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गुमला में हाथी ने घर तोड़ा, दीवार गिरने से 5 महीने की बच्ची की मौत

Updated at : 10 Mar 2026 2:08 PM (IST)
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Gumla Elephant Attack

हाथी के हमले से गुमला के सरगांव पतराटोली गांव में टूटा घर. फोटो: प्रभात खबर

Gumla Elephant Attack: गुमला के करंज थाना क्षेत्र के सरगांव पतराटोली गांव में जंगली हाथी ने घर तोड़ दिया, जिससे दीवार गिरने से 5 महीने की बच्ची की मौत हो गई. घटना में बच्ची की मां भी घायल हो गई. वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुटी है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla Elephant Attack: झारखंड के गुमला जिले के करंज थाना क्षेत्र के सरगांव पतराटोली गांव में जंगली हाथी के उत्पात से एक दर्दनाक घटना सामने आई है. सोमवार की रात एक हाथी ने गांव में घुसकर एक घर को तोड़ दिया, जिससे दीवार गिरने के कारण पांच महीने की मासूम बच्ची की दबकर मौत हो गई. इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और मातम का माहौल है. बताया जा रहा है कि यह घटना रात करीब 11:00 बजे की है. उस समय घर के अंदर चंदन उरांव अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सोए हुए थे. तभी अचानक जंगली हाथी वहां पहुंच गया और घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी.

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

हाथी के घर तोड़ने के दौरान अचानक दीवार गिर गई, जिसकी चपेट में आकर पांच महीने की बच्ची अमिता उरांव दब गई. माता-पिता को बच्ची को बचाने का मौका भी नहीं मिल पाया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के समय चंदन उरांव की पत्नी अपने पांच वर्षीय बेटे को लेकर किसी तरह घर से बाहर भागने में सफल हो गई. इस हादसे में चंदन उरांव की पत्नी भी गंभीर रूप से घायल हो गई. इस हृदयविदारक घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

गांव में मचा हड़कंप

जैसे ही इस घटना की जानकारी गांव के अन्य लोगों को मिली, पूरे गांव में हड़कंप मच गया. ग्रामीण भयभीत हो गए और पूरी रात रतजग्गा करने को मजबूर हो गए. ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में अक्सर जंगली हाथियों का झुंड आता रहता है, जिससे गांव के लोगों में हमेशा डर का माहौल बना रहता है. हाथियों के डर से कई परिवार रात में ठीक से सो भी नहीं पाते.

वन विभाग और पुलिस की टीम पहुंची मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की बसिया टीम सक्रिय हो गई. वन विभाग ने करंज थाना पुलिस के सहयोग से रात में ही घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली. वन विभाग की टीम ने पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता राशि भी प्रदान की. वहीं, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. करंज थाना प्रभारी करण टूडू पुलिस बल के साथ सरगांव पतराटोली पहुंचे और बच्ची के शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी.

जनप्रतिनिधियों ने जताया शोक

घटना की जानकारी मिलने पर डुड़िया पंचायत की मुखिया रश्मि लकड़ा और पूर्व मुखिया बसंत उरांव भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे. उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और बच्ची की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया. मुखिया रश्मि लकड़ा ने कहा कि यह बेहद दुखद घटना है. पांच महीने की मासूम बच्ची की मौत ने सभी को अंदर से झकझोर दिया है. उन्होंने वन विभाग से मांग की कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए और घायल महिला के इलाज की समुचित व्यवस्था की जाए.

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हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि सरगांव वन क्षेत्र में अक्सर जंगली हाथियों के आने की सूचना मिलती रहती है. हाथियों के कारण गांव के घरों और खेतों को भी काफी नुकसान पहुंचता है. ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथी को जल्द सुरक्षित स्थान पर खदेड़ा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों. फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है और लोग रात के समय काफी सतर्कता बरत रहे हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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