Rourkela News: आइजीएच के डॉक्टरों ने अंडरवेट नवजात की न्यूरोसर्जरी कर बचायी जान

Rourkela News: आइजीएच की नियोनेटल आइसीयू टीम ने एक नवजात की न्यूरोसर्जरी कर मील का पत्थर हासिल किया है.
Rourkela News: राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) के इस्पात जनरल अस्पताल (आइजीएच) की नियोनेटल आइसीयू टीम ने इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा सफलता के तौर पर सिर्फ 2.5 किलोग्राम वजन वाले दो दिन के नवजात शिशु का सफलतापूर्वक जान बचाने वाला ऑपरेशन किया है. यह जटिल नियोनेटल न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया आइजीएच और राउरकेला में अपनी तरह की पहली प्रक्रिया थी.
हाइड्रोसेफलस व मेनिंगोमायलोसेल के कारण अंगों में आ गयी थी कमजोरी
सुचित्रा सिंद्रिया की बेटी का जन्म आइजीएच में सीजेरियन सेक्शन द्वारा हुआ था. जन्म के तुरंत बाद, नवजात शिशु में दो गंभीर जन्मजात विकृतियों हाइड्रोसेफलस (मस्तिष्क में सेरेब्रोस्पाइनल द्रव का अत्यधिक जमाव) और मेनिंगोमायलोसेल (रीढ़ की नसों को प्रभावित करने वाला पीठ पर थैलीनुमा उभार) का पता चला, जिसके कारण दोनों निचले अंगों में कमजोरी आ गयी थी. कम जन्म वजन, असामान्य रूप से बढ़े हुए सिर और पीठ पर खुले घाव के कारण शिशु की हालत गंभीर थी. नवजात को तुरंत नियोनेटल आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया और मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ जेके आचार्य की देखरेख में अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (बाल रोग विशेषज्ञ) डॉ अर्चना बेहेरा और उनकी समर्पित मेडिकल टीम के साथ उसका इलाज किया गया.
सर्जरी के बाद शिशु में ठीक होने के उत्साहजनक संकेत दिखे
हाइड्रोसेफलस की जानलेवा स्थिति और शिशु की नाजुक अवस्था को देखते हुए, चिकित्सा दल ने माता-पिता से सहमति प्राप्त करने के बाद हाइड्रोसेफलस के लिए आपातकालीन सर्जरी की योजना बनायी. मेनिंगोमायलोसेल के लिए सुधारात्मक सर्जरी शिशु के पर्याप्त वजन और शारीरिक शक्ति प्राप्त करने के बाद के चरण के लिए निर्धारित की गयी थी. यह गंभीर न्यूरोसर्जिकल प्रक्रिया वरिष्ठ सलाहकार (न्यूरोसर्जन) डॉ मनोज कुमार देव द्वारा सफलतापूर्वक की गयी, जिसमें अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एनेस्थीसिया) डॉ संजुक्ता पाणिग्रही ने एनेस्थीसिया में सहायता प्रदान की. सर्जरी के बाद, शिशु में ठीक होने के उत्साहजनक संकेत दिखे और उसके सिर का आकार धीरे-धीरे सामान्य होने लगा. आइजीएच की उन्नत स्वास्थ्य सेवा क्षमताएं और उसके डॉक्टरों तथा मेडिकल स्टाफ का समर्पण सबसे गंभीर नवजात मामलों के सफल इलाज में सहायक सिद्ध हुआ.
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