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बंधुआ मजदूरी कराने के आरोप में 43 प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज

Updated at : 20 Sep 2020 2:51 PM (IST)
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बंधुआ मजदूरी कराने के आरोप में 43 प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज

बहराइच : उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में चलाए जा रहे "नो चाईल्ड लेबर" अभियान के तहत बच्चों से काम कराने के आरोप में शनिवार को बहराइच के 43 प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत 25 मुकदमे दर्ज कराए गये हैं. "नो चाइल्ड लेबर" अभियान के नोडल अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने रविवार को बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक नीरा रावत द्वारा विगत माह जारी पत्र के अनुपालन के तहत बहराइच के पुलिस अधीक्षक विपिन मिश्र की निगरानी में शुक्रवार को शुरू की गयी औचक कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, चाट स्टाल, मेडिकल स्टोर, साइकिल स्टोर, फर्नीचर, सब्जी व अन्य प्रतिष्ठानों समेत कुल 43 स्थानों पर 48 बाल श्रमिक काम करते पाए गये थे.

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बहराइच : उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में चलाए जा रहे “नो चाईल्ड लेबर” अभियान के तहत बच्चों से काम कराने के आरोप में शनिवार को बहराइच के 43 प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ विभिन्न थानों में गंभीर धाराओं के तहत 25 मुकदमे दर्ज कराए गये हैं. “नो चाइल्ड लेबर” अभियान के नोडल अधिकारी अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने रविवार को बताया कि अपर पुलिस महानिदेशक नीरा रावत द्वारा विगत माह जारी पत्र के अनुपालन के तहत बहराइच के पुलिस अधीक्षक विपिन मिश्र की निगरानी में शुक्रवार को शुरू की गयी औचक कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, चाट स्टाल, मेडिकल स्टोर, साइकिल स्टोर, फर्नीचर, सब्जी व अन्य प्रतिष्ठानों समेत कुल 43 स्थानों पर 48 बाल श्रमिक काम करते पाए गये थे.

अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि इन सभी बाल श्रमिकों को स्वैच्छिक संगठन देहात चाईल्ड लाईन-1098 के सहयोग से मुक्त कराया गया था. अभियान को संचालित करने के लिए सात टीमें काम कर रही हैं. नोडल अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सभी आरोपी नियोजकों के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में कुल 25 मुकदमे दर्ज कराए गए हैं. उन्होंने बताया कि थाना जरवल रोड में 20, थाना कैसरगंज और कोतवाली देहात में तीन-तीन, कोतवाली नगर में नौ तथा थाना दरगाह शरीफ में आठ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर विवेचना की जा रही है.

अभियान में पुलिस व प्रशासन के साथ सहयोग कर रहे स्वैच्छिक संगठन देहात के निदेशक जीतेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की जिन धाराओं 370 (01) और (06) के तहत मुकदमे दर्ज हुए हैं उनमें सात से 10 साल की कैद और जुर्माने की सजा का प्राविधान है. दूसरी बार अपराध करने के आरोपियों को दोगुनी सजा भी सुनाई जा सकती है.

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