Bhubaneswar News: ओडिशा में दो वर्षों में 558 वर्ग किमी बढ़ा वन एवं वृक्ष आवरण : मोहन माझी

पौधरोपण करते मुख्यमंत्री मोहन माझी. | Prabhat Khabar Network
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी ने बताया कि राज्य में पिछले दो वर्षों में 558 वर्ग किमी वन एवं वृक्ष आवरण बढ़ा है। राज्य हरित क्षेत्र बढ़ाने में तीसरे स्थान पर है।
Bhubaneswar News: वैश्विक जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ती भीषण गर्मी की चुनौती से निपटने के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण ही सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान है. विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक हैं. इसी सोच के साथ ओडिशा सरकार वन संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य ने पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है. कपिलेश्वर में आयोजित 77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने यह बातें कही. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में ओडिशा में 558 वर्ग किलोमीटर वन एवं वृक्ष आवरण की वृद्धि दर्ज की गयी है. इसी उपलब्धि के आधार पर ओडिशा देश में वन एवं हरित क्षेत्र बढ़ाने के मामले में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है.
नदियों के दोनों किनारों पर विकसित की जा रही 1.5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रमुख नदियों को वर्षभर प्रवाहमान बनाये रखने के उद्देश्य से ‘सबुज महानदी मिशन’ के तहत महानदी, तेल, ईब, ब्राह्मणी, ऋषिकुल्या, वैतरणी और वंशधारा नदियों के दोनों किनारों पर 1.5 किलोमीटर चौड़ी हरित पट्टी विकसित की जा रही है. वर्ष 2025-26 में 774 हेक्टेयर क्षेत्र में 5.65 लाख पौधे लगाये गये, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 2,702 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग नौ लाख पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. उन्होंने बताया कि वर्धित हरित पट्टी योजना के अंतर्गत चालू वर्ष में 358 हेक्टेयर भूमि पर 15.93 लाख पौधे लगाये जायेंगे. वहीं, शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लगभग 6.95 लाख पौधे लगाने की योजना बनायी गयी है.
आमो जंगल योजना से 19975 हेक्टेयर में वन क्षेत्र किया गया पुनर्जीवितमुख्यमंत्री ने कहा कि आमो जंगल योजना के तहत 19,975 हेक्टेयर क्षतिग्रस्त वन क्षेत्र को पुनर्जीवित किया गया है. इसके साथ ही 43.18 लाख स्थानीय हितग्राहियों को 1,488.52 करोड़ रुपये की आजीविका आधारित योजनाओं से जोड़ा गया है. मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की अन्य महत्वपूर्ण पहलों की जानकारी देते हुए बताया कि कैंपा योजना के तहत आगामी वर्ष में 20,562 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर पौधरोपण किया जायेगा. जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी के सहयोग से संचालित ओडिशा फॉरेस्ट सेक्टर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट-2 के माध्यम से 1210 वन सुरक्षा समितियों को सशक्त किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ‘मिष्टी’ योजना के तहत 89 हेक्टेयर क्षेत्र में मैंग्रोव (हेंताल) वन विकसित किये जा रहे हैं.
आकाशीय बिजली से जनहानि कम करने को लगाये गये 17.90 लाख ताड़ के पौधे
मुख्यमंत्री मोहन माझी ने बताया कि आकाशीय बिजली से होने वाली जनहानि को कम करने के उद्देश्य से पिछले वित्तीय वर्ष में 17.90 लाख ताड़ के पौधे लगाये गये. कहा कि एक जुलाई 2026 से केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से विकसित भारत-रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू किया गया है. यह योजना पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित करेगी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि ओडिशा के लोगों ने इसे जन आंदोलन का रूप दे दिया है. पिछले वर्ष प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर राज्य में एक ही दिन में एक करोड़ 49 लाख पौधे लगाये गये थे. इसके अलावा ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल पर अब तक 8 करोड़ 12 लाख पौधारोपण का विवरण अपलोड किया जा चुका है. चालू वर्ष के लिए केंद्र सरकार ने ओडिशा को 3 करोड़ 76 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया है.
अनुगूल और मयूरभंज की समितियों को मिला राज्यस्तरीय मुख्यमंत्री पुरस्कारकार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेशराम सिंह खुंटिया ने कहा कि वन संरक्षण और वनीकरण को सफल बनाने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि केवल सरकारी योजनाओं के बल पर वन संरक्षण संभव नहीं है. इसके लिए गांवों से लेकर शहरों तक प्रत्येक नागरिक और सामाजिक संगठनों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी. समारोह के दौरान वन संरक्षण एवं वनीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए अनुगूल की जेरेंग बुधीपाहाड़ वन सुरक्षा समिति तथा मयूरभंज की गुड़गुड़िया पर्यावरण विकास समिति (इडीसी) को राज्य स्तरीय मुख्यमंत्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया. दोनों समितियों को दो-दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गयी. इस अवसर पर एकाम्र-भुवनेश्वर के विधायक बाबू सिंह, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ के मुरुगेशन सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.
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