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Jharsuguda News: शांति, सौहार्द्र, सद्भावना व भाईचारा ही झारसुगुड़ा की असली पहचान : सुरमा पाढ़ी

Updated at : 05 Jan 2025 12:20 AM (IST)
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Jharsuguda News: शांति, सौहार्द्र, सद्भावना व भाईचारा ही झारसुगुड़ा की असली पहचान : सुरमा पाढ़ी

Jharsuguda News: दुलदुली महोत्सव की दूसरी संध्या महिलाओं को रही समर्पित. विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी को सम्मानित किया गया.

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Jharsuguda News: रोजगार के लिए उद्योग व खदान से भरपूर जिला झारसुगुड़ा में हर दिन बाहर से लोगों का आगमन होता है. लोग यहां विभिन्न प्रकार का व्यापार करने व यहां रहने आते हैं, जो झारसुगुड़ा को मिनी इंडिया बनाता है. देश के विभिन्न प्रांतों से विभिन्न भाषा के लोगों का शांति, सौहार्द्र व सद्भावना से रहना झारसुगुड़ा में ही संभव हो रहा है. स्नेह व श्रद्धा से बाहरी लोगों को जिस प्रकार से यहां अपनाने के साथ भाईचारा स्थापित किया जाता है, वही झारसुगुड़ा की असली पहचान व परिचय है. ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने झारसुगुड़ा जिला महोत्सव दुलदुली की दूसरी संध्या पर बतौर मुख्य अतिथि यह बातें कहीं. दुलदुली 2025 की दूसरी संध्या का कार्यक्रम महिलाओं के लिए समर्पित था.

महिलाओं के विकास से ही देश की उन्नति संभव

श्रीमती पाढ़ी ने कहा कि झारसुगुडा के प्रति प्रकृति का अवदान एवं खनिज संपदा से समृद्ध यह अंचल केवल राज्य ही नहीं, देश के लिए भी बड़ा योगदान देता आ रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी बाजपेयी ने नारी सशक्तीकरण के लिए जो कदम उठाया था, उसे याद करते हुए उन्होंने कहा कि समाज में 50 प्रतिशत महिलाएं हैं और उनके विकास से ही देश व समाज की उन्नति संभव होगी. राज्य कि राजधानी भुवनेश्वर हैं, लेकिन झारसुगुड़ा राज्य की आर्थिक राजधानी की मान्यता हासिल कर चुका है. वहीं सांस्कृतिक वैभव व विकास के आधार पर झारसुगुड़ा जिला अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल रहा है. इस अवसर पर ब्रजराजनगर नगरपाल याज्ञसिनी ओराम एवं किरमिरा पंचायत समिति अध्यक्ष कृष्ण प्रिया साहू सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थीं. जिला संस्कृति परिषद की अध्यक्ष तथा जिलाधीश अबोली सुनील नरवाणे की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में संयुक्ता महापात्र ने कार्यक्रम का संचालन किया. जिला कर्म नियोजन अधिकारी संगीता मेहर ने अतिथि परिचय प्रदान किय. विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी को जिलाधीश ने शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दर्शक हुए मुग्ध

झारसुगुड़ा जिला महोत्सव दुलदुली 2025 की दूसरी शाम शुक्रवार को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही. दर्शकों ने जमकर इसका आनंद लिया. रंगारंग कार्यक्रमों में उपस्थित लोग भी थिरकते नजर आये. शुक्रवार शाम सबसे पहले नटराज डांस एकेडमी कटक की ओर से ओडिशी नृत्य, सुरभि कला परिषद झारसुगुड़ा की ओर से घुड़का, पुणे की अमीरा मैडम ने कथक, इंद्राकला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ मध्यप्रदेश की ओर से गरबा, गोटीपुउ डांस एकेडमी की ओर से गोटीपुउ, कौशल लोक कला एकेडमी बलांगीर की ओर से चुटकु चुका व सत्यम एकेडमी संबलपुर की ओर से रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया.

विश्वगुरु भारत का अतीत, वर्तमान और भविष्य विषय पर सेमिनार आयोजित

जिला महोत्सव दुलदुली के तीसरे दिन शनिवार को ‘विश्वगुरु भारत का अतीत, वर्तमान और भविष्य’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया. इसमें वक्ताओं ने कहा कि चाहे परिस्थिति और माहौल कैसा भी हो, हमें मानवता को नहीं भूलना चाहिए. भारत की गुरु-शिष्य परंपरा प्राचीन और महान है. भारत दुनिया को मानवता का संदेश देता है. भारत का अनुसरण करते हुए दक्षिण अफ्रीका अंग्रेजों से आजाद हुआ. पूरी दुनिया ने माना है कि बुद्ध की वाणी सर्वश्रेष्ठ है, उस समय में भारत विश्व गुरु था. इसे मजबूत करने के लिए हमें प्रगति करनी होगी. महिला महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ सरोज कुंवर की अध्यक्षता में आयोजित सेमिनार में संबलपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ गोपीनाथ, सामाजिक कार्यकर्ता लिंगराज महापात्र, प्रेमसागर डेहरिया, पत्रकार प्रशांत मोहंती, ऐ तो जीवन संस्थान की सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पांजलि पंडा ने मुख्य भाषण दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ मीना सोनी ने किया. जबकि अध्यापिका मंदाकिनी सतपथी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. राजश्री त्रिपाठी ने देशभक्ति संगीत गायन किया. इस चर्चा में चर्चा समिति के सदस्य विराट राजा पधान, प्रोफेसर नरेंद्र पांडा, टेहलू साहू, सुजाता महापात्र, बसंत जेना ने भाग लिया.

नृत्यशाला में 60 से अधिक नृत्यांगना ले रहीं प्रशिक्षण

झारसुगुड़ा जिला महोत्सव दुलदुली के अवसर पर स्थानीय एमसीएल ऑडिटोरियम में एक नृत्यशाला का आयोजन किया गया है, जो पांच जनवरी को संपन्न होगा. इसमें कथक, ओडिशी, शास्त्रीय एवं कथकली नृत्य का प्रशिक्षण पुणे से आये प्रख्यात प्रशिक्षक के द्वारा दिया जा रहा है. इसमें अवनी गदर, अमीरी पाटनकर शामिल हैं, जो कत्थक नृत्य पर प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं. इनके साथ स्थानीय नृत्य प्रशिक्षिका नर्मदा प्रधान भी शामिल हैं. प्रशिक्षण शिविर में जिलाधीश अबोली सुनील नरवाणे ने भी ऑडिटोरियम के मंच पर अन्य प्रशिक्षार्थियों के साथ नृत्य किया. इस प्रशिक्षण शिविर में 60 से अधिक नृत्यांगनाएं हिस्सा ले रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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