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राउरकेला सरकारी अस्पताल के विकास को 860 करोड़ रुपये स्वीकृत, जगह की कमी बनी बाधक

Updated at : 13 Jul 2024 11:22 PM (IST)
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राउरकेला सरकारी अस्पताल के विकास को 860 करोड़ रुपये स्वीकृत, जगह की कमी बनी बाधक

राउरकेला सरकारी अस्पताल में बेड संख्या 400 से बढ़ाकर 800 करने की योजना बनायी गयी है. इसके लिए 860 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये हैं. लेकिन जगह की कमी बाधक बन रही है.

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राउरकेला. राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) के विकास कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में 660 करोड़ रुपये मंजूर किये हैं. दूसरे चरण में 300 करोड़ और आयेंगे. यह विकास कार्य ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ओबीएंडसीसी) करेगा. इसके तहत यहां पर ग्राउंड फ्लोर सहित छह मंजिला भवन के निर्माण की योजना तैयार की गयी है. नए भवन में कैजुअल्टी, पैथोलॉजी, प्रसूति, सर्जरी समेत सभी आवश्यक सुविधाएं होंगी. इसके अलावा आरजीएच में कार्यरत कर्मचारियों के लिए क्वार्टर, पार्किंग और अन्य विकास कार्य होंगे. इस प्रकार आरजीएच में बेड की संख्या 400 से बढ़ाकर 800 बेड करने की योजना है. लेकिन फंड स्वीकृत किये हुए पांच महीने बीत गये. लेकिन आज तक एक भी ईंट नहीं गिरी. ,सूबे की सरकार बदलने के बाद आरजीएच के क्षेत्र में यह विकास कार्य कहां होंगे? इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं. क्योंकि अभी तक जगह की पहचान नहीं हो पायी है.

हाई-टेक मेडिकल कॉलेज की खाली जमीन के इस्तेमाल की मांग

बीजद सरकार के शासन में राउरकेला के लोगों के हितों के खिलाफ आरजीएच साइट को कौड़ियों की कीमत पर हाइटेक मेडिकल कॉलेज को दे दिया गया है. जिससे कुल 860 करोड़ रुपये की लागत से होनेवाले इस विकास कार्य के लिए जितनी जगह की जरूरत है, वह आरजीएच परिसर में उपलब्ध नहीं है. एमसीएच हॉस्पिटल के सामने खाली पड़ी जमीन पर 6 मंजिला बिल्डिंग बनने से आरजीएच की पूरी जगह भर जायेगी. जिससे आने वाले दिनों में कोई और प्रोजेक्ट नहीं किया जा सकता. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नयी सरकार हाईटेक को मिली खाली जगह को आरजीएच में मिला देती है तो काफी विकास कार्य हो सकते हैं. अन्यथा यह आरजीएच के रूप में सदैव उपेक्षित पड़ा रहेगा. जिससे पहले चरण में 660 करोड़ रुपये विकास के लिए होंगे या नहीं अथवा प्रस्ताव जस का तस रहेगा, इसे लेकर लोगों में संशय है.

सुंदरगढ़ समेत झारखंड के मरीज आरजीएच पर निर्भर

राउरकेला सरकारी अस्पताल पर शहर ही नहीं, सुंदरगढ़ जिले के लगभग सभी ब्लॉक व पड़ोसी झारखंड के मरीज निर्भर हैं. जिला खनिज निधि, एनएचएम और अन्य निधियों से सीटी स्कैन, डायलिसिस सुविधाएं, केंद्रीय पैथोलॉजी, रक्त पृथक्करण इकाइयां प्रदान की गयी हैं. डीएमएफ फंड से डॉक्टरों, नर्सों और परिचारकों की भर्ती की गयी है. इसके अलावा अस्पताल प्रबंधक की ओर से आउटसोर्सिंग फर्मों के माध्यम से नियुक्त कुछ कर्मचारी और आरजीएच के कुछ भ्रष्ट अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के धन को लूट रहे हैं. जिनकी जांच हो चुकी है, सिर्फ कार्रवाई बाकी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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