राउरकेला स्टेशन के मुख्य द्वार की शेड टूटी, सेकेंड इंट्री गेट हुआ लबालब, शेड के नीचे दबने से तीन घायल
गिरा शेड व क्षतिग्रस्त कार.
राउरकेला रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने रेलवे के दावों की पोल खोल दी. मुख्य प्रवेश द्वार की करोड़ों की लागत से बनी शेड गिर गई, जिससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई. वहीं, सेकेंड इंट्री गेट पानी से लबालब भर गया.
राउरकेला : राउरकेला स्टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किये जाने के रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से किये जाने वाले दावे की पोल सोमवार सुबह करीब एक घंटे की बारिश में ही खुल गयी. सुबह 8:00 से 9:00 बजे के बीच हुई झमाझम बारिश में जहां मुख्य प्रवेश द्वार की शेड गिर गयी, वहीं सेकेंड इंट्री गेट का पूरा क्षेत्र पानी से लबालब भर गया.
एक करोड़ से निर्मित शेड नहीं झेल पाया पहली बारिश
राउरकेला रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर यात्रियों को धूप व बारिश से बचाने के लिए एक करोड़ की लागत से बनाया गया शेड सोमवार सुबह करीब 9:00 बजे अचानक भरभराकर ढह गया. शेड के अचानक गिरने से वहां मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गयी. लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे. इस हादसे में एक महिला गंभीर रूप से घायल हुई है. वहीं, दो अन्य लोगों को चोटें आयी हैं. घायलों को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. वहीं, शेड के मलबे के नीचे दबने से एक कार व ऑटो रिक्शा क्षतिग्रस्त हो गये हैं. इससे लाखों रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

जीएम, सीआरएस व डीआरएम ने निरीक्षण कर गुणवत्ता का ध्यान रखने का दिया था निर्देश
राउरकेला रेलवे स्टेशन में शेड निर्माण के दौरान दक्षिण पूर्व रेलवे के जीएम, सीआरएम और चक्रधरपुर डीआरएम ने नियमित अंतराल पर दौरा कर कार्यों की गुणवत्ता का निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान हर बार मातहत अधिकारियों से लेकर ठेकेदार को काम की गुणवत्ता का ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिये जाते रहे. लेकिन निर्माण के कुछ महीने में ही इस शेड के टूटकर गिर जाने से निर्माणकार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बनाये गये इस ढांचे का इतनी कम अवधि में गिर जाना रेलवे के निर्माण कार्य और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवालिया निशान खड़ा करता है.
उच्चस्तरीय जांच की हो रही मांग
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास बनाये गये इस शेड को लेकर पहले भी समस्या सामने आ चुकी थी. 27 मई 2026 को शेड के ऊपर लगी तिरपाल तेज हवा में उड़ गयी थी. इसके बावजूद निर्माण और संरचना की मजबूती को लेकर पर्याप्त सतर्कता बरती गयी या नहीं, यह जांच का विषय है. शेड गिरने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है. निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन, ढांचे की मजबूती और निर्माण कार्य की निगरानी जैसे पहलुओं की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी. यात्री सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर बनाये गये शेड की निर्माण कार्य की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है.
घुटने तक पानी में घुसकर स्टेशन पहुंचे यात्री
राउरकेला स्टेशन के सेकेंड इंट्री गेट में घुटनों तक पानी जमा हो जाने से यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा. यहां इतना फुट ओवरब्रिज की सीढ़ियों तक पानी भर गया. एक घंटे की मूसलाधार बारिश ने स्टेशन की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. बाइक स्टैंड में भी घुटने से ज्यादा पानी भर गया, जिससे दर्जनों बाइक और अन्य वाहन पानी में डूबे रहे. इस गेट पर मुख्य सड़क से स्टेशन में प्रवेश करने वाले यात्रियों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा. कई यात्री सामान लेकर फिसलते हुए गिरते-बचते स्टेशन तक पहुंचे. बुजुर्ग और महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कतें हुईं. वाहन मालिक अपने वाहनों को निकालने के लिए घंटों मशक्कत करते रहे. कई बाइकों में पानी भर जाने से उनके स्टार्ट न होने की शिकायत भी सामने आयी है. इसके अलावा इस गेट के पास स्थित इंदिरानगर बस्ती भी पानी में डूब गयी थी. स्थानीय बस्तीवासियों के प्रयास से करीब डेढ़ घंटे बाद यहां से पानी की निकासी हो सकी.
निर्माण एजेंसी को किया गया है टर्मिनेट
चक्रधरपुर रेल मंडल के सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि राउरकेला रेलवे स्टेशन पर बनी टेन्साइल रूफिंग के क्षतिग्रस्त होने के मामले में दक्षिण पूर्वी रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. रेलवे ने एजेंसी से पूरी संरचना की लागत वसूलने के साथ-साथ सुरक्षा जमा और परफॉर्मेंस गारंटी भी जब्त कर ली है. राउरकेला स्टेशन पर बनी टेन्साइल रूफिंग में आरसीसी नींव, स्टील का ढांचा और फैब्रिक युक्त कपड़े की छत शामिल है. यह काम अक्तूबर 2025 में पूरा हुआ और इसके लिए सात साल की गारंटी दी गयी थी. लेकिन 27 मई, 2026 को तेज हवाओं के कारण छत का लगभग आधा कपड़ा फट गया. गनीमत रही कि स्टील का ढांचा सुरक्षित रहा, लेकिन रेलवे ने इसे सामग्री, कारीगरी और निर्माण में खामी माना. घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने एजेंसी को औपचारिक नोटिस भेजा. उसमें कहा गया कि एक महीने के अंदर क्षतिग्रस्त छत की मरम्मत की जाये और आइआइटी द्वारा प्रमाणित डिजाइन जमा किया जाये. लेकिन पर्याप्त समय दिये जाने के बाद भी एजेंसी ने छत की मरम्मत नहीं की. साथ ही निर्धारित शर्तों का पालन भी नहीं किया. एजेंसी के संविदात्मक दायित्वों को पूरा न करने पर रेलवे ने कड़ी कार्रवाई की है. इसके तहत एजेंसी से पूरी संरचना की लागत की वसूली की जायेगी. सीनियर डीसीएम ने कहा कि बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, सुरक्षा और संविदात्मक शर्तों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है. मानकों पर खरा न उतरने वाली एजेंसियों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई आगे भी की जायेगी. वहीं सेकेंड इंट्री गेट में जलजमाव के बारे में कहा कि बारिश कम होते ही जमा पानी तत्काल निकाल दिया गया.
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लेखक के बारे में
By जगन्नाथ महतो
जगन्नाथ महतो को पत्रकारिता का 25 सालों का अनुभव है. वे वर्ष 2001 से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने संबलपुर विश्वविद्यालय से स्नातक किया है. राजनीति और खेल की रिपोर्टिंग में इनकी विशेषज्ञता है. डिजिटल जर्नलिज्म का छह साल का अनुभव है.
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