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हाईटेक सपा के निशाने पर होगी मोदी सरकार

Updated at : 06 Oct 2014 6:20 PM (IST)
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हाईटेक सपा के निशाने पर होगी मोदी सरकार

ll लखनऊ से राजेन्द्र कुमार ll नब्बे के दशम में शुरू हुई समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपने रूप रंग को बदलेगी. सपा को आधुनिक सोच वाली हाईटेक पार्टी बनाया जाएगा. यही नहीं भारतीय जनता पार्टी (बसपा) के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए सपा को हाईटेक करते हुए गांवों के अर्थशास्त्र को मजबूत करने और […]

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ll लखनऊ से राजेन्द्र कुमार ll

नब्बे के दशम में शुरू हुई समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपने रूप रंग को बदलेगी. सपा को आधुनिक सोच वाली हाईटेक पार्टी बनाया जाएगा. यही नहीं भारतीय जनता पार्टी (बसपा) के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए सपा को हाईटेक करते हुए गांवों के अर्थशास्त्र को मजबूत करने और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित पार्टी के तमाम युवाओं की अहम दायित्व दिए जाएंगे. इसके अलावा जातीय राजनीति करने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सपा अपने हाईटेक संसाधनों के जरिए चुनौती देते हुए उसे हासिए पर लाने का प्रयास करेगी.

सपा के इन लक्ष्यों को हासिल की रणनीतिक यहां लखनऊ में 8 से 10 अक्टूबर को हो रहे पार्टी के नौवें राष्ट्रीय अधिवेशन में तय की जाएगी. इस दौरान अधिवेशन में सपा के नए मिजाज की झलक भी देखने को मिलेगी. जिसके तहत ही पहली बार सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन का लाइव प्रसारण करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा जाएगा. यही नहीं केंद्र सरकार पर आक्रामक होते हुए सपा नेता अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों के साथ सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी उठाकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास करेंगे. ताकि मोदी की नीतियों का विरोध कर अन्य राज्यों में सपा की जड़ें गहरी की जा सकें.

इसके लिए सपा नेता फिर सांप्रदायिकता को हथियार की तरह इस्तेमाल करेंगे और हाईटेक संसाधनों के जरिए अपना यह रंग देख को दिखाएंगे. वास्तव में चार माह पूर्व हुए लोकसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त से बेचैन सपा यूपी में भाजपा के हर कदम पर चुनौती देना चाहती है ताकि सूबे को लोगों को यह अहसास कराया जा सके कि भाजपा के खिलाफ सपा ही संघर्ष करती है. परन्तु बीते लोकसभा चुनावों में सपा को जो करारी शिकस्त मिली उससे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव यह समझ गए कि भाजपा को वह अपने पुराने तरीकों से रोक नहीं सकते.

मुलायम सिंह की इस सोच का आधार यूपी के युवा मतदाता हैं. यूपी में इस वक्त 55.26 प्रतिशत मतदाता ऐसे हैं जिनकी उम्र 39 वर्ष या उससे कम है. इन युवा मतदाताओं को रिझाकर ही अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 में मायावती को सत्ता से बेदखल किया था. इन युवा मतदाताओं को सपा से जोड़े रखने के लिए ही अखिलेश ने लैपटाप योजना शुरू की थी लेकिन बीते लोकसभा चुनावों में यही युवा मतदाता सपा से छिटकर नरेन्द्र मोदी के पक्ष में खड़ा गया हो गया. अब इसी युवा मतदाता को फिर से सपा में लाने के लिए पार्टी ने खुद को हाईटेक करने की कोशिशें शुरू की है.

अधिवेशन के दौरान सपा में हुआ यह बदलाव दिखायी देगा.सपा नेताओं का दावा है कि पार्टी का हाईटेक रूप युवाओं को पसंद आएगा और दस हजार से भी अधिक युवा नेताओं की मौजूदगी में मुलायम सिंह को फिर से पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव जाएगा. इसके अलावा अधिवेशन में गांवों को इकोनॉमिकली पावरफुल बनाने के लिए आर्थिक सुधार का प्रस्ताव लाया जाएगा. जिसमें पूरा जोर इस बात पर होगा कि कैसे गांवों का अर्थशास्त्र मजबूत किया जाए. इस प्रस्ताव में सरकार की ओर से गांवों में उद्योग लगाने, निवेश करने और रोजगार देने के तरीकों पर भी फोकस होगा.

इस दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जो की सपा के प्रदेश अध्यक्ष भी है यह बताएंगे कि कैसे उन्होंने यूपी का यूपी का आर्थिक नक्शा बदलने के प्रयास किए हैं और निकट भविष्य में गांवों को समृद्ध बनाने के लिए क्या करने वाले हैं. सपा नेताओं के अनुसार इसी दरमियान पार्टी के नेता मोदी सरकार पर निशाना साधेंगे. मोदी द्वारा देश में अच्छे दिन लाने के किए गए वायदे का हिसाब मागेंगे और पार्टी का आर्थिक तथा राजनीतिक प्रस्ताव पेश करेंगे. अधिवेशन के दौरान आए हजारों हजार कार्यकर्ताओं में को पार्टी के बीस वर्ष के संघर्ष की पूरी दास्तान छाया चित्रों व वीडियो क्लिपिंग के जरिये दिखाए जाने की भी व्यवस्था की गई है.

कहा जा रहा है कि पार्टी से जुड़ी नई पीढी को सपा के अब तक के सफर की पूरी कहानी बयां करने के लिए यह व्यवस्था की जा रही है. वास्तव में खुद को हाईटेक बनाकर सपा का शीर्ष नेतृत्व अखिलेश यादव की शक्ल में नई पीढ़ी को वह सब सौपने की पृष्ठभूमि तैयार कर रही है जिसे मुलायम सिंह यादव की थाती समझा जाता रहा है. सपा प्रमुख के विचारों में यह तब्दीली अखिलेश यादव के बागडोर संभालने के बाद आई है. जिसके क्रम में उन्होंने अखिलेश यादव को पार्टी की कई अहम जिम्मेदारियां देने के मन बनाया है. अब देखना यह है कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव अपने भाईयों की मौजूदगी में कैसे अखिलेश यादव के कद को पार्टी में और अधिक बढ़ाते हैं.

कई राज्यों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

सपा के नौवें राष्ट्रीय अधिवेशन में आने वाले सभी अतिथियों को एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों के पास से रिसीव किया जाएगा. अधिवेशन में लक्षद्वीप, मणिपुर, गोवा, केरल, उड़ीसा, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल, राजस्थान, आसाम, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड, तमिलनाडु, तेलगांना, पश्चिम बंगाल, बिहार एवं मध्य प्रदेश से भी प्रतिनिधि आ रहे है. अधिवेशन में हर प्रांत का सांस्कृतिक रंग दिखाई पड़ेगा. पार्टी का खुला अधिवेशन दस को होगा. अधिवेशन के अंतिम दिन करीब एक लाख लोगों के भाग लेने की उम्मीद है. इससे पहले दो दिन तक चलने वाले अधिवेशन में केवल दस हजार प्रतिनिधियों को ही भाग लेने का मौका मिल सकेगा.

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