Sambalpur News: संबलपुर के पुरुनागढ़ में प्राचीन शहरी बस्ती और लौह उद्योग के मिले अवशेष

Published by : BIPIN KUMAR YADAV Updated At : 25 May 2026 11:44 PM

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Sambalpur News: संबलपुर के पुरुनागढ़ में प्रागैतिहासिक काल से लेकर प्रारंभिक मध्ययुगीन काल तक मानव बस्ती के प्रमाण मिले हैं.

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Sambalpur News: संबलपुर जिले के पुरुनागढ़ में हुए एक बड़े पुरातात्विक उत्खनन से प्रागैतिहासिक काल से लेकर प्रारंभिक मध्ययुगीन काल तक मानव बस्ती के निर्बाध प्रमाण मिले हैं. यह स्थान संबलपुर के रेढ़ाखोल उपखंड में महानदी की सहायक नदी केरांडी नदी के तट पर स्थित है.

जीएमयू के इतिहास विभाग ने शुरू की है परियोजना

जानकारी के अनुसार, गंगाधर मेहर विश्वविद्यालय (जीएमयू) के इतिहास विभाग की ओर से शुरू की गयी इस परियोजना में एक समृद्ध प्रारंभिक सभ्यता और पारंपरिक धातु विज्ञान प्रथाओं से घनिष्ठ रूप से जुड़े एक प्राचीन शहरी केंद्र के साक्ष्य सामने आये हैं. 10 मई को उत्खनन निदेशक और जीएमयू इतिहास विभाग के प्रमुख अतुल कुमार प्रधान के नेतृत्व में शुरू हुए इस उत्खनन का प्राथमिक उद्देश्य लंबे समय से अनछुए रेढ़ाखोल क्षेत्र के सांस्कृतिक अनुक्रम को स्थापित करना है. शोधकर्ता इस क्षेत्र के पारंपरिक धातु विज्ञान संबंधी ज्ञान का अध्ययन करने, क्षेत्रीय शहरीकरण की उत्पत्ति का पता लगाने और हाल ही में खोजे गये एक विशाल औद्योगिक परिसर की खोज करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. इसमें बिखरे हुए हजारों लौह धातु के टुकड़ों से एक बड़े पैमाने पर लौह उत्पादन उद्योग का संकेत मिलता है. मिट्टी के भट्टे और जमीन में दबे हुए सिरेमिक बर्तन संगठित बस्ती और विशेष शिल्पकलाओं की ओर इशारा करते हैं. प्रागैतिहासिक पत्थर के औजार, ताम्र-पाषाणकालीन पत्थर की कुल्हाड़ियां, मनके, मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, पीसने वाले पत्थर, पत्थर की कुल्हाड़ी और धार तेज करने वाले पत्थरों की खुदाई निरंतर ऐतिहासिक गतिविधि की पुष्टि करती है.

पश्चिम ओडिशा का इतिहास समझने के खुलेंगे रास्ते : कुलपति

जीएमयू के कुलपति प्रोफेसर व्योमकेश त्रिपाठी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण खोजें पश्चिमी ओडिशा के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने के लिए नये रास्ते खोलती हैं. पुरातत्वविदों के अनुसार, ये खोजें ऊपरी और मध्य महानदी घाटी क्षेत्र के खोये हुए इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी. यह क्षेत्र अपने समृद्ध पुरातात्विक अवशेषों के लिए व्यापक रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें शैल कला से लेकर प्राचीन मंदिर वास्तुकला तक शामिल हैं.

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