शिक्षकों ने पढ़ाना छोड़ दिया, तो धीरे धीरे बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया

Updated at : 27 Apr 2017 5:42 AM (IST)
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शिक्षकों ने पढ़ाना छोड़ दिया, तो धीरे धीरे बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया

मनोहरपुर प्रखंड के बहदा मध्य विद्यालय का हाल, राम भरोसे चल रहा स्कूल नियुक्त दोनों पारा शिक्षक नहीं आते हैं स्कूल, स्कूल टाइम में मैदान में खेलते हैं बच्चे तितलीघाट स्कूल में खुद क्लास ले रहे हैं बच्चे, शिक्षक गायब किरीबुरू : मनोहरपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बहदा को अपग्रेड कर मध्य विद्यालय बहदा बनाया […]

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मनोहरपुर प्रखंड के बहदा मध्य विद्यालय का हाल, राम भरोसे चल रहा स्कूल

नियुक्त दोनों पारा शिक्षक नहीं आते हैं स्कूल, स्कूल टाइम में मैदान में खेलते हैं बच्चे
तितलीघाट स्कूल में खुद क्लास ले रहे हैं बच्चे, शिक्षक गायब
किरीबुरू : मनोहरपुर प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय बहदा को अपग्रेड कर मध्य विद्यालय बहदा बनाया गया है. विद्यालय को अपग्रेड तो किया गया, लेकिन शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गयी. प्रधानाध्यापक रामरूप महतो का नौ माह पहले तबादला हो गया. तब से दो पारा शिक्षक धर्मेंद्र महतो व केशवचंद्र महतो पर स्कूल की जिम्मेवारी है. ये दोनों शिक्षक नियमित रूप से स्कूल नहीं आते हैं.
इसका नतीजा है कि बच्चे स्कूल के समय में खेलते हैं. बुधवार को भी स्कूल टाइम में बच्चे खेल रहे थे. स्कूल में 250 बच्चे नामांकित हैं. शिक्षकों के स्कूल नहीं आने से धीरे-धीरे बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया. लिहाजा 250 बच्चों वाले स्कूल में बुधवार को मात्र 26 बच्चे ही स्कूल पहुंचे थे.
सरकार बंद कर दे स्कूल : माझी. वार्ड सदस्य कामेश्वर माझी ने कहा कि जब सरकार को इसी तरह स्कूल का संचालन करना है तो, स्कूल बंद कर देना चाहिए. शिक्षा को बदहाल कर सरकार का पैसा बर्बाद कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.
स्कूल के मध्याह्न भोजन की जांच की है दरकार. 250 बच्चों वाले स्कूल में मात्र 25 से 30 छात्रों की उपस्थिति स्कूल में वित्तीय अनियमितता को भी दर्शाता है. इस स्कूल के मध्याह्न भोजन की जांच की दरकार है. बच्चों की संख्या की वास्तविक स्थिति की जांच होने से कई खुलासे होने की संभावना है.
250 बच्चों वाले स्कूल में मात्र 25 से 30 छात्र आते हैं क्लास करने
बच्चों से पहले मिड डे मील खाकर चले जाते हैं गुरुजी
स्कूल के बच्चों ने बताया कि कभी-कभी शिक्षक स्कूल में दोपहर 11-12 बजे आते हैं. अपनी हाजिरी बनाते हैं और मध्याह्न भोजन खाकर चले जाते हैं. बच्चों का कहना था कि शिक्षकों के स्कूल नहीं से वे लोग भी अनियमित हो गये. स्कूल की रसोइया जाम्बी सिद्धु और मिरजू सिद्धु ने बताया कि शिक्षकों के नहीं आने के कारण बच्चों ने भी स्कूल आना छोड़ दिया है.
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