सारधा मामला: अदालत ने जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी
कोलकाता: अदालत ने राज्य सुधार सेवा विभाग के आइजी (जेल) और एडीजी (जेल) से रिपोर्ट मांगी है जिसमें यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष ने गुरुवार की रात जेल की अपनी कोठरी में आत्महत्या का प्रयास कैसे किया. कुणाल घोष के वकील अयान चक्रवर्ती की […]
कोलकाता: अदालत ने राज्य सुधार सेवा विभाग के आइजी (जेल) और एडीजी (जेल) से रिपोर्ट मांगी है जिसमें यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के निलंबित सांसद कुणाल घोष ने गुरुवार की रात जेल की अपनी कोठरी में आत्महत्या का प्रयास कैसे किया.
कुणाल घोष के वकील अयान चक्रवर्ती की तरफ से दायर याचिका के बाद बैंकशाल कोर्ट स्थित नगर सत्र अदालत के न्यायाधीश अरविंद मिश्र ने सोमवार तक रिपोर्ट देने को कहा. याचिका में कहा गया कि घोष ने 10 नवंबर को अदालत में आत्महत्या की धमकी दी थी लेकिन प्रेसीडेंसी सुधार गृह के अधिकारियों ने पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं करायी जिस कारण उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया.
न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों से जानना चाहा कि घोष की धमकी के बाद इस तरह की अप्रिय घटना को रोकने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिये क्या कदम उठाये गये थे. याचिका में कुणाल के परिवार के सदस्यों के सुधार गृह में जाकर उनसे (कुणाल) मिलने की मांग के संबंध में न्यायाधीश ने कहा कि यह जेल अधिकारियों पर निर्भर है कि वे इस बारे में निर्णय करें. गौरतलब है करोड़ों रुपये के सारधा चिटफंड घोटाले में एक साल सांसद कुणाल घोष को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने प्रेसीडेंसी सुधार गृह में अपनी कोठरी में गुरुवार की रात आत्महत्या का प्रयास किया और शुक्रवार सुबह उन्हें अस्पताल ले जाया गया. उन्होंने कथित तौर पर नींद की गोलियां खा ली थीं.
सुदीप्त की सुरक्षा को लेकर चिंता
सारधा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन व उनकी करीबी देबयानी मुखर्जी की सुरक्षा को लेकर सीबीआइ चिंतित है. लिहाजा केंद्रीय जांच एजेंसी जेल में बंद सुदीप्त व देबयानी को राज्य से बाहर ले जाना चाहती है. सुदीप्त को अलीपुर जेल में रखा गया है, जबकि देबयानी अलीपुर महिला संशोधनागार में हैं. शुक्रवार को सीबीआइ ने जेल प्रबंधन के पास इन्हें ओड़िशा ले जाने के लिए आवेदन किया. इधर, एडीजी कारा अधीर शर्मा ने कहा कि सुदीप्त व देबयानी के खिलाफ राज्य पुलिस के पास कई मामले दर्ज हैं. लिहाजा उन्हें दूसरे राज्य में भेजना संभव नहीं है.
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