Maratha Reservation: भूख हड़ताल पर बैठे मनोज जरांगे ने 3 मार्च को रास्ता रोको की घोषणा की, जानें है उनकी मांग
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 21 Feb 2024 11:04 PM
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने बुधवार को 'सेज सोयरे' अध्यादेश अधिसूचना को लागू करने की मांग को लेकर 3 मार्च को राज्यव्यापी 'रास्ता रोको' की घोषणा की है.
Maratha Reservation: शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय को एक अलग श्रेणी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक मंगलवार को महाराष्ट्र विधानमंडल में सर्वसम्मति से पारित हो गया. लेकिन इसके बावजूद मनोज जरांगे ने अपना भूख हड़ताल खत्म नहीं किया है. जरांगे मराठा समुदाय के लिए ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग पर अड़े हुए हैं. इधर जरांगे ने बड़ी घोषणा कर दी है.
Maratha Reservation: जरांगे ने 3 मार्च को राज्यव्यापी रास्ता रोको की घोषणा की
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल ने बुधवार को ‘सेज सोयरे’ अध्यादेश अधिसूचना को लागू करने की मांग को लेकर 3 मार्च को राज्यव्यापी ‘रास्ता रोको’ की घोषणा की है. मराठा आरक्षण की मांग पिछले साल अगस्त से ही जारी है. पिछले साल जरांगे ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी.
Maratha Reservation: मराठा विधेयक सदन में पारित होने के बाद नाखुश नजर आए जरांगे
ओबीसी श्रेणी के तहत समुदाय के लिए आरक्षण की अपनी मांग के समर्थन में जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में 10 फरवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ता जरांगे विधेयक के पारित होने से नाखुश दिखे. उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि महाराष्ट्र सरकार समुदाय को 10 प्रतिशत या 20 प्रतिशत आरक्षण देती है, आरक्षण ओबीसी श्रेणी के तहत होना चाहिए और अलग नहीं होना चाहिए. मराठा आरक्षण कार्यकर्ता जरांगे ने पत्रकारों से कहा, सरकार हमें वह दे रही है जो हम नहीं चाहते. हम अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में आरक्षण चाहते हैं, लेकिन वे इसके बजाय हमें एक अलग कोटा दे रहे हैं. उन्होंने कहा, ओबीसी श्रेणी के बाहर एक अलग आरक्षण कानूनी चुनौतियों का सामना कर सकता है, क्योंकि ऐसा करना आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकता है.
Maratha Reservation: मराठा आरक्षण में क्या है खास
मराठा आरक्षण विधेयक में कहा गया कि महाराष्ट्र की कुल आबादी में मराठों की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है. यह पिछले छह वर्षों में आंदोलनरत समुदाय को आरक्षण का लाभ प्रदान करने का दूसरा प्रयास है. विधेयक में कहा गया है कि मराठा वर्ग का पिछड़ापन पिछड़े वर्गों और विशेष रूप से ओबीसी से इस अर्थ में भिन्न और अलग है कि यह अपने प्रसार के मामले में अधिक व्यापक है, यह अपनी पैठ में भिन्न है और चरित्र में अधिक प्रतिगामी है. विधेयक में यह भी प्रस्ताव किया गया है कि एक बार आरक्षण लागू हो जाने पर 10 साल बाद इसकी समीक्षा की जा सकती है.
महाराष्ट्र में कुल 52 प्रतिशत आरक्षण में किस वर्ग को कितना
राज्य में मौजूदा 52 प्रतिशत आरक्षण में से, अनुसूचित जाति 13 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति 7 प्रतिशत, ओबीसी 19 प्रतिशत, विशेष पिछड़ा वर्ग 2 प्रतिशत, विमुक्त जाति 3 प्रतिशत, घुमंतू जनजाति (बी) 2.5 प्रतिशत, घुमंतू जनजाति (सी) धनगर 3.5 प्रतिशत और घुमंतू जनजाति (डी) वंजारी 2 प्रतिशत के लिए पात्र हैं.
किस राज्य में कितना आरक्षण
सदन में विधेयक पेश करने के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा था कि देश के 22 राज्य 50 प्रतिशत आरक्षण का आंकड़ा पार कर चुके हैं. उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए, तमिलनाडु राज्य में 69 प्रतिशत, हरियाणा में 67 प्रतिशत, राजस्थान में 64 प्रतिशत, बिहार में 69 प्रतिशत, गुजरात में 59 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 55 प्रतिशत आरक्षण है.
Also Read: Rreal NCP मामला: शरद पवार गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अजित पवार गुट को जारी किया नोटिस
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By ArbindKumar Mishra
अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










