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Bhubaneswar News: भाई और बहन के साथ मौसीबाड़ी पहुंचे भगवान जगन्नाथ

Updated at : 29 Jun 2025 12:15 AM (IST)
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Bhubaneswar News:  भाई और बहन के साथ मौसीबाड़ी पहुंचे भगवान जगन्नाथ

Bhubaneswar News: पुरी में विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा भगवान बलभद्र का रथ फंस जाने से रात में रोकनी पड़ी थी. शनिवार को प्रभु मौसीबाड़ी पहुंचे.

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Bhubaneswar News: पुरी में रथ यात्रा शुरू होने के एक दिन बाद शनिवार को भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ अपने गंतव्य गुंडिचा मंदिर पहुंच गये. गुंडिचा मंदिर को देवताओं की ‘मौसी’ का घर माना जाता है, जो हर साल जगन्नाथ मंदिर से निकलकर अपनी ‘मौसी’ के घर जाते हैं. गुंडिचा मंदिर 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से 2.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. देवता नौ दिन बाद मुख्य मंदिर चले जाएंगे. वापसी की रथ यात्रा को ‘बहुदा यात्रा’ कहा जाता है, जो इस साल पांच जुलाई को होगी.

जय जगन्नाथ के जयकारों के बीच शुरू हुई रथों को खींचने की प्रक्रिया

इससे पहले दिन में ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने शनिवार सुबह लगभग 10 बजे तीनों रथों को फिर से खींचना शुरू किया. पुरी में 27 जून की रात रथयात्रा रोक दी गयी थी. रथों को शुक्रवार शाम तक गुंडिचा मंदिर पहुंचना था, लेकिन भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ के एक मोड़ पर फंस जाने के कारण श्रद्धालुओं को ग्रैंड रोड पर रुकना पड़ा, जिससे अन्य दो रथ भी आगे नहीं बढ़ सके. परंपरा के अनुसार, सबसे आगे ‘तालध्वज’ रहता है, उसके बाद देवी सुभद्रा का रथ ‘दर्पदलन’ और भगवान जगन्नाथ का रथ ‘नंदीघोष’ रहता है.

विधि मंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी ने खींचा रथ

विधि मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन, मुख्य सचिव मनोज आहूजा, पुलिस महानिदेशक वाइबी खुरानिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भगवान जगन्नाथ के ‘नंदीघोष’ रथ को खींचते दिखे. रथों के अपने गंतव्य पहुंचने पर इन्हें गुंडिचा मंदिर के बाहर रखा गया. औपचारिक शोभायात्रा के बाद देवताओं को रविवार को मंदिर के अंदर ले जाया जाएगा.

यात्रा में 600 से अधिक श्रद्धालु बीमार, 200 से अधिक हुए बेहोश

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने कहा कि हम रथ यात्रा के संचालन के लिए श्रद्धालुओं समेत सभी हितधारकों को धन्यवाद देते हैं. इस बीच, डीजीपी वाइबी खुरानिया ने कहा कि रथों की सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी प्रबंध किये गये हैं. शनिवार को रथ यात्रा के दौरान बीमार पड़े 600 से अधिक श्रद्धालुओं का पुरी के विभिन्न अस्पतालों में इलाज किया गया. कई लोग धक्का-मुक्की के कारण घायल हो गये, जबकि 200 से अधिक लोग गर्मी और उमस भरे मौसम के कारण बेहोश हो गये. अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को वार्षिक रथ यात्रा में लगभग 10 लाख श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया था और लगभग पांच लाख श्रद्धालु शनिवार को पुरी में मौजूद थे. उन्होंने बताया कि शनिवार को हल्की बारिश हुई.

अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों को क्षमा करें ईश्वर : नवीन

भुवनेश्वर. ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने इस वर्ष पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के आयोजन में हुई “भयानक अव्यवस्था ” पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने शनिवार को प्रार्थना करते हुए कहा कि ईश्वर उन लोगों को क्षमा करें, जो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. पांच बार ओडिशा के मुख्यमंत्री रह चुके और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि राज्य के सबसे पवित्र आयोजन के दौरान जो कुछ भी घटित हुआ, उस पर चिंता और दुख व्यक्त किए बिना रह पाना असंभव है. मुंबई के एक अस्पताल में सर्जरी के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे पटनायक ने शनिवार को ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, हम यहां कल नंदीघोष (भगवान जगन्नाथ) के रथ को खींचने में हुई अत्यधिक देरी के लिए प्रशासन पर उंगली उठाने या उसे दोष देने के लिए नहीं हैं. लेकिन हमारे राज्य में सबसे पवित्र आयोजन के दौरान जिस तरह से चीजें घटित हुईं, उस पर अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त किए बिना रहना असंभव है.

लाखों श्रद्धालुओं को हुई निराशा व हताशा

पटनायक ने यह भी कहा कि यह भूलना कठिन है कि पिछले वर्ष भगवान बलभद्र की मूर्ति ””अडपा बिजे पहंडी”” (श्री गुंडिचा मंदिर के रास्ते पर जुलूस) के दौरान फिसल गयी थी, जिसने असंख्य श्रद्धालुओं को झकझोर दिया था. उन्होंने लंबे सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, और अब इस वर्ष, हमने देखा कि नंदीघोष रथ (भगवान जगन्नाथ का रथ) शाम 7:45 बजे तक सिंहद्वार (12वीं शताब्दी के मंदिर का मुख्य द्वार) पर ही खड़ा रहा और दिन समाप्त होने से ठीक पहले केवल कुछ मीटर ही आगे बढ़ पाया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसने स्वाभाविक रूप से उन लाखों श्रद्धालुओं को, जो इस अद्वितीय आयोजन को देखने के लिए दुनिया भर से आए थे, पूरी तरह से निराश और हताश किया है. पटनायक ने उल्लेख किया कि भीड़ प्रबंधन की खराब व्यवस्था के कारण सैकड़ों श्रद्धालु घायल हो गये. उन्होंने लिखा, हम केवल प्रार्थना कर सकते हैं कि महाप्रभु जगन्नाथ इस दिव्य पर्व पर हुई इस गंभीर अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को क्षमा करें. उम्मीद है कि इस सिलसिले में सरकार के सभी लोग गहराई से आत्ममंथन करेंगे. रथों को शुक्रवार की शाम तक गुंडिचा मंदिर (जिसे देवी-देवताओं का मौसीघर माना जाता है) पहुंचना था, लेकिन ग्रैंड रोड पर उन्हें रोकना पड़ा, क्योंकि भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ मोड़ लेते समय फंस गया, जिससे बाकी दो रथ आगे नहीं बढ़ सके.

सभी अनुष्ठान तय समयानुसार संपन्न कर लिये गये थे : कानून मंत्री

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को कहा कि इस बार अनुकूल मौसम के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य से डेढ़ गुना अधिक रही. उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु विशेष रूप से भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने के लिए आए थे, उन्हें यह अवसर अब कल मिलेगा. उन्होंने बताया कि शुक्रवार रात आठ बजे रथ खींचने की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया था, हालांकि सभी अनुष्ठान तय समयानुसार संपन्न कर लिए गए थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIPIN KUMAR YADAV

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BIPIN KUMAR YADAV is a contributor at Prabhat Khabar.

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