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झारसुगुड़ा को डबल इंजन की सरकार में नया सब डिवीजन मिलने की बढ़ी उम्मीदें

Updated at : 14 Jun 2024 10:58 PM (IST)
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झारसुगुड़ा को डबल इंजन की सरकार में नया सब डिवीजन मिलने की बढ़ी उम्मीदें

ओडिशा में डबल इंजन की सरकार ने पदभार संभाल लिया है. केंद्र और राज्य दोनों ही जगह भाजपा सत्ता में है. ऐसे में लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गयी हैं.

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झारसुगुड़ा. ओडिशा में डबल इंजन की सरकार ने पदभार संभाल लिया है. केंद्र और राज्य दोनों ही जगह भाजपा सत्ता में है. ऐसे में लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गयी हैं. खासकर झारसुगुड़ा जिले के लोगों में अब लखनपुर ब्लॉक का विभाजन कर तथा लैयकरा को लेकर एक नया सब डिवीजन बनाने की उम्मीदें बढ़ी हैं. यहां के लोग पिछले एक दशक से नया सब-डिवीजन बनाने की मांग करते आ रहे हैं. अब उनका सपना पूरा होने की उम्मीद है. नये ब्लॉक गठन में केंद्र की बड़ी भूमिका रहती है. वहीं सब डिवीजन के गठन में राज्य सरकार की भूमिका रहती. मौजूदा केंद्र व राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार है. जिससे उक्त मुद्दे के समाधान में सकारात्मक भूमिका अदा करने की संभावना है. जिले के लैयकरा, किरमिरा व कोलाबीरा को मिलाकर एक नया सब डिवीजन बनाने की स्थानीय लोगों की मांग पर डबल इंजन सरकार विशेष ध्यान देगी, ऐसी आशा व्यक्त की गयी है. जिले के भौगोलिक क्षेत्र में आधा लखनपुर ब्लॉक में है. जिले में पांच ब्लॉक है, जिसमें कुल 78 पंचायतें हैं. वहीं लखनपुर ब्लॉक में अकेले 33 पंचायतें हैं. जिले में जिला परिषद की नौ सीटें हैं. जिसमें तीन लखनपुर ब्लॉक में हैं. यह ब्लॉक छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती केंडईकेला से लेकर कर पूर्व में तिलिया तक फैला है. दूर-दूर में फैल गांव के लोग तक प्रशासन पहुंच नहीं पाता है. वहीं पड़ोसी छत्तीसगढ़ से तुलना करते हुए इलाके के लोग खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं.

लोगों तक सीधे पहुंच सकेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

लखनपुर ब्लॉक क्षेत्र काफी बड़ा होने से लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर लखनपुर ब्लॉक को विभाजित कर दिया जाये, तो लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिल सकेगा. प्रशासनिक सुविधा के मद्देनजर लखनपुर ब्लॉक का विभाजन जरूरी है. जहां नये सब डिवीजन का गठन राज्य सरकार के अधीन आता है. वहीं ब्लॉक का पुनर्गठन केंद्र सरकार पर निर्भर है. अभी तक उक्त मुद्दे के समाधान के लिए राज्य व केंद्र सरकार पर दबाव बनाने में राजनैतिक नेतृत्व विफल रहा है. अब जब केंद्र व राज्य में डबल इंजन की सरकार है, तब अगर इसका समाधान नहीं हो पाया, तो आगामी दिनों में यह मुद्दा विरोधियों के हाथ में सरकार के विरुद्ध एक राजनैतिक अस्त्र बन सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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