Ladki Bahin Yojana : 71 लाख लाभार्थियों के खाते बंद? जानें महिलाओं को अब क्या करना होगा

Updated at : 06 Apr 2026 12:04 PM (IST)
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महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन’ योजना (File Photo)

Ladki Bahin Yojana : लाडकी बहिन योजना की 71 लाख लाभार्थियों को अयोग्य ठहराया गया. शिवसेना (यूबीटी) की ओर से यह दावा किया गया है. जानें सुषमा अंधारे ने क्या कहा.

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Ladki Bahin Yojana : शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे ने दावा किया है कि महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन’ योजना में महिलाओं को बड़ा झटका लगा है. उनके मुताबिक करीब 71 लाख महिलाओं को अब इस योजना के लिए अयोग्य करार दे दिया गया है. इस योजना में हर महीने 1,500 रुपये की मदद मिलती थी, जो अब बंद हो सकती है. अंधारे ने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे को साफ-साफ बताना चाहिए कि आखिर 71 लाख महिलाओं को इस योजना से अयोग्य क्यों किया गया? उन्होंने जवाब देने की मांग की.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जवाब देना चाहिए : अंधारे

अंधारे ने दावा किया कि 2024 के आखिर में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई इस योजना के तहत इन 71 लाख महिलाओं को करीब 255.60 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं. अब उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये महिलाएं अयोग्य थीं, तो राज्य के खजाने को हुए इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अदिति तटकरे को इस पर जवाब देना चाहिए.

यह भी पढ़ें : लाडकी बहिन योजना: 68 लाख महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे 1500 रुपये, जानें क्यों बंद हो गए खाते

उन्होंने पूछा कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला क्यों नहीं दर्ज किया जाना चाहिए? अंधारे ने आरोप लगाया कि मतदाताओं को लुभाने और चुनाव जीतने के लिए जनता के पैसे का इस्तेमाल किया गया.

एक्टिव अकाउंट की संख्या घटकर करीब 1.75 करोड़

महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों ने बुधवार (1 अप्रैल) को बताया कि लाडकी बहिन योजना में करीब 68 लाख खाते बंद कर दिए गए, क्योंकि लाभार्थी तय समय पर जरूरी ई-केवाईसी पूरा नहीं कर पाए. इसकी वजह से अब इस योजना के एक्टिव अकाउंट की संख्या घटकर करीब 1.75 करोड़ रह गई है.

ई-केवाईसी पूरा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल

ई-केवाईसी पूरा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च को समाप्त हो गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दिया गया है. अधिकारियों ने संकेत दिया है कि तारीख में बदलाव के बाद बंद खातों की संख्या में बदलाव हो सकता है.

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Amitabh Kumar

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By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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