Parenting Tips: हर माता-पिता की यही चाहत होती है कि उनके बच्चे को किसी भी चीज की कमी न हो और वह हमेशा खुश रहे. इसी सोच के चलते वे अपने बच्चे को हर छोटी-बड़ी चीज दिलाने लगते हैं और उसकी हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं. शुरुआत में यह लगता है कि बच्चा खुश है, लेकिन अक्सर हम यह नजरअंदाज कर देते हैं कि हमारी यही आदत उसके लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, बच्चे को खुश रखने के नाम पर कई बार हम ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो उसकी आदतों, जिम्मेदारी और असली खुशी को अनजाने में प्रभावित कर देती हैं. आज इस आर्टिकल में हम इन्हीं गलतियों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे.
हर चीज दिलाने की आदत
कई माता-पिता में यह आदत देखने को मिलती है कि वे अपने बच्चे की हर डिमांड पूरी कर देते हैं. चाहे वह कोई खिलौना हो या फिर खाने-पीने की चीजें पैरेंट्स बिना सोचे-समझे उन्हें हर एक चीज दिला देते हैं. शुरूआती दौर में पैरेंट्स की यह आदत अच्छी लगती है लेकिन आगे चलकर इस गलती की वजह से बच्चे में हर चीज को लेकर एक अलग जिद पैदा हो जाती है. इसकी वजह से आगे चलकर अगर उसे कोई चीज मांगने पर न मिले को वह गुस्सैल और चिड़चिड़ा होकर अपने पैरेंट्स से भी लड़ने लगता है.
बच्चे को हर समय बचाने की गलती
कई पैरेंट्स की यह सोच होती है कि अगर उनका बच्चा किसी भी परेशानी में फंस जाए तो तुरंत उसकी मदद करके उस हालात से निकालना जरूरी है. एक्सपर्ट्स कहते हैं यह आपकी एक काफी गलत सोच है. आपकी इस गलती की वजह से बच्चा मुसीबतों का सामना करना सीख नहीं पाता है. छोटी-छोटी परेशानियां ही आपके बच्चे को मजबूत बनाते हैं और साथ ही उसे जिम्मेदार और आत्मनिर्भर भी बनाते हैं.
डिसिप्लिन में कमी
ऐसा देखने को अक्सर मिलता है कि बच्चों को खुश करने के लिए पैरेंट्स कई बार नियमों में उन्हें ढील दे देते हैं. चाहे बात पढ़ाई-लिखाई की हो या फिर खाने-पीने और सोने के समय को लेकर, घर पर हर चीज को करने के तौर-तरीके और नियम बने हुए होते हैं. यह एक मुख्य कारण है कि अगर आपका बच्चा डिसिप्लिन में नहीं रहता है तो वह जीवन में आगे चलकर कभी भी तरक्की नहीं कर पाता है.
असली खुशी की जगह टेम्पररी खुशी देना
जब बच्चे दुखी होते हैं तो पैरेंट्स अक्सर उन्हें तुरंत खुश करने के लिए चॉकलेट, मिठाई या फिर उनकी पसंद की दूसरी चीजें दिला देते हैं. यह उन्हें टेम्पररी खुशी जरूर देते हैं लेकिन सैटिस्फेक्शन नहीं. आपकी इस गलती की वजह से बच्चे के दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि जीवन में खुश रहने के लिए उसे सिर्फ बाहरी चीजों की ही जरूरत है.

