पायलट जी आप कुछ भी कर लें, आपका नंबर नहीं आयेगा, अमित शाह ने कांग्रेस की खींचतान पर कसा तंज

Edited by Rajneesh Anand
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अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा' के बावजूद हाल ही में हुए चुनावों में पूर्वोत्तर से कांग्रेस का सफाया हो गया.

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पायलट जी आप कुछ भी कर लें, आपका नंबर नहीं आयेगा, यह संभव है कि जमीन पर आपका योगदान गहलोत जी से ज्यादा हो लेकिन कांग्रेस के खजाने में गहलोत जी का योगदान ज्यादा है. उक्त बातें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी खींचतान पर कटाक्ष करते हुए कही. वे आज राजस्थान के भरतपुर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे.

भाजपा को हर चुनाव में जीत मिलेगी

अमित शाह ने कहा कि राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों सत्ता के लिए लड़ रहे हैं. गहलोत जी कह रहे हैं कि मैं उतरना नहीं चाहता और पायलट जी कह रहे हैं कि मैं बनना चाहता हूं. अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि ये बेवजह झगड़ रहे हैं, क्योंकि सरकार तो भाजपा की बननी है.

भारत जोड़ो यात्रा बेकार

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बावजूद हाल ही में हुए चुनावों में पूर्वोत्तर से कांग्रेस का सफाया हो गया. इस बात से साबित होता है कि यह यात्रा कितनी सफल थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से आम जनता के कल्याण के लिए काम किया है और गरीबों का कल्याण किया है, चुनाव कहीं भी हो जीत भाजपा की ही होगी.

बूथ कार्यकर्ताओं का परिश्रम कारगर

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि पहले कांग्रेस हमपर हम दो हमारे दो कहकर मजाक उड़ाती थी क्योंकि लोकसभा में हमारे दो ही सांसद थे. आज उसी कांग्रेस पार्टी को लोकसभा में विपक्ष के नेता का भी स्टेटस नहीं मिल पाया है. भाजपा आज जिस मुकाम पर है उसमें हमारे बूथ कार्यकर्ताओं का कठिन परिश्रम शामिल है. अमित शाह ने गहलोत सरकार पर हमला करते हुए कहा कि गहलोत जी आप बम ब्लास्ट के मृतकों पर राजनीति कर रहे हैं, आप क्या समझते हैं कि जनता कुछ समझती है. आपकी ये सरकार जनता के मन से उसी दिन उतर गई थी जब आपने रामनवमी के जुलूस पर रोक लगा दी थी. भाजपा की सरकार यहां पूर्ण बहुमत से बनेगी.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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