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हड़ताल की चेतावनी से पहले सख्ती, UPPCL ने बदला नियम, अब बिना जांच के जाएगी नौकरी

Updated at : 24 May 2025 12:34 PM (IST)
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UP Electricity Strike

UP Electricity Strike

UP Electricity Strike: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने शुक्रवार को “कार्मिक (पंचम संशोधन) विनियमावली-2025” को लागू कर दिया है, जिसके तहत अब बिजली आपूर्ति में बाधा डालने वाले कर्मचारियों को बिना किसी जांच के सीधे नौकरी से हटाया जा सकेगा.

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UP Electricity Strike: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में पूर्वांचल और दक्षिणांचल के बिजली कर्मचारियों ने 29 मई से हड़ताल की घोषणा की है. इसके जवाब में सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताली कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर ली है. उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने शुक्रवार को “कार्मिक (पंचम संशोधन) विनियमावली-2025” को लागू कर दिया है, जिसके तहत अब बिजली आपूर्ति में बाधा डालने वाले कर्मचारियों को बिना किसी जांच के सीधे नौकरी से हटाया जा सकेगा.

बिजली बाधित हुई तो जाएगी नौकरी

संशोधित नियमों के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी जानबूझकर या लापरवाही के चलते बिजली आपूर्ति में बाधा डालता है और तत्काल जांच संभव नहीं है, तो उसे सीधे सेवा से बर्खास्त किया जाएगा. इतना ही नहीं ऐसे कर्मचारियों को भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा में नियुक्ति नहीं मिलेगी. साथ ही दोषी पाए गए कर्मियों के लिए पदावनति (डिमोशन) का भी प्रावधान रखा गया है.

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हड़ताल की चेतावनी से पहले सख्ती

यह संशोधन ऐसे समय में लाया गया है जब विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने 29 मई से कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है. यह विरोध पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ है. इस संशोधन को लेकर विद्युत कर्मचारी संगठनों का कहना है कि निजीकरण से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी. संघर्ष समिति के नेताओं ने UPPCL के इस संशोधन को “अलोकतांत्रिक” बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है. उनका आरोप है कि सरकार दबाव बनाकर आंदोलन को कुचलना चाहती है. हालांकि पॉवर कॉर्पोरेशन का कहना है कि प्रदेश में 24 घंटे बिना किसी समस्या के बिजली सेवा बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है.

बिजली कर्मचारियों के सामने बड़ी चुनौती

दरअसल, बिजली विभाग का निजीकरण उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से चर्चा का विषय बना हुआ है. 2020 में भी निजीकरण के खिलाफ राज्य भर में बड़े पैमाने पर हड़ताल हुई थी, जिससे कई जिलों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी. वहीं इस संशोधन के बाद बिजली कर्मचारियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. अगर कोई कर्मचारी लापरवाही बरतता है या बिजली सेवा बाधित करता है, तो बिना सुनवाई के उसकी नौकरी जा सकती है.

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Shashank Baranwal

लेखक के बारे में

By Shashank Baranwal

जीवन का ज्ञान इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, पेशे का ज्ञान MCU, भोपाल से. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल डेस्क पर कार्य कर रहा हूँ. राजनीति पढ़ने, देखने और समझने का सिलसिला जारी है. खेल और लाइफस्टाइल की खबरें लिखने में भी दिलचस्पी है.

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