Meerut Murder : सौरभ के सिर और हाथ को काटकर साहिल अपने घर ले गया, खौफनाक है पूरी कहानी
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 21 Mar 2025 7:15 AM
मुस्कान रस्तोगी (दाएं) साहिल शुक्ला (बाएं)
Meerut Murder : सौरभ की हत्या के बाद सिर और हाथ को साहिल ने काटा. इसके बाद उसे अपने साथ घर ले गया. पूरी कहानी बहुत ही खौफनाक है.
Meerut Murder : मेरठ में 29 साल के मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने हत्या कर दी. इसमें उसका साथ प्रेमी साहिल शुक्ला ने दिया. बुधवार को जेल भेजे जाने से पहले आरोपियों से घंटों पूछताछ की गई. इसके बाद पुलिस को पता चला कि हत्या की साजिश के बीज नवंबर 2024 में ही बो दिए गए थे. इसी वक्त मुस्कान और साहिल ने सौरभ को अपनी जिंदगी से खत्म करने का प्लान तैयार किया.
हत्या की किसी को खबर न लगे, इसके लिए उन्होंने प्लान तैयार किया. दोनों ने शव को दफनाने के लिए एक जगह की तलाश की. वे एक गांव पहुंचे जहां मृत जानवरों को दफनाया गया था. सौरभ के शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें यही सही जगह नजर आई.
मुस्कान और साहिल ने हत्या से पहले क्या–क्या खरीदा
22 फरवरी को मुस्कान शारदा रोड पर एक डॉक्टर के पास गई. यहां उसने नींद की गोलियों के लिए प्रिस्क्रिप्शन हासिल करने के लिए डिप्रेशन का बहाना बनाया. डॉक्टर के निर्देशों से वह संतुष्ट नहीं हुई. इसके बाद उसने गूगल का सहारा लिया. उसने नींद की दवा और नशीले पदार्थों के बारे में जानकारी एकत्रित की. इसके बाद उसने प्रिस्क्रिप्शन पर अतिरिक्त दवाओं के नाम भी जोड़ दिए. इसके बाद वह और साहिल खैरनगर गए. यहां उन्होंने नींद की गोलियों के अलावा कुछ और भी दवाईयां ली. दोनों ने इसके बाद 800 रुपये की कीमत वाले दो मांस काटने वाले चाकू खरीदे. 300 रुपये का रेजर और पॉलीथीन बैग खरीदा.
सो रहे सौरभ पर चाकू से किए गए ताबड़तोड़ हमले
एसपी (सिटी) आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि 3 मार्च को सौरभ की हत्या तब की गई जब वह अपनी मां रेणु द्वारा बनाए गए लौकी के कोफ्ते लेकर घर लौटा. मुस्कान ने मौके का फायदा उठाया और उस कोफ्ते को गर्म करके उसमें नशीली दवा मिला दी. जब सौरभ बेहोश हो गया तो उसने साहिल को फोन करके इंदिरा नगर में अपने किराए के घर पर बुलाया. इसके बाद जो हुआ वह बिल्कुल किसी हॉरर फिल्म जैसा था. दंपति ने सो रहे सौरभ पर चाकू से ताबड़तोड़ हमले किए, उसे तब तक चाकू से वार किया जब तक कि उसकी जान नहीं निकल गई.
साहिल सिर और हाथों को अपने घर ले गया
जब सौरभ की जान निकल गई तो उसके शव को बाथरूम में घसीटते हुए साहिल ने रेजर से उसका सिर काट दिया, फिर उसके हाथ काट दिए. उनका शुरुआती प्लान शव को टुकड़ों में काटना, उन्हें पॉलीथीन बैग में भरना और अलग-अलग जगहों पर बिखेरना था. उन्होंने सौरभ के धड़ को एक बैग में पैक करके उसे अपने डबल बेड के बॉक्स में रखना शुरू किया. इस बीच, साहिल सिर और हाथों को अपने घर ले गया, और उन्हें 24 घंटे तक अपने कमरे में रखा.
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घंटाघर से एक बड़ा नीला ड्रम और स्थानीय बाजार से सीमेंट खरीदा गया
दोनों ने घंटाघर से एक बड़ा नीला ड्रम और स्थानीय बाजार से सीमेंट खरीदा. मुस्कान के घर लौटकर, उन्होंने धड़ को ड्रम में डाल दिया. उसके बाद साहिल ने सिर और हाथ निकाल कर सिमेंट के घोल में मिला दिया. सीमेंट और धूल के घोल से उन्होंने ड्रम को सील कर दिया. सौरभ के क्षत-विक्षत शरीर को कंक्रीट की कब्र में दफना दिया. पुलिस का अनुमान है कि यह तरीका संभवतः फिल्म देखकर दोनों को आया होगा.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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