Bhubaneswar News: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी की संयुक्त अध्यक्षता में शुक्रवार को नयी दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 के तहत ‘समग्र शिक्षा के नये स्वरूप’ को लेकर एक दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित की गयी. बैठक में 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद तथा विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल हुए और स्कूल शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया.
समग्र शिक्षा योजना को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप बनाया जायेगा
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रधान ने कहा कि यह सामूहिक प्रयास और इससे निकलने वाले नवोन्मेषी विचार देश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगे. उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा योजना को पुनर्कल्पित कर उसे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य के अनुरूप बनाया जायेगा, जिससे एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित हो सके जो परिणाम-आधारित, वैश्विक प्रतिस्पर्धी और भारतीय मूल्यों से जुड़ी हो तथा छात्रों की विविध आवश्यकताओं को पूरा कर सके.
एक सशक्त मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया
श्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ का दूरदर्शी लक्ष्य निर्धारित किया है, जो तभी साकार होगा जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने सीखने के अंतर को कम करने, ड्रॉपआउट दर घटाने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ कुपोषण जैसी समस्याओं के समाधान को सामूहिक जिम्मेदारी बताया. केंद्रीय मंत्री ने शिक्षकों के कौशल संवर्धन, छात्रों में डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग के विकास तथा अमृत पीढ़ी को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर एक सशक्त मानव संसाधन तैयार करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप परिणाम-केंद्रित और वैश्विक प्रतिस्पर्धी ढांचे में ढालना आवश्यक है. श्री प्रधान ने सभी शैक्षणिक विशेषज्ञों, मंत्रालयों और भागीदार राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक समग्र वार्षिक कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब विचार एकजुट होते हैं, तो क्षमताएं भी मजबूत होती हैं.
2036 तक ओडिशा में शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव का लक्ष्य: धर्मेंद्र प्रधान
ओडिशा में शिक्षा क्षेत्र के समग्र विकास और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर नयी दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी. बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी भी उपस्थित रहे और राज्य की शैक्षणिक प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गयी. बैठक के दौरान ओडिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी कार्यान्वयन, तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा–स्कूल शिक्षा (एनसीएफ-एसइ) के अनुरूप नये पाठ्यपुस्तकों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया. इसके साथ ही राज्य में संचालित विभिन्न केंद्रीय शिक्षा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गयी. दोनों मंत्रियों ने विद्यालयों में छात्रों के ड्रॉपआउट दर को कम करने, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और सुलभ शिक्षा सुनिश्चित करने तथा शैक्षणिक परिणामों में सुधार के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया. केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वर्ष 2036 तक ओडिशा को एक भविष्य-तैयार और समृद्ध ओडिशा के रूप में विकसित करने के लिए शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखा गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

