मोदी को मिला तृणमूल कांग्रेस का साथ

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नयी दिल्ली/कोलकाता: बंगाल में भले ही भाजपा से हर किस्म की दूरी बनाने की कोशिशों में तृणमूल कांग्रेस जुटी हो, संसद में सोमवार को उस समय कुछ और ही नजारा देखने को मिला, जब एनडीए के विधेयक के समर्थन की घोषणा तृणमूल कांग्रेस ने कर दी. कांग्रेस, राजद, माकपा और आप के सदस्यों के वाकआउट […]

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नयी दिल्ली/कोलकाता: बंगाल में भले ही भाजपा से हर किस्म की दूरी बनाने की कोशिशों में तृणमूल कांग्रेस जुटी हो, संसद में सोमवार को उस समय कुछ और ही नजारा देखने को मिला, जब एनडीए के विधेयक के समर्थन की घोषणा तृणमूल कांग्रेस ने कर दी.

कांग्रेस, राजद, माकपा और आप के सदस्यों के वाकआउट के बीच लोकसभा ने भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राइ) के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रधान सचिव नियुक्त करने के रास्ते की कानूनी बाधाओं को दूर करने वाले ट्राई कानून में संशोधन संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी.

1967 बैच के पूर्व आइएएस अधिकारी मिश्र की प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव के तौर पर नियुक्ति में आने वाले अवरोध को दूर करने के लिए पहले अध्यादेश जारी किया गया था जिसके स्थान पर अब यह विधेयक लाया गया है. तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को किसी अधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार है जिसे वह बेहतर शासन के व्यापक हित में फिट समझते हैं. हालांकि तृणमूल सांसद सौगत राय ने पिछले सप्ताह विधेयक का विरोध करते हुए कहा था कि यह विधेयक ट्राई के सेवानिवृत्त अध्यक्ष को सरकारी नौकरी देने के लिए लाया गया है और इस प्रकार यह ट्राई की स्वतंत्रता को ध्वस्त करने के समान है.

लेकिन सोमवार को सदन में सौगत राय मौजूद नहीं थे. तृणमूल के इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस सांसद व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि 360 डिग्री बदलकर तृणमूल अब भाजपा का साथ दे रही है. उसकी असल मंशा इससे उजागर होती है.

कानून और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया कि सरकार संसद की गरिमा और सर्वोच्चता को नजरअंदाज कर रही है. प्रसाद ने कहा कि 1997 में इस संबंध में बनाये गये कानून में कुछ विसंगतियां रह गयी थीं. इन्हें दूर करने के लिए यह विधेयक लाया गया है. इससे पूर्व, कांग्रेस के मल्लिकाजरुन खड़गे ने विधेयक को विधायी प्रक्रिया के खिलाफ तथा संसद की सर्वोच्चता पर आघात बताया और इसे वापस लिये जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री की शक्तियों को चुनौती नहीं दे रहे, लेकिन विधेयक लाने के तरीके पर उन्हें आपत्ति है.

अधीर ने शुरू की चर्चा
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र के मंदिर को ध्वस्त कर रही है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से विधेयक लाया गया है, उसे किसी भी तरह न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता.

सरकार की राय
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पेंशन विकास विनियामक प्राधिकरण और बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण समेत कई अन्य ऐसी संस्थाओं में इस प्रकार का कोई प्रावधान नहीं है. ट्राइ को उनके समान लाने के लिए यह संशोधन जरूरी था.

सौगत ने किया था विरोध
तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंद्योपाध्याय ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को किसी अधिकारी को नियुक्त करने का अधिकार है, जिसे वह बेहतर शासन के व्यापक हित में फिट समझते हैं. हालांकि, सौगत राय ने पिछले सप्ताह कहा था कि विधेयक ट्राइ के रिटायर्ड अध्यक्ष को सरकारी नौकरी देने के लिए लाया गया है. यह ट्राइ की स्वतंत्रता को ध्वस्त करने के समान है.

मो. सलीम ने कहा: माकपा सांसद मोहम्मद सलीम ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को अपने कारनामों के चलते सीबीआइ जांच का खतरा है. इसलिए ही वह भाजपा का साथ दे रही है.

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