बंगाल चुनाव 2026 से पहले सियासत में घुला ‘जहर’, टीएमसी का शुभेंदु अधिकारी पर तीखा हमला

पश्चिम बंगाल के लीडर ऑफ ऑपोजीशन शुभेंदु अधिकारी.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी पर 7 गंभीर आरोप लगाये हैं. टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि शुभेंदु अधिकारी नफरत की राजनीति करते हैं और वह राजनीति में जहर घोल रहे हैं. और क्या-क्या आरोप टीएमसी ने लगाये हैं, यहां पढ़ें.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति में बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है. सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाये हैं. टीएमसी ने शुभेंदु पर ‘नफरत की राजनीति’ करने का आरोप लगाया है. पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करके शुभेंदु अधिकारी के पुराने बयानों और घटनाओं का हवाला देते हुए उन्हें ‘राजनीति में जहर घोलने वाला चेहरा’ बताया गया है.
भाजपा में जाने के बाद से विभाजनकारी बयान दे रहे शुभेंदु – टीएमसी
अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद से शुभेंदु अधिकारी लगातार सांप्रदायिक और विभाजनकारी बयान देते रहे हैं. टीएमसी ने कहा है कि फरवरी 2024 में एक सिख अधिकारी को शुभेंदु अधिकारी ने ‘खालिस्तानी’ कहा. मार्च 2025 में मुस्लिम विधायकों को विधानसभा से बाहर करने संबंधी टिप्पणी और जुलाई 2025 में ‘जय बांग्ला’ बोलने वाले एक व्यक्ति को धमकी देने जैसे मामलों का भी टीएमसी ने जिक्र किया है.
पुलिस अफसर पर जातिसूचक टिप्पणी का लगाया आरोप
इतना ही नहीं, दिसंबर 2025 में कथित तौर पर धार्मिक आधार पर हमले के आरोपियों को सम्मानित करने और फरवरी 2026 में धर्म परिवर्तन से जुड़े बयान देने के लिए भी ममता बनर्जी की पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी की आलोचना की. हाल ही में पुलिस अधिकारियों पर कथित जातिसूचक टिप्पणी को भी टीएमसी ने शुभेंदु के खिलाफ अपनी चार्जशीट में शामिल किया है.
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टीएमसी ने भाजपा पर भी साधा निशाना
टीएमसी ने शुभेंदु के साथ-साथ भाजपा पर भी निशाना साधा. कहा कि वह ऐसे बयानों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्हें राजनीतिक संरक्षण देती है. रूलिंग पार्टी ने इसे बंगाल की ‘मां-माटी-मानुष’ की एकता और सामाजिक ताने-बाने पर हमला बताया है. भाजपा की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आयी है.
चुनाव से पहले तेज हो सकती है ध्रुवीकरण की राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति तेज हो सकती है. बंगाल में 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं, विचारधारा और सामाजिक संतुलन की भी परीक्षा बनता दिख रहा है.
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By Mithilesh Jha
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