झारखंड का आदिम जनजाति गांव, जहां पहली मैट्रिक पास बिरहोर बिटिया झोपड़ी से बिखेर रही शिक्षा की रोशनी

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बसंती बिरहोर गांव के बच्चों के साथ

Jharkhand Village: पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड की टेबो पंचायत के घने जंगलों में कांडयोंग की रहनेवाली बसंती बिरहोर अपने गांव में शिक्षा की रोशनी बिखेर रही है. खुद पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ गांव के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दे रही है. इसने कई बच्चों का स्कूल में नामांकन भी कराया. उसने कहा कि शिक्षा से ही बिरहोरों के जीवन में बदलाव आएगा.

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Jharkhand Village: चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम) रवि मोहंती-पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड की टेबो पंचायत के घने जंगलों में कांडयोंग गांव बसा है. इसमें विलुप्त हो रही जनजाति बिरहोर के 25 परिवार रहते हैं. प्रखंड मुख्यालय से गांव की दूरी अधिक है, इस कारण यहां के लोग सरकारी योजनाओं के लाभ से लगभग वंचित हैं. शिक्षा का भी यहां अभाव है. लोग वनोपज की वस्तुओं को बेचकर या थोड़ी बहुत खेती कर जीवनयापन करते हैं. सोमचांद बिरहोर की 19 वर्षीया बेटी बसंती बिरहोर ने वर्ष 2021 में जब प्रथम श्रेणी में मैट्रिक की परीक्षा पास की तो गांव में खुशियां मनायी गयी थीं क्योंकि गांव में मैट्रिक पास करने वाला बसंती पहली बच्ची थी. इसके बाद बसंती ने 2023 में इंटरमीडिएट परीक्षा भी प्रथम श्रेणी में पास की. बसंती ने मैट्रिक और इंटर की परीक्षा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय बंदगांव से दी थी. इंटर पास करने के बाद बसंती स्नातक की पढ़ाई (हिस्ट्री ऑनर्स) जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय में कर रही है. बसंती पढ़ाई के साथ-साथ वह गांव के बच्चों को भी शिक्षित कर रही है.

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नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाती है बसंती


बसंती बिरहोर अपनी पढ़ाई करने के साथ-साथ गांव के छोटे बच्चों को नि:शुल्क ट्यूशन पढ़ाती है. शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए राजी करने में परेशानी हुई. बच्चों के माता-पिता पढ़ने आने नहीं देना चाहते थे. बसंती के समझाने के बाद बच्चों के माता-पिता ने बसंती के पास अपने बच्चों को भेजा. करीब तीन माह तक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी. इसके बाद बसंती ने गरीब 9 बच्चों को गांव के समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय कंडाजुई में ले जाकर नामांकन कराया.

कई बच्चों का कराया स्कूल में नामांकन


बसंती बिरहोर ने राहुल बिरहोर, सोनू बिररहोर, सोमोल बिरहोर, दीपक बिरहोर, पूनम बिरहोर, सोनाली बिरहोर, प्रकाश बिरहोर, सुधीर बिरहोर, सुखराम बिरहोर को उम्र के अनुसार स्कूल में नामांकन कराया है. साथ ही साथ कॉलेज में क्लास खत्म करने के बाद शाम के वक्त वह सभी बच्चों को शिक्षित करने के लिए नि:शुल्क ट्यूशन अपने घर पर पढ़ाती है.

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पांच बहनों में सबसे बड़ी है बसंती


बसंती बिरहोर कांडेयोंग गांव में माता-पिता और पांच बहनों के साथ झोपड़ी नुमा घर में रहती है. बहनों में बसंती सबसे बड़ी है. बसंती से छोटी 17 वर्षीय चंपू बिरहोर कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय बंदगांव में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही है. जबकि 12 वर्षीय सुषमा बिरहोर कन्या आश्रम विद्यालय लुंबई में कक्षा 8, दस वर्षीय सुमित बिरहोर कक्षा 4 में पढ़ाई करती है. जबकि चार वर्षीय सुशीला बिरहोर आंगनबाड़ी जाती है. वहीं बसंती की माता पानी बिरहोर गृहिणी है.

सरकार से लगायी मदद की गुहार


बसंती बिरहोर शिक्षिका बन कर समाज उत्थान में योगदान देना चाहती है. वह चाहती है कि उसे सरकार सहयोग करे. उसका सपना है कि उसके गांव के सभी लोग शिक्षित हों. बसंती का मानना है कि शिक्षा से ही समाज में बदलाव व विकास होगा. शिक्षित लोग ही अपने हक के लिए संघर्ष कर सकते हैं.

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