अयोध्या मामले में सुनवाई टलने पर पर बोले योगी - न्याय में देरी कभी-कभी अन्याय के समान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Oct 2018 10:53 PM
लखनऊ : उच्चतम न्यायालय में अयोध्या में विवादित भूमि मामले की सुनवायी अगले वर्ष जनवरी तक टलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि न्याय में विलंब कभी-कभी अन्याय के समान हो जाती है और लोगों को निराशा होती है, लेकिन कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा. अयोध्या मुद्दे […]
लखनऊ : उच्चतम न्यायालय में अयोध्या में विवादित भूमि मामले की सुनवायी अगले वर्ष जनवरी तक टलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि न्याय में विलंब कभी-कभी अन्याय के समान हो जाती है और लोगों को निराशा होती है, लेकिन कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा.
अयोध्या मुद्दे पर न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया में योगी ने कहा, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ा हुआ मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है. समय पर मिला न्याय, उत्तम न्याय माना जाता है. न्याय में देरी कभी-कभी अन्याय के समान हो जाती है. उन्होंने कहा, देश की न्यायपालिका के प्रति सबका सम्मान है और हम सभी उन संवैधानिक बाध्यताओं से बंधे हैं. माननीय उच्चतम न्यायालय इसका शीघ्र समाधान निकाले. मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों को पूरे धैर्य के साथ श्रीराम जन्मभूमि के समाधान की दिशा में होनेवाले उन सभी सार्थक प्रयासों में सहभागी बनना चाहिए, जिससे देश में शांति और सौहार्द की स्थापना हो तथा भारत के सभी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सम्मान का भाव सुदृढ़ हो.
उन्होंने कहा, इस समस्या के समाधान के लिए हम लोग व्यापक विचार-विमर्श कर रहे हैं और कोई ना कोई रास्ता अवश्य निकलेगा. मेरा यह विश्वास है. इस सवाल पर कि क्या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होने के नाते आप भी प्रस्ताव रखेंगे कि अध्यादेश लाना एक रास्ता है जिस पर विचार करना चाहिए, योगी ने कहा, देखिये अब ये मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में है, लेकिन देश की शांति और सौहार्द के लिए व्यापक आस्था का सम्मान करने के लिए जो भी विकल्प हो सकते हैं, उन सब विकल्पों पर विचार होना चाहिए. उन्होंने कहा, अच्छा होता कि न्यायालय इस मामले की जल्दी सुनवायी करके देश के व्यापक सौहार्द और शांति के लिए इस मामले में जल्दी फैसला कर देता, लेकिन मुझे लगता है कि अभी फिलहाल इस तरह की संभावनाएं नहीं दिखती है.
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को सोमवार को उचित पीठ के समक्ष जनवरी के प्रथम सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दिया जो इसकी सुनवाई का कार्यक्रम निर्धारित करेगी. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने कहा था कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की प्रक्रिया के बारे में वही पीठ जनवरी में निर्णय लेगी. पीठ ने कहा, हम अयोध्या विवाद मामले को सुनवाई के लिए जनवरी में उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे.
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता और रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने लंबे समय से इस मामले के लंबित होने का जिक्र करते हुए अपील पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया था. इस पर पीठ ने कहा, हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं. इस मामले की सुनवाई जनवरी, फरवरी या मार्च में करने के बारे में उचित पीठ ही निर्णय करेगी.
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