Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं, पांच माह में 200 मरीज बर्ला रेफर

Published by :BIPIN KUMAR YADAV
Published at :17 Apr 2026 12:09 AM (IST)
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Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं, पांच माह में 200 मरीज बर्ला रेफर

Rourkela News: राउरकेला सरकारी अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मरीजों को बुर्ला मेडिकल कॉलेज व अस्पताल रेफर करना पड़ता है.

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Rourkela News: देश भर में हृदय रोग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और युवा भी इसकी चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं. राउरकेला भी इससे अछूता नहीं है. फिर भी राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) में मरीजों के इलाज के लिए एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है. अस्पताल में आज तक हृदय रोग विभाग भी नहीं खुल पाया है. सत्ता हासिल करने से पूर्व भाजपा इस अस्पताल में चिकित्सा सेवा की कमी काे लेकर लगातार तत्कालीन बीजद सरकार पर हमलावर रही थी. लेकिन सूबे में भाजपा की डबल इंजन सरकार बनने के करीब दो साल के बाद भी इस अस्पताल की दुर्दशा में कोई सुधार नहीं हुआ है.

रोजाना अस्पताल पहुंचते हैं 50 से अधिक मरीज

राउरकेला सरकारी अस्पताल (आरजीएच) में प्रतिदिन 50 से अधिक हृदय रोगी इलाज के लिए आते हैं. यहां चिकित्सा विशेषज्ञ ही उनका इलाज कर रहे हैं. यह अस्पताल राउरकेला के साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों के हजारों मरीजों की एकमात्र उम्मीद है, लेकिन अस्पताल की पूरी तरह से उपेक्षा हो रही है. इस साल अब तक कुल 216 हृदय रोगी आरजीएच पहुंच चुके हैं. जनवरी में 66, फरवरी में 26, मार्च में 71 और 15 अप्रैल तक 53 मरीज अस्पताल पहुंचे. अस्पताल में इलाज के साथ दवाइयां, प्रोबोलाइसिस और इसीजी की व्यवस्था है. स्थिति गंभीर होने पर मरीज को बुर्ला भेजा जाता है या निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीज के बुर्ला पहुंचने से पहले ही जान जाने का खतरा रहता है. पिछले पांच महीने में 200 से अधिक हृदय रोगियों को बुर्ला रेफर किया गया है.

40 से कम आयु के लोगों में दिल का दौरा पड़ने के मामले बढ़े

पहले हृदय रोग को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा भी ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. 40 साल से कम उम्र के लोगों में दिल का दौरा पड़ने के मामले वैश्विक स्तर पर 6-10 प्रतिशत हैं और भारत में यह आंकड़ा विश्व औसत से भी अधिक है. विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक तनाव, चिंता और अवसाद से कोर्टिसोल बढ़ता है, जिससे रक्तचाप बढ़ता है और हृदय को नुकसान पहुंचता है. अत्यधिक शराब का सेवन भी दिल के दौरे का जोखिम बढ़ाता है.

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