जिला पुलिस के अभियान से नक्सलियों ने बदली रणनीति

Updated at : 21 Feb 2017 6:53 AM (IST)
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जिला पुलिस के अभियान से नक्सलियों ने बदली रणनीति

कोड वर्ड में बात करने, मोबाइल का प्रयोग नहीं करने व मुखबिरी पर रोक लगाने का निर्देश सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों का कोड वर्ड क्रैक करने में जुटी चाईबासा : सारंडा से भाकपा (माओवादी) और पोड़ाहात से पीएलएफआइ को खत्म करने के लिए पश्चिम सिंहभूम पुलिस और सीआरपीएफ लगातार अभियान चला रही है. इससे नक्सली पीछे […]

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कोड वर्ड में बात करने, मोबाइल का प्रयोग नहीं करने व मुखबिरी पर रोक लगाने का निर्देश

सुरक्षा एजेंसियां नक्सलियों का कोड वर्ड क्रैक करने में जुटी
चाईबासा : सारंडा से भाकपा (माओवादी) और पोड़ाहात से पीएलएफआइ को खत्म करने के लिए पश्चिम सिंहभूम पुलिस और सीआरपीएफ लगातार अभियान चला रही है. इससे नक्सली पीछे हटने को विवश हुए हैं. सूत्रों के अनुसार नक्सली क्षेत्र में अपना पैर फिर से जमाने के लिए रणनीति में बदलाव किया है. नक्सलियों ने आपस में कोड वर्ड में बात करने, मोबाइल पर कम बात करने और मुखबिरी पर लगाम लगाने का निर्देश दिया है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां नक्सली गतिविधि के साथ उनके मोबाइल नंबर को ट्रैक किए हुए है. नक्सलियों के नये कोड वर्ड को क्रैक करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गयी है. हालांकि कुछ कोड वर्ड क्रैक हुए हैं.
सूत्रों की मानें, तो नक्सलियों ने कोल्हान के नये डीआइजी प्रभात कुमार के लिए टाइगर (पीके), पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अनीश गुप्ता के लिए सिंघ (सिंघम) व सीआरपीएफ 197 बटालियन के कमांडेंट टीएच खान के लिए नरसिम्हा (नवाब) और ग्रामीणों के लिए माटी-जन जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं.
हथियार छिपाने की जगह बदल रहे नक्सली
सुरक्षा बलों की बढ़ती गतिविधियों को देख नक्सली संगठन अपने हथियार को बचाने में लगा है. संगठन ने खासकर उन हथियारों की जगहों पहले बदला है, जो पकड़े गये नक्सली संगठन के सदस्यों की जानकारी में है.
हम किसी सूचना के प्रमाणित हुए बगैर कुछ नहीं कह सकते. जहां तक प्रतिबंधित संगठन द्वारा नये कोड वर्ड बनाने का सवाल है, तो हमारे एक्सपर्ट सभी तरह के कोड वर्ड का अर्थ निकालने और विश्लेषण करने में सक्षम हैं. – अनीश गुप्ता, पुलिस अधीक्षक, पश्चिम सिंहभूम
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