Maharashtra News: उद्धव ठाकरे आज भी होते मुख्यमंत्री, पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार ने ऐसा क्यों कहा
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 14 Oct 2022 6:43 AM
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने शिवसेना नहीं छोड़ी होती तो वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए होते. ठाकरे ने भुजबल के 75वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही.
महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार ने उद्धव ठाकरे को लेकर एक बड़ा बयान दे दिया है. उन्होंने एक बयान में कहा कि महाराष्ट्र संकट के दौरान उद्धव ठाकरे अगर छगन भुजबल की मदद ली होती, तो आज भी मुख्यमंत्री होते. पवार ने कहा, शिवसेना के 15 विधायकों के पार्टी से हटने पर उद्धव ठाकरे को छगन भुजबल (राकांपा नेता) की मदद लेनी चाहिए थी. उन्होंने कहा, अगर आपने उनसे संपर्क किया होता, तो आप महाराष्ट्र के सीएम होते.
2002 में संकट में घिरी विलासराव देशमुख की सरकार को भुजबल ने बचाया था
महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने राकांपा के गठन में भुजबल की भूमिका को याद किया और बताया कि कैसे उन्होंने 2002 में संकट में घिरी विलासराव देशमुख की सरकार को बचाने में अहम किरदार अदा किया था. पवार ने कहा, यदि उद्धव ठाकरे ने भुजबल की मदद ली होती, तो वह आज भी मुख्यमंत्री होते.
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Uddhav Thackeray should have sought the help of Chhagan Bhujbal (NCP leader) when Shiv Sena's 15 MLAs deflected from the party. He's the master of such scenarios. Had you contacted him, you could've still been the CM of Maharashtra: LoP and former Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar pic.twitter.com/7ADwfgKbZw
— ANI (@ANI) October 13, 2022
भुजबल शिवसेना न छोड़ते तो मुख्यमंत्री बन गए होते: उद्धव
इधर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने शिवसेना नहीं छोड़ी होती तो वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए होते. ठाकरे ने भुजबल के 75वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही. कार्यक्रम में शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के गठबंधन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के कई नेताओं ने शिरकत की.
मैं ऐसा व्यक्ति बन गया हूं, जिसे कोई झटका नहीं लगता : ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने कहा, अब मैं ऐसा व्यक्ति बन गया हूं, जिसे कोई झटका नहीं लगता. लेकिन जब भुजबल ने शिवसेना छोड़ी थी, तो मैं स्वीकार करता हूं कि हमारा परिवार स्तब्ध रह गया था. वह गुस्सा राजनीतिक था. हम लंबे समय तक इस बात को पचा नहीं पाए कि हमारे परिवार का एक सदस्य हमें छोड़कर चला गया है.
1990 में भुजबल ने शिवसेना छोड़कर थाम लिया था कांग्रेस का दामन
एक समय शिवसेना के तेजतर्रार नेता रहे भुजबल ने 1990 में बाल ठाकरे की पार्टी शिवसेना छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था. इसके बाद जब पवार ने राकांपा का गठन किया, तो वह उनके साथ चले गए.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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