Bhubaneswar News: अनुगूल-तालचेर औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते गंभीर वायु प्रदूषण को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गहरी चिंता व्यक्त की है. इस संदर्भ में उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को अलग-अलग पत्र लिखकर जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों से अवगत कराने के साथ-साथ व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग है.
बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
अपने पत्रों में श्री प्रधान ने अनुगूल में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) के गंभीर श्रेणी में बने रहने को अत्यंत चिंताजनक बताया. उन्होंने विशेष रूप से तालचेर के देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल होनो को एक गंभीर चेतावनी करार दिया. पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदूषण के कारण बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
समस्या के समाधान के लिए संबंधित मंत्रालयों को दिये सुझाव
समस्या के समाधान के लिए श्री प्रधान ने संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकार को कई ठोस सुझाव दिये हैं. इनमें औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना, रियल-टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत करना, कोयला परिवहन में ‘मशीनीकृत कोल ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम’ और उन्नत धूल नियंत्रण तकनीकों को लागू करना शामिल है. इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों और खनन गलियारों के आसपास व्यापक पौधरोपण कर ग्रीन बफर विकसित करने तथा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत लक्षित योजनाओं के विस्तार का भी प्रस्ताव दिया गया है. केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के अंतर्गत उठाये जा रहे कदम केवल अस्थायी समाधान हैं. उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला प्रशासन और औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर दीर्घकालिक और स्थायी समाधान निकालने की आवश्यकता पर बल दिया. श्री प्रधान ने अनुगूल और तालचेर क्षेत्र के निवासियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों को अनिवार्य बताते हुए त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का आह्वान किया.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वित्त मंत्री से की मुलाकात
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर शिक्षा क्षेत्र की आकांक्षाओं से उन्हें अवगत कराया. इस दौरान स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा प्रणाली को रूपांतरित करने से जुड़े विभिन्न विचारों और प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गयी. सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से प्रधान ने बताया कि बैठक में शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को मजबूत करने से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की परंपरा के अनुरूप बजट 2026-27 में शिक्षा, शोध, नवाचार और स्किलिंग के लिए और अधिक बड़े व साहसिक निवेश देखने को मिलेंगे. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे निवेश रोजगार आधारित विकास को गति देने में सहायक होंगे और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे.
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