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सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के अलावा सबसे मिले आजम खान, आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं?

Updated at : 26 Apr 2022 8:24 PM (IST)
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सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा के अलावा सबसे मिले आजम खान, आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं?

सभी पार्टियों की कोशिश आजम खान को अपने पाले में करने की है क्यों कि आजम मुस्लिमों का बड़ा चेहरा हैं. उनके आने से मुस्लिमों में बड़ा संदेश जाएगा.

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UP News: सीतापुर जेल में बंद आजम खान इस समय यूपी की सियासत का केंद्र बिंदु बने हुए हैं. उनसे मिलने तमाम पार्टियों के नेता पहुंच रहे हैं. चाहे वह शिवपाल सिंह यादव हों या फिर आचार्य प्रमोद कृष्णम. सभी का निशाना समाजवादी पार्टी है. सभी यह संदेश देना चाहते हैं कि सपा अब भाजपा को रोकने में नाकाम है. इसके अलावा, सभी पार्टियों की कोशिश आजम खान को अपने पाले में करने की है क्यों कि आजम मुस्लिमों का बड़ा चेहरा हैं. उनके आने से मुस्लिमों में बड़ा संदेश जाएगा.

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने आजम खान से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि आजम खान के साथ बहुत अन्याय हो रहा है. उनकी रिहाई के लिए सपा ने कोई आंदोलन नहीं छेड़ा. कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने भी आजम खान से मुलाकात की और कहा कि वे अपने दोस्त से मिलने आए थे. उनके जैसे नेता को जेल में रखना गंभीर अत्याचार और उत्पीड़न करने के समान है. सपा अब भाजपा से लड़ने के काबिल हैं. यूपी अल्पसंख्यक कांग्रेस के अध्यक्ष शहनवाज आलम ने यहां तक कहा कि आजम खान को सपा के मुस्लिम विधायकों को अपने साथ लेकर नई पार्टी बना लेनी चाहिए.

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बता दें, आजम खान ने शिवपाल सिंह यादव और आचार्य प्रमोद कृष्णम से मुलाकात की, लेकिन सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा से मुलाकात नहीं की. बताया जा रहा है कि आजम खान ने ही उनसे मिलने से इनकार कर दिया था. वहीं, रविदास मेहरोत्रा का कहना है कि जेल प्रशासन ने उन्हें आजम से मिलने नहीं दिया.

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ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर आजम खान ने रविदास मेहरोत्रा से ही क्यों मुलाकात नहीं की, जबकि सभी से उन्होंने मुलाकात की. ऐसे में सियासी गलियारे में चर्चा शुरू हो गई है कि आजम सपा से नाखुश हैं. वह पार्टी भी छोड़ सकते हैं.

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आजम खान को पार्टी में शामिल होने के लिए पत्र भी लिखा था. पत्र में कहा गया है कि समाजवादी पार्टी मुसलमानों की हमदर्द नहीं है. वह उन्हें सिर्फ वोटबैंक समझती है. पिछले तीन सालो से आजम खान और उनके परिवार के लिए अखिलेश यादव व उनके सिपहसालारों ने कोई ठोस आवाज नहीं उठायी है.

दरअसल, आजम खान की सपा से दूरी की चर्चाएं 11 अप्रैल से शुरू हुई. आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश यादव नहीं चाहते कि आजम खान जेल से रिहा हों. उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान को भी सही ठहराया.

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आजम खान के मीडिया प्रभारी फसाहत अली खां शानू ने एक मीटिंग को संबोधित करने के दौरान कहा था कि क्या यह मान लिया जाए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सही कहते हैं कि अखिलेश नहीं चाहते कि आजम खान जेल से बाहर आएं. जेल में बंद आजम खान के रिहा न होने की वजह से हम लोग सियासी रूप से यतीम हो गए हैं. हम कहां जाएंगे, किससे अपनी बात कहेंगे और किसको अपना गम बताएंगें. हमारे साथ तो वह समाजवादी पार्टी भी नहीं है, जिसके लिए हमने अपने खून का एक एक कतरा बहा दिया.

फसाहत ने कहा कि आजम खान ने अपनी जिंदगी सपा को दे दी, लेकिन सपा ने आजम खान के लिए कुछ नहीं किया. वह यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को हमारे कपड़ों से बदबू आती है, उन्होंने मुस्लिम समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि क्या सारा ठेका अब्दुल ने ले लिया है. वोट भी अब्दुल देगा और जेल भी अब्दुल जाएगा.

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