शीट) दायर कर दिया है जिसमें सारधा समूह की कंपनी सारधा रियलिटी तथा कुछ दूसरी कंपनियां शामिल हैं.’

इस मामले में पहला आरोप पत्र 22 अक्तूबर को सारधा समूह की चार कंपनियों तथा तृणमूल कांग्रेस से निलंबित सांसद कुणाल घोष के स्वामित्व वाली एक कंपनी के खिलाफ सत्र अदालत में दायर किया गया था. इसमें सारधा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन, उसकी सहायक देबयानी मुखर्जी तथा कुणाल घोष को आरोपी बनाया गया था.

अधिकारी ने कहा कि आरोप पत्र में सुदीप्त सेन, देबयानी, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक रजत मजूमदार, कारोबारी संधीर अग्रवाल, ईस्ट बंगाल फुटबाल क्लब के अधिकारी देवब्रत सरकार, असमिया गायक सदानंद गोगोई सहित छह लोगों को नामित किया गया है. इन लोगों को सीबीआइ ने गिरफ्तार किया है. आरोप पत्र में संधीर अग्रवाल के पिता सज्जन अग्रवाल का भी नाम है. उनसे सीबीआइ ने पूछताछ की थी लेकिन गिरफ्तार नहीं किया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 409 तथा 420 तथा ‘प्राइज एंड मनी सकरुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) ऐक्ट-1978’ की धारा चार और छह के तहत मामला दर्ज किया गया है.

कुणाल खुदकुशी प्रयास मामले में कोर्ट ने दो दिन में मांगी रिपोर्ट

कोलकाता. तृणमूल कांग्रेस से निलंबित सांसद कुणाल घोष को प्रेसिडेंसी जेल में कथित तौर पर खुदकुशी करने के प्रयास की घटना के बाद सोमवार को बैंकशाल कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रेसिडेंसी जेल अधिकारियों से दो दिन में रिपोर्ट मांगकर पूछा है कि जेल में सारधा घोटाले के आरोपी कुणाल घोष द्वारा कथित रूप से आत्महत्या के प्रयास की अप्रिय घटना कैसे हो गयी, जबकि अदालत ने कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया था. बैंकशाल कोर्ट के सत्र न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने प्रेसिडेंसी जेल के अधिकारियों को 19 नवंबर तक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. अदालत ने इसके साथ ही कुणाल की वस्तुएं कथित रूप से गायब होने पर भी रिपोर्ट मांगी है. सांसद ने 14 नवंबर को कथित रूप से नींद की गोलियां खा ली थीं.

उन्‍हें एसएसकेएम अस्पताल में भरती कराया गया और रविवार को उन्‍हें छुट्टी मिल गयी. घोष को दस नवंबर को न्यायाधीश के सामने पेश किया गया था तो उन्‍होंने अदालत में ही धमकी दी थी कि अगर सीबीआइ तीन दिन में घोटाले में ‘शामिल लोगों’ के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करती है तो वह खुदकुशी कर लेंगे. अदालत ने इसके बाद जेल अधिकारियों को किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ऐहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया था. सुनवाई के दौरान जज ने एडीजी (जेल) की भूमिका पर नाराजगी जतायी. न्यायाधीश ने कहा कि कुणाल की धमकी के बाद जेल प्रबंधन को उसके (कुणाल) कक्ष के आसपास कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया था. लेकिन घटना से साबित हुआ कि वहां सुरक्षा नहीं थी. कुणाल की सेल के अंदर क्या व्यवस्था थी, इसकी रिपोर्ट मांगी गयी थी. वह भी अदालत को नहीं मिली. दोनों मामलों से जेल में कैदियों पर निगरानी को लेकर बरती जा रही लापरवाही साफ झलकती है. लिहाजा दो दिन के अंदर पूरे मामले पर रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाये. उधर, कुणाल ने कहा कि मेरे इस कदम (खुदकुशी का प्रयास) के लिए जिन कर्मियों व डॉक्टर को निलंबित किया गया है, वे दोषी नहीं है. उन्हें दोबारा वहां वापस लाने की कोशिश हो. लेकिन उनकी इस बात पर किसी ने ध्यान देने में रुचि नहीं दिखायी.

घटना के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जेल अधीक्षक, जेल डॉक्टर और घोष की सुरक्षा में तैनात कर्मियों के निलंबन की घोषणा की थी. घोष की ओर से पेश वकील सौम्यजीत राहा ने कहा कि अधिकारियों के निलंबन के बारे में उनके मुवक्किल का कहना यह है कि वे निदरेष हैं. अदालत में बने कटघरे में एक बेंच पर बैठे घोष के स्वास्थ्य का जिक्र करते हुए उनके वकील राहा ने उन्हें जमानत देने का अनुरोध किया और कहा कि उनका मुवक्किल गंभीर रूप से बीमार है. उन्होंने दावा किया कि घोष की उचित देखभाल नहीं की जा रही और उन्हें हिरासत में रखने का कोई आधार नहीं है. न्यायाधीश ने जमानत का अनुरोध खारिज करते हुए घोष की न्यायिक हिरासत 21 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी.

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