उत्तर दिनाजपुर में राहत: आदिवासी परिवारों को सस्ता अनाज

By Prabhat Khabar Digital Desk
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कालियागंज: उत्तर दिनाजपुर जिला प्रशासन ने जिले के आदिवासी समुदाय के हरेक परिवार को सस्ते में अनाज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए जिले के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को आवश्यक निर्देश जारी कर दिया गया है. जिला प्रशासन के निर्देश मिलते ही खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने आदिवासी समुदाय के लोगों के बीच सस्ती दर में अनाज उपलब्ध कराने की सभी आवश्यक तैयारियां कर ली हैं.

जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने आदिवासी समुदाय के हर परिवार को दो रुपये किलो की दर पर चावल एवं गेहूं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. प्रायोगिक तौर पर पहले तीन महीने तक इस योजना को सभी आदिवासी परिवारों के लिए लागू किया जायेगा. इस योजना की विशेषता यह है कि इस बार एपीएल अथवा बीपीएल कार्ड का कोई झंझट नहीं होगा. सरकार पहले भी दो रुपये किलो की दर पर आदिवासी परिवार को अनाज उपलब्ध कराती थी, लेकिन तब इस योजना का लाभ सिर्फ बीपीएल कार्ड धारकों को ही मिलता था. विभाग द्वारा हाल ही में कराये गये सव्रे के अनुसार जिले में ऐसे आदिवासी परिवरों की संख्या काफी अधिक है, जो गरीब तो हैं लेकिन उनके पास बीपीएल कार्ड नहीं है.

इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बीपीएल कार्ड धारकों के साथ ही आदिवासी समुदाय के एपीएल कार्ड धारकों को भी दो रुपये किलो चावल और गेहूं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. इसी महीने से इस योजना को शुरू किये जाने की कोशिश की जा रही है. आदिवासी परिवारों को उनके वर्तमान राशन डीलर के यहां से ही सस्ती दर पर अनाज उपलब्ध करा दिया जायेगा. इस संबंध में जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी समीर कुमार मंडल का कहना है कि जिले के सभी महकमा में इस योजना को शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारी कर ली गयी है. सबसे पहले इसकी शुरुआत इसलामपुर महकमा से होगी. इसलामपुर महकमा में करीब 15 सौ से भी अधिक आदिवासी परिवार रहते हैं. इसी तरह से रायगंज महकमा में भी करीब 7 सौ से अधिक आदिवासी परिवारों का वास है.

क्या है योजना
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सूत्रों ने बताया है कि इस योजना के तहत आदिवासी परिवार के हरेक व्यक्ति को प्रति सप्ताह एक किलो चावल तथा 750 ग्राम गेहूं देने की योजना है. एक आदिवासी परिवार एक सप्ताह में अधिकतम पांच किलो चावल तथा तीन किलो गेहूं प्राप्त कर सकते हैं. आदिवासी चाहे तो हरेक सप्ताह या फिर तीनों महीने का अनाज एक साथ संग्रह कर सकता है. आदिवासियों को अनाज देने में कहीं से हेरा-फेरी न हो, इसके लिए राशन डीलरों को विशेष हिदायत दी गयी है. राशन डीलरों को ही यह जिम्मेदारी दी गयी है कि वह इस योजना की जानकारी हरेक आदिवासी परिवारों तक पहुंचाए. विभागीय अधिकारियों का मानना है कि सरकार की इस योजना से आदिवासी समुदाय के लोग लाभान्वित होंगे.

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