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संभाल कर रखें दिल की धड़कनों को, नहीं तो हो जायेगी मुश्किल

Updated at : 13 Apr 2020 12:10 AM (IST)
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संभाल कर रखें दिल की धड़कनों को, नहीं तो हो जायेगी मुश्किल

प्रदीप गुप्ता, बलिया : हार्ट, ब्लड प्रेशर या सुगर के मरीज हैं, तो अभी खुद को संभाल कर रखिये. लॉकडाउन के दौरान तमाम जीवनरक्षक दवाओं का संकट गहराने लगा है. लॉकडाउन के चलते दवा की आपूर्ति गैर जनपदों से नहीं मिलने के चलते जिले में गंभीर मर्ज की दवाओं का टोटा हो गया है. अभी […]

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प्रदीप गुप्ता, बलिया : हार्ट, ब्लड प्रेशर या सुगर के मरीज हैं, तो अभी खुद को संभाल कर रखिये. लॉकडाउन के दौरान तमाम जीवनरक्षक दवाओं का संकट गहराने लगा है. लॉकडाउन के चलते दवा की आपूर्ति गैर जनपदों से नहीं मिलने के चलते जिले में गंभीर मर्ज की दवाओं का टोटा हो गया है. अभी बाजार में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों की दवा न के बराबर ही मिल रही है. आलम यह है कि दवाओं के टोटा से जहां दुकानदार परेशान है वहीं रोगियों की जान पर बन आयी है. ऐसे में चिकित्सक किसी तरह से मरीजों को दवा बदलने के बाद उन्हें जिंदा रखने की जुगत में है. बहुत सी ऐसी दवाएं है जो जीवनरक्षक होने के बाद भी मरीजों और तीमारदारों को खरीदने पर भी नहीं मिल रही है.

करीब 20 दिनों के लॉकडाउन में मरीजों की हालत इस कदर बिगड़ने लगी है कि उन्हें संभालने में भी चिकित्सकों का दिमाग फेल मार जा रही है. थोक दवां मंडी में मधुमेह में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला इंसुलिन इंजेक्शन ही नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में करीब 40 से 50 दवाएं बाजार में समाप्त हो चुकी है. दवा कारोबारियों की मानें तो ट्रांसपोटिंग व दवा की कोरियर सेवा शुरु होने के बाद ही कुछ सहूलियत मिल सकेगी. सबसे दिलचस्प तो यह है कि कोल्ड चेन वाली दवाएं ही नहीं मिल रही हैं. जिसमें कई जीवनरक्षक दवा की श्रेणी में आती है.पूरे देश में बीते 25 मार्च से लॉकडाउन चल रहा है. ऐसे में वाराणसी और लखनऊ से आने वाली दवाएं ट्रांसपोर्ट में फंसी हुई हैं. लंबे समय से लगे लॉकडाउन के चलते दिल के रोगियों के साथ ब्लड प्रेशर, मधमेह के रोगियों की दवा भी जिले में नहीं आ पा रही है. करीब 20 दिनों से जिले में आपातकाल की स्थिति के चलते दवा मंडी में सबसे अधिक टोटा कोल्ड चेन की दवाओं का है.

जो फ्रीज में रखने के बाद ही बेची जाती है. उसे गैर जनपदों से लाने के लिए फ्रीज वाले डिलीवरी वाहन होते हैं. दवा के थोक बाजार में जो दवाएं समाप्त हैं उसमें अधिकांश दवाएं इंजेक्शन व कुछ टेबलेट भी शामिल है. ऐसे में भले ही लोग कोरोना से न मरें, लेकिन दवा न मिलने से उनकी मौत तो निश्चित हो जाएगी. दिल के मरीजों को ज्यादा दिक्कत सबसे अधिक दिक्कत दिल के मरीजों को हो सकती है. चिकित्सकों की मानें तो कोल्ड चेन वाली दवाओं की आपूर्ति यथाशीघ्र की जाती है अगर चार दिनों तक ट्रांसपोर्ट में फंस गया तो उसकी क्षमता समाप्त हो जायेगी. इसके चलते दवा के प्रयोग के बाद भी मरीज को बचाया नहीं जा सकता है. ऐसे में कोरोना से तो बाद में मरेगा दवाओं की आपूर्ति ठीक नहीं हुई तो उसकी मौत हो सकती है.

चिकित्सकों की राय है कि कुछ दवाएं बिना गैप के ही चलाई जाती है. ऐसे में उनकी उपलब्धता दवा बाजार के लिए बहुत ही जरूरी है. लॉकडाउन के चलते दवाओं का जिले में काफी टोटा चल रहा है. ऐसे में हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, ब्लड प्रेशर सहित कई रोगों की लगातार चलने वाली दवाएं भी नहीं मिल पा रही है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि इंसुलिन और मधुमेह की कई दवाएं नहीं मिल पा रही है. कोल्डचेन वाली दवाओं का तो दवा मार्केट में बहुत अधिक टोटा है. जो मरीजों के लिए काफी जोखिम भरा है. अगर कुछ दिन के लॉकडाउन में दवाओं के लिए ढील नहीं दी गई तो लोगों की जान का भी खतरा हो सकता है.-डॉ बीके गुप्ता, वरिष्ठ फिजिशियन, बलिया

थोक दवा मार्केट में दवाओं का काफी टोटा है. आलम यह है कि गायनीक एवं कोल्डचेन की करीब 40 से 50 दवाओं की रेंज नहीं होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि सुगर, ब्लड प्रेशर व हार्ट की दवाएं नहीं है. सबसे बड़ी बात है कि ट्रांसपोर्टिंग शुरु न होने के चलते सेनेटाइजर व मास्क भी नहीं मिल रहा है. जिनका आर्डर पहले से ही लगा हुआ. लेकिन दवाएं नहीं आ रही है.-बब्बन यादव, महामंत्री बीसीडीए, बलिया

लॉकडाउन के चलते बाजार में बहुत सी दवाएं नहीं मिल रही है. जिनकी तबियत खराब रहती है और रेग्यूलर दवाएं खानी है, उन्हें अपना आत्मबल व मनोबल बढ़ाना होगा. इस वैश्विक महामारी में परेशान होने की जरुरत नहीं है. आरोग्य सेतु डाउनलोड करके भी हम उसका विकल्प ढूंढ सकते हैं. वहीं ऑनलाइन दवाएं भी मंगाने पर मिल जा रही है. ऐसे में हमें अपने रोग से आत्मबल के जरिये जंग लड़ना होगा. इसके चलते हर कोई परेशान है, लेकिन लॉकडाउन के चलते पर्यावरण में काफी संतुलन देखने को मिल रहा है. जो हमारे सेहत के लिए काफी लाभदायक साबित होगा.-डॉ ममता वर्मा, एसोसिएट प्रवक्ता मनोविज्ञान- गुलाब देवी महिला पीजी कालेज, बलिया

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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